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हुड्डा और शैलजा के राजनीतिक सफर के 30 -30 वर्ष हुए पूरे – हेमंत

Byadmin

Jul 6, 2021

हुड्डा और शैलजा के राजनीतिक सफर  के 30 -30  वर्ष  हुए पूरे – हेमंत

1991 लोकसभा चुनावों में  दोनों को  मिली थी पहली चुनावी जीत


चंडीगढ़ – दो वर्षो बाद एक बार फिर  हरियाणा कांग्रेस में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे  और मौजूदा  विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा एवं उनके समर्थको के तेवर  तल्ख़  हो गए हैं. उन्होंने पार्टी हाईकमान से प्रदेश कांग्रेस के  वर्तमान  नेतृत्व को बदलने की मांग रखी  है.  

सितम्बर, 2019 में  हुड्डा के ऐसे ही  तीखे तेवरों के फलस्वरूप  हाईकमान ने उन्हें  अक्टूबर, 2019  हरियाणा विधानसभा आम चुनावो  के लिए   चुनाव प्रबंधन कमेटी का चेयरमैन बनाया  था जबकि शैलजा को अशोक तंवर के स्थान पर  प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था. बहरहाल, अब हरियाणा कांग्रेस में मचे ताज़ा घमासान पर   पार्टी क्या निर्णय लेती है, वह तो आने वाला समय ही बताएगा.

बहरहाल, इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने हुड्डा और शैलजा के आज तक के राजनीतिक सफर/जीवन से सम्बंधित आंकड़ों का गहन अध्ययन कर   बताया कि जहाँ तक आयु  का विषय है, तो दोनों का जन्म  सितम्बर माह में ही हुआ हालांकि हुड्डा उम्र से शैलजा से पूरे 15 वर्ष बड़े हैं.  

हेमंत ने बताया कि शैलजा के पिता चौधरी दलबीर सिंह, जो सिरसा लोक सभा सीट से चार बार सांसद निर्वाचित हुए, के 1987 में निधन के बाद जब सिरसा सीट पर उपचुनाव हुआ तो वह शैलजा का पहला चुनाव था जिसमें वह देवी लाल की  लोकदल (बी )  के हेत राम से  चुनाव हर गयी थीं.  इसके बाद शैलजा ने 1989 में सिरसा से लोकसभा  चुनाव नहीं लड़ा.    

 दूसरी और  हुड्डा ने  वर्ष 1982 हरियाणा विधानसभा आम चुनावो में उनका  पहला  चुनाव रोहतक में  किलोई विधानसभा सीट  से  लड़ा परन्तु उन्हें   देवी लाल की लोकदल पार्टी के हरी चंद ने पराजित कर दिया था. उसके  पांच वर्षों  बाद 1987 विधानसभा आम चुनावो में  हुड्डा  को उसी सीट से एक  पुन: हार का मुँह देखना पड़ा और तब उन्हें  लोकदल के श्री कृष्ण हुड्डा  (जिनका  पिछले  वर्ष 2020 में  निधन हुआ  ) ने हराया था.  

हालांकि वर्ष 1991 लोक सभा चुनावों में  हुड्डा ने  देवी लाल को रोहतक लोक सभा सीट से और शैलजा ने हेत राम को सिरसा सीट से पराजित किया. इस प्रकार हुड्डा और शैलजा दोनों को अपने राजनीतिक जीवन की पहली जीत 1991 लोक सभा चुनावो में ही  प्राप्त हुई थी.  इसके बाद केंद्र की तत्कालीन पीवी नरसिम्हा राव सरकार में  वर्ष 1992 -95  में शैलजा   पहले केंद्रीय उप-मंत्री और बाद में  1995 -96  में केंद्रीय  मानव संसाधन मंत्रालय में  राज्य मंत्री रही थी.    

1996 लोकसभा आम चुनावो में जब कांग्रेस  को देश भर में हार का सामना करना पड़ा तो हरियाणा की 10 लोकसभा सीटों में  केवल हुड्डा और शैलजा ही जीते. हुड्डा ने  दूसरी बार रोहतक से देवी लाल को जबकि शैलजा ने समता पार्टी के सुशील इंदोरा को हराया.

इसके बाद 1998 में लोक सभा के मध्यमाधि चुनावो में  हुड्डा ने तो देवी लाल को तीसरी बार रोहतक से हराकर हैट्रिक बनायीं परन्तु उन चुनावो में सिरसा से सुशील इंदोरा ने शैलजा को पराजित कर दिया.  इसके बाद 1999 लोक सभा आम चुनावो में शैलजा ने चुनाव नहीं लड़ा जबकि हुड्डा को रोहतक से कैप्टन इंद्र सिंह ने हराया.  

फिर 2004 लोकसभा चुनावों में शैलजा ने अपना चुनावी  क्षेत्र बदल लिया और अम्बाला लोकसभा सीट से चुनाव लड़ भाजपा के रतन लाल कटारिया को पराजित किया. वहीं रोहतक लोक सभा से हुड्डा ने भाजपा के कैप्टन  अभिमन्यु को हराया.
इसके बाद मनमोहन सिंह की पहली यू.पी.ए.-1   सरकार में शैलजा को  वर्ष 2004 -2009 तक केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया. वहीं दूसरी ओर 2005 हरियाणा विधानसभा आम चुनावो के बाद  हुड्डा मार्च, 2005 में  प्रदेश  के मुख्यमंत्री बने जिस पद पर  वह  अक्टूबर, 2014 तक रहें.  
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इसी दौरान 2009 लोकसभा चुनावों से शैलजा ने  अम्बाला  सीट से भाजपा के कटारिया को दोबारा  हराकर चुनाव
जीता जिसके बाद उन्हें   यू.पी.ए. -2 सरकार में  कैबिनेट रैंक का मंत्री बना दिया गया था. इस प्रकार शैलजा  केंद्रीय मंत्री की हर श्रेणी – उप मंत्री, राज्य मंत्री, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं कैबिनेट मंत्री के तौर पर रह चुकी हैं.

हेमंत ने बताया कि शैलजा  ने अप्रैल, 2014  में  अम्बाला से लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा क्योंकि चुनावों से पूर्व ही वह  हरियाणा से राज्यसभा हेतु  6 वर्षो के लिए  निर्वाचित हो गयी थीं. इसके बाद  राज्यसभा सांसद रहते शैलजा ने  मई, 2019 में  अम्बाला  लोकसभा सीट से हालांकि चुनाव लड़ा परन्तु वह भाजपा के  कटारिया से हार गयीं. उस चुनावों  में   हुड्डा ने भी  सोनीपत सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा जहाँ से वह भाजपा के रमेश कौशिक से हार गए. इस प्रकार हुड्डा और  शैलजा दोनों ने  आज तीन लोक सभा चुनावो – 1991 , 1996 और 2004 में एक साथ विजयश्री  हासिल की जबकि 2019 लोकसभा चुनावो में दोनों एक साथ पराजित हुए. 

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