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3 महीनों बाद नगर निगम का दर्जा बचाने बारे विभाग को लिखा27 अक्टूबर को हेमंत ने डीसी अम्बाला को भेजी थी याचिका

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Feb 9, 2021

अम्बाला जिला प्रशासन की लेट-लतीफी
 
3 महीनों बाद नगर निगम का दर्जा बचाने बारे  विभाग को लिखा
27 अक्टूबर को हेमंत ने डीसी अम्बाला  को भेजी थी याचिका

अम्बाला शहर  –  27 अक्तूबर, 2020 को स्थानीय  डीसी (उपायुक्त ) अशोक शर्मा को ईमेल द्वारा भेजी गयी   एक याचिका (प्रतिवेदन )  उनके कार्यालय द्वारा  एक सप्ताह पूर्व 1 फरवरी 2021 को  प्रदेश के शहरी स्थानीय निकाय  विभाग के महानिदेशक  को
आवश्यक कार्यवाही हेतू भेजा गयी  है. अब ऐसा करने में  तीन माह से ऊपर की लेट-लतीफी  कैसे और क्यों हुई, इसका  वास्तविक कारण तो  जिला प्रशासन ही  बता सकता  हैं.

शहर निवासी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार  ने  27 अक्टूबर 2020 को डीसी के आधिकारिक ईमेल आईडी पर उपरोक्त याचिका भेजी जिसमें उन्होंने अम्बाला  नगर निगम के दर्जे को बचाने हेतू कानूनी संशोधन करवाने का   विषय उठाया था. 19 सितम्बर 2020  से लागू  हरियाणा  नगरपालिका  (संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा   प्रदेश   के  जिला मुख्यालयों  पर  बीते कई  वर्षो से स्थापित  नगर निगमों का कानूनी अस्तित्व ही समाप्त हो गया है क्योंकि  संशोधित प्रावधान अनुसार  हर  जिला मुख्यालय पर विद्धमान /स्थापित  म्युनिसिपेलिटी कर दर्जा  नगर परिषद का होगा   बेशक वहां की जनसँख्या कितनी भी हो.

 भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 (क्यू)  में और    हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 एवं  हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 दोनों कानूनों  में  म्युनिसिपेलिटी शब्द  का कानूनी अर्थ   है- नगर पालिका, नगर परिषद या नगर निगम. इस कारण  हरियाणा के हर  जिला मुख्यालय की हर म्युनिसिपेलिटी वर्तमान में कानूनन नगर परिषद  है. चूँकि  फरीदबाद नगर निगम का स्पष्ट उल्लेख हरियाणा नगर निगम  कानून, 1994 की धारा 3 में है इसलिए उसका  कानूनी अस्तित्व कायम है. वहीं दिसंबर, 2020 द्वारा अधिसूचित नई   मानेसर नगर निगम भी वैध है क्योंकि मानेसर जिला मुख्यालय नहीं है.  

हेमंत ने बताया कि हरियाणा नगरपालिका कानून, 1973  की धारा 2 ए में हरियाणा की सभी मुनिसिपलिटीस  का वर्गीकरण है जिसके अनुसार 50 हज़ार तक की जनसँख्या वाले छोटे शहरों  में नगरपालिका, 50 हज़ार से  तीन लाख तक  आबादी वाले   माध्यम शहरो में नगर परिषद  जबकि तीन लाख से ऊपर की जनसँख्या वाले बड़े शहरों /महानगरों में नगर निगम होगी.  

 वर्तमान में मानेसर के अलावा प्रदेश के  10 जिला मुख्यालयों- अम्बाला, पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, हिसार, रोहतक, सोनीपत, फरीदाबाद और गुरुग्राम नगर निगम है जबकि  11 जिला मुख्यालयों – कैथल, थानेसर (कुरुक्षेत्र), सिरसा, जींद, फतेहाबाद, भिवानी, चरखी दादरी, पलवल, रेवाड़ी, नारनौल और झज्जर में  नगर परिषद है. केवल नूहं  जिला मुख्यालय   में ही नगरपालिका है. यहाँ  की जनसँख्या  50 हज़ार से कम होने के कारण  कानूनी रूप से नूहं नगर पालिका को  नगर परिषद नहीं घोषित किया जा सकता  इसलिए यहाँ नगर परिषद बनाने  के लिए 1973 कानून  की  धारा 2 ए में  उपयुक्त  संशोधन कर यह उल्लेख  किया गया कि “परन्तु किसी जिला मुख्यालय पर विद्धमान /स्थापित  म्युनिसिपेलिटी ( नगर निकाय) इसकी जनसँख्या पर विचार किये बिना नगर परिषद होगी”.

हर जिला मुख्यालय में विद्धमान/स्थापित नगर  निकाय के लिए  नगर परिषद होने का उल्लेख न केवल निश्चित रूप से भ्रम उत्पन्न करता है बल्कि प्रदेश की वर्तमान नौ  जिला मुख्यालयों पर स्थापित नगर निगमों का  कानूनी अस्तित्व भी समाप्त करता है. उन्होंने  बताया कि हरियाणा नगरपालिका  (संशोधन) अधिनियम,2020  लागू होने के बाद  कानूनन 3 लाख से ऊपर जनसँख्या वाले  बड़े शहरों में तो नगर निगम स्थापित हो सकती है जैसे मानेसर में किया गया है   परन्तु हर जिला मुख्यालय  पर कानूनन नगर परिषद ही होगी बेशक वहां जनसँख्या  3 लाख से ऊपर हो. यह निश्चित तौर पर   विचित्र स्थिति है.

 हेमंत ने सर्वप्रथम   21 सितम्बर को उपरोक्त  विषय पर  हरियाणा  निर्वाचन आयोग को  प्रतिवेदन  भेजा  जिस पर  आयोग ने  संज्ञान लेकर  29 सितम्बर को शहरी निकाय विभाग के निदेशक  को  आवश्यक कार्यवाही करने हेतू लिखा. इसके बाद  भी वो लगातार आयोग और राज्य सरकार को निरंतर लिखते रहे हैं. इसी कड़ी में उन्होंने 27 अक्टूबर 2020  को अम्बाला के डीसी को भी लिखा.  इसी बीच दिसंबर, 2020 में अम्बाला सहित तीन नगर निगमों के चुनाव भी करवा लिए गए एवं गत माह जनवरी, 2021 में प्रत्यक्ष  निर्वाचित मेयरों  और सदस्यों की शपथ भी दिलवा दी गयी परंतु आज तक अंबाला ही नहीं  बल्कि  गुरुग्राम, हिसार, करनाल, पानीपत, पंचकूला, रोहतक,सोनीपत,यमुनानगर जिला मुख्यालयों पर भी कानूनन नगर निगम नहीं बल्कि नगर परिषद है.  

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