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20 पार्षदों हेतू चुनाव पर कानून में पार्षद (MC) शब्द ही नहीं -हेमंत

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Dec 26, 2020



हरियाणा नगर निगम कानून में  सदस्य, नगर निगम  का उल्लेख

अम्बाला शहर –  कल 27 दिसंबर रविवार   हरियाणा की तीन नगर निगमों – अम्बाला, पंचकूला और सोनीपत के तीनो मेयरों सहित सभी के  20 -20 पार्षदों, रेवाड़ी नगर परिषद् के अध्यक्ष एवं  ३१ पार्षदों, तीन नगर पालिकाएं – सांपला (रोहतक ), धारूहेड़ा (रेवाड़ी )  और उकलाना(हिसार ) तीनो  के अध्यक्ष एवं  क्रमश: 15 ,17 और 13 पार्षदों    और पांच अन्य नगर निकायों के एक-एक  वार्ड पार्षद   के लिए  उपचुनाव होगा. इन  चुनावो में उक्त नगर निकायों  के निवासी 8 लाख से ऊपर मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे.

ज्ञात रहे कि  अक्टूबर,  2018 में नगर निगम के  मेयर और सितम्बर, 2019 में  नगर पालिका और नगर परिषद् के अध्यक्ष/चेयरमैन  का चुनाव  प्रत्यक्ष रूप से करने सम्बन्धी हरियाणा विधानसभा द्वारा  कानूनी प्रावधान किया गया.  इससे  पूर्व नगर निगम के  मेयर और नगर परिषद्/पालिका चेयरमैन  का चुनाव इन  नगर निकायों  के वार्डो में से निर्वाचित पार्षदों के द्वारा एवं अपने में से ही किया  जाता था.

इसी बीच पंजाब  एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट और कानूनी विश्लेषक  हेमंत कुमार ने एक रोचक परन्तु महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि हालांकि सभी लोग  नगर   निकाय (म्युनिसिपेलिटी ) की तीनो प्रकार की संस्थाओ अर्थात नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका के   सम्बंधित वार्डो में से निर्वाचित प्रतिनिधियों को पार्षद या एमसी(MC)- म्युनिसिपल कौंसिल्लोर या म्युनिसिपल कॉर्पोरेटर  के नाम जानते और सम्बोधित  करते  है परन्तु वास्तव में  हरियाणा नगरपालिका कानून, 1973 , जो हरियाणा की नगर पालिकाओं और नगर परिषदों पर लागू होता है और नगर निगमों पर लागू  होने वाले हरियाणा नगर निगम कानून, 1994  दोनों कानूनों  में पार्षद/कॉरपोरेटर (MC )आदि शब्द का उल्लेख तक नहीं है  बल्कि इसके स्थान पर  सदस्य, नगर निगम (या नगर परिषद या नगर पालिका), जो भी सन्दर्भ हो, का  प्रयोग किया गया है. 
 3 दिसंबर को हरियाणा निर्वाचन आयोग द्वारा की गयी चुनावो घोषणा/नोटिफिकेशन   में भी पार्षद की बजाये सदस्य शब्द का ही उल्लेख है.  हेमंत ने  बताया कि भारत के संविधान के म्युनिसिपेलिटी से सम्बंधित अनुच्छेद 243 के  खंडो में भी कहीं भी पार्षद या मेयर शब्द का उल्लेख नहीं  है, हालांकि हरियाणा नगर निगम कानून में मेयर  और नगर पालिका कानून में अध्यक्ष  शब्द का प्रयोग किया गया है  परन्तु पार्षद/कॉरपोरेटर शब्द  कहीं भी नहीं है.

 उन्होंने आगे बताया कि हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 के अंतर्गत  हर नगर निगम में अधिकतम 3 व्यक्तियों को, जो म्युनिसिपल प्रशासन में विशेष ज्ञान या अनुभव रखते हो, को राज्य सरकार   नगर निगम में नामित  (नॉमिनेटेड ) सदस्य के तौर पर मनोनीत   कर सकती है. वहीं नगर परिषद् में भी अधिकतम 3 मनोनीत सदस्यों का प्रावधान है जबकि नगर पालिका में इनकी संख्या 2  ही हो  सकती है. इसी प्रकार हर नगर निगम, नगर परिषद् और नगर पालिका के क्षेत्र में निवासी हरियाणा विधानसभा के सदस्य /  विधायक और संसद सदस्य भी उस नगर निकाय के पदेन (अपने पद के कारण ) सदस्य होते हैं.

हेमंत ने बताया  हरियाणा  नगर निगम कानून के  मौजूदा प्रावधानों के अनुसार न तो मनोनीत सदस्य और न है स्थानीय विधायक एवं   सांसद को   नगर निगम/परिषद/पालिका  की किसी भी बैठक में वोट के अधिकार  का प्रयोग नहीं कर सकते हैं. हालाकिं  भारत के  संविधान के अनुसार हालांकि केवल  मनोनीत सदस्य  ही वोट नहीं दे सकते. परन्तु हरियाणा सरकार ने नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं की बैठकों में  स्थानीय विधायक और सांसद को न केवल  वोट देने के अधिकार  से कानूनन  वंचित कर रखा है.  

उन्होंने  ने बताया कि जून, 2013 में अम्बाला नगर निगम  चुनावो में (जब शहर और कैंट का संयुक्त नगर निगम था )   भाजपा ने  कुल 20 वार्डों में से  केवल 4 वार्डो में  जीत हासिल की  जिनमें से तीन  सदर (कैंट ) जोन से  थे – तत्कालीन वार्ड 14 से जसवीर जस्सी, वार्ड 17 से सुरिंदर बिंद्रा और वार्ड 20 से ललिता प्रसाद जबकि  शहर से भाजपा को केवल एक सीट मिली- तब के   वार्ड 8  से पुष्पिंदर कुमार उर्फ़ हरीश शर्मा. वहीँ  कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार 16 प्रत्याशी निर्दलीय के रूप में  विजयी हुए. इसके बाद  मार्च, 2016 में  वार्ड नंबर चार की पार्षद रमा रानी के त्यागपत्र के कारण हुए   उपचुनाव में भाजपा की मीनाक्षी कपूर  विजयी हुई थी जिससे भाजपा की  सीटें बढ़कर 5 हो गयी थी. इसके बाद मई, 2016 में हरियाणा सरकार ने तीन व्यक्तियों  को नगर निगम अम्बाला में  नॉमिनेटेड सदस्य के तौर  नामित कर दिया था जिसमे से दो  – राजेश गोयल और कृष्ण कुमार आनंद अम्बाला शहर से और एक  सतपाल ढल अम्बाला कैंट से थे. 

3 thoughts on “20 पार्षदों हेतू चुनाव पर कानून में पार्षद (MC) शब्द ही नहीं -हेमंत”
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