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14 सितम्बर को हिन्दी दिवस पर विशेष–हिंदी का वर्चस्व और महत्व पुरे विश्व में बढ़ रहा है।

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Sep 12, 2021


अम्बाला/शहजादपुर/नारायणगढ़, 12 सितम्बर:-
 हिंदी एक व्यवहारिक भाषा है, जो पूरे देश को एकता के सूत्र में बांधती है। अक्सर हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी के अस्तित्व, महत्व और वर्चस्व पर सारे देश में खासकर हिंदी भाषी समाज में एक बहस शुरू होती है। इस विषय में कुछ शिक्षाविदों से बातचीत की गई तो सतपाल गिरोत्रा, प्राचार्य राजकीय महिला महाविद्यालय, शहजादपुर (अम्बाला)ने कहा कि लचीलापन हिंदी भाषा का सबसे महत्वपूर्ण गुण है। इससे हिंदी भाषा विभिन्न बोलियों तथा भाषाओं से समन्वय बनाकर लोगों को विचार-विनिमय का महत्वपूर्ण माध्यम व मंच उपलव्ध करवाती है। हिंदी के विकास के लिये जरूरी है कि हम अपने कार्यक्षेत्र पर हिंदी का अधिक से अधिक प्रोयाग करें।
डॉ. निर्मल सिंह, सहायक प्रोफैसर हिंदी विभाग, राजकीय महिला महाविद्यालय, शहजादपुर (अम्बाला)ने कहा कि हिंदी कि स्थिति केवल भारत ही नहीं अपितु वैश्विक स्तर पर भी बहुत अच्छी है। आज विश्व के अधिकांश विश्वविद्यालयों में हिंदी भाषा का पठन-पाठन हो रहा है। आज अस्तित्ववादी विमर्शों के कारण स्त्री विमर्श तथा आदिवासी विमर्श आदि पर व्यापक साहित्य रचना हो रही है। जिससे मुख्यधारा का साहित्य और अधिक समृद्ध हुआ है। सोशल मिडिया के आने से हिंदी की स्थिति बहुत बेहतर हुई है।
डॉ. यशपाल, सहायक प्रोफैसर अंग्रेजी विभाग, राजकीय महिला महाविद्यालय, शहजादपुर (अम्बाला) ने कहा कि भाषाओं का आपस में कोई मतभेद नहीं होता है। सभी भाषाएँ हमारे जीवनयापन को सरलता व सहजता प्रदान करती हैं। अक्सर हिंदी तथा अंग्रेजी को एक दुसरे की विरोधी भाषाएँ दिखाया जाता है जो सरासर निरर्थक व तथ्यहीन बात है।
सुमन लता, सहायक प्रोफैसर वाणिज्य विभाग, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नारायणगढ़ ने कहा कि हिंदी में व्यापारिक और व्यावसायिक भाषा बनने के सभी गुण विद्यमान हैं। यही कारण है कि आज सभी बहुराष्ट्रीय कम्पनियां भारत में अपने उत्पाद बेचने तथा अपने व्यापार को बढाने के लिए हिंदी भाषा का इस्तेमाल करती हैं। चाहे टीवी पर दिखाये जाने वाले विज्ञापन हों या अन्य माध्यमों से उत्पाद जनता तक पहुंचाना इसके लिए हिंदी भाषा की आवश्यकता पडती है। इसलिए हिंदी के जानकारों की मांग लगातार बढ़ रही है।
सुभाष कुमार, एसोसिएट प्रोफैसर अर्थशास्त्र विभाग, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नारायणगढ़ ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भाषा का महत्वपूर्ण योगदान होता है। यदि शिक्षा विद्यार्थी कि मातृभाषा में दी जाये तो निश्चित ही उसके परिणाम बहुत बेहतर होंगे। किसी भी देश कि अर्थव्यवस्था उस देश की शिक्षा पर निर्भर करती है। हिंदी भाषा हमारे देश की मातृभाषा है जो निश्चित ही देश की आर्थिक उन्नति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
राजकुमार, सहायक प्रोफैसर भूगोल विभाग, राजकीय महिला महाविद्यालय, शहजादपुर (अम्बाला)ने कहा कि हमें हिंदी का प्रयोग करने में गर्व की अनुभूति होनी चाहिये। हमें बेहतर तरीके से शुद्ध हिंदी बोलने का प्रयास करना चाहिये। हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा है। इसमें सभी ध्वनियों को लिखने के लिए अलग-अलग संकेत हैं। इसलिए कंप्यूटर के क्षेत्र में भी इस भाषा का सफलतापूर्वक प्रयोग किया जा रहा है।
नताशा, सहायक प्रोफैसर गणित विभाग, राजकीय महिला महाविद्यालय, शहजादपुर (अम्बाला) ने कहा कि भारत में हिंदी अपने अस्तित्व में आने के बाद से कई परिवर्तनों से होकर गुजरी है, जो इसकी प्रगतिशीलता को दर्शाता है। जिस भाषा में प्रगतिशीलता का गुण हो वह कभी भी समाप्त नहीं हो सकती। यह उक्ति हिंदी भाषा पर पूरी सटीकता से लागू होती है।
संजीव कुमार, प्राचार्य, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नारायणगढ ने कहा कि यह बड़ी विडंम्बना है कि हिन्दी भाषी देश में हिंदी दिवस मनाने कि आवश्यकता पड़ रही है। मेरे विचार में इसका सबसे बड़ा कारण क्षेत्रीय भाषाओं का हस्तक्षेप होने के साथ साथ अंग्रेजी भाषा जो अंतराष्ट्रीय भाषा है उसका आवश्यकता से अधिक प्रयोग होना है। हिंदी की गुणवता और महत्व को लोगों के सामने प्रस्तुत करने कि आवश्यकता है।

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