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हरियाणा में नगर निगमों के आम चुनाव करवाने पर कानूनी पेच

Byadmin

Dec 3, 2020


 
संशोधित नगरपालिका कानून अनुसार हर जिला मुख्यालय पर नगर परिषद

निर्वाचन आयोग द्वारा शहरी निकाय विभाग को दो बार लिखने बावजूद कोई कार्यवाही नहीं
 
राज्यपाल द्वारा जारी अध्यादेश से कानूनी संशोधन बाद नगर निगम होंगे बहाल  – 

चंडीगढ़ – हरियाणा  निर्वाचन आयोग  द्वारा प्रदेश के  तीन नगर निगमों – अम्बाला, पंचकूला, सोनीपत और  रेवाड़ी  नगर परिषद  एवं  अन्य नगर निकायों के आम चुनाव/उपचुनाव की घोषणा होने वाली है. इसी  दिसंबर माह के अंत तक उक्त  चुनाव प्रक्रिया संपन्न हो सकती है.

इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने एक बार पुन: प्रदेश के राज्यपाल, निर्वाचन आयोग आदि  को लिखा है कि उपरोक्त  तीन नगर निगमों के चुनाव करवाने  से पूर्व इनका नगर निगम के तौर पर  कानूनी अस्तित्व/दर्जा बचाना अति आवश्यक है. उन्होंने लिखा है  कि हरियाणा नगरपालिका  (संशोधन) अधिनियम, 2020 , जो 19 सितम्बर 2020 से लागू हुआ,  द्वारा  हरियाणा नगरपालिका कानून, 1973 की धारा  2 ए में किये संशोधन से एक गड़बड़ी उत्पन्न हो गयी   जिसके अनुसार  हरियाणा   के 10 जिला मुख्यालयों  पर  बीते कई  वर्षो से स्थापित नगर निगमों का कानूनी अस्तित्व ही समाप्त हो गया है क्योंकि उपरोक्त   संशोधन  अनुसार हर  जिला मुख्यालय पर विद्धमान /स्थापित  म्युनिसिपेलिटी   ( नगर निकाय) का स्तर नगर परिषद का होगा  बेशक वहां की जनसँख्या कितनी ही  हो. दुर्भाग्यवश बीते माह 6 नवंबर  को   विधानसभा द्वारा   पारित हरियाणा नगरपालिका   (दूसरे संशोधन) कानून, 2020   द्वारा उक्त गड़बड़ी को  सुधारा  नहीं गया है जिस कारण यह आज तक व्याप्त है. .  

ज्ञात रहे  कि उक्त  1973 कानून  की धारा 2 ए में हरियाणा में सभी  नगर निकायो का वर्गीकरण है जिसके अनुसार 50 हज़ार तक की जनसँख्या वाले छोटे शहरों  में नगर पालिका, 50 हज़ार से अधिक एवं तीन लाख से कम आबादी वाले   मध्यम शहरो में नगर परिषद  जबकि तीन लाख से ऊपर की जनसँख्या वाले बड़े नगरों/महानगरों में नगर निगम होगी. हेमंत ने बताया कि प्रदेश में  नगर निकायो का वर्गीकरण (नगर निगम सहित ) हरियाणा नगरपालिका कानून,1973  की धारा 2 ए में  ही है. वर्ष 2002 में भी जब तत्कालीन चौटाला सरकार ने  नगर निगम स्थापित करने के लिए  जनसँख्या की आवश्यक सीमा को 5 लाख से घटाकर न्यूनतम 3 लाख किया, तब 1973 कानून  की उक्त धारा में ही  संशोधन किया गया था.  

ज्ञात रहे कि वर्तमान में प्रदेश के  10 जिला मुख्यालयों- अम्बाला, पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, हिसार, रोहतक, सोनीपत, फरीदाबाद और गुरुग्राम में  नगर निगम जबकि  11 जिला मुख्यालयों – कैथल, थानेसर (कुरुक्षेत्र), सिरसा, जींद, फतेहाबाद, भिवानी, चरखी दादरी, पलवल, रेवाड़ी, नारनौल और झज्जर में  नगर परिषद है. केवल नूहं  जिला मुख्यालय   में ही नगरपालिका है. यहाँ  की जनसँख्या  50 हज़ार से कम होने के कारण  कानूनी रूप से नूहं नगर पालिका को  नगर परिषद नहीं घोषित किया जा सकता  इसलिए यहाँ नगर परिषद  के लिए 1973 कानून  की  धारा 2 ए में  उपयुक्त  संशोधन कर यह उल्लेख  किया गया कि “परन्तु किसी जिला मुख्यालय पर विद्धमान /स्थापित  नगर निकाय इसकी जनसँख्या पर विचार किये बिना नगर परिषद होगी”.

 हेमंत  ने बताया  कि अगर कानूनन निर्धारित  की गयी जनसँख्या की  सीमा   से कम  आबादी  होने के बावजूद भी   नूहं जिला मुख्यालय  में नगर परिषद स्थापित करनी है, तो  उक्त संशोधित धारा  2 ए  में उल्लेख करना चाहिए   कि जनसँख्या के बावजूद  जिला नूहं मुख्यालय पर  नगर परिषद होगी अथवा  यह उल्लेख किया जाना चाहिए  कि जनसँख्या के बावजूद हर जिला मुख्यालय पर विद्धमान /स्थापित म्युनिसिपेलिटी (नगर निकाय) का स्तर कम से कम नगर परिषद का होगा अर्थात वहां नगर परिषद भी हो सकती है अथवा उससे एक स्तर ऊपर अर्थात  नगर निगम भी.  भारत के संविधान में एवं  हरियाणा नगरपालिका कानून, 1973 और हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 में भी म्युनिसिपेलिटीस  का कानूनी अर्थ होता है- नगर पालिका, नगर परिषद या नगर निगम.

 हर जिला मुख्यालय में विद्धमान/स्थापित नगर  निकाय के लिए  नगर परिषद होने का उल्लेख न केवल निश्चित रूप से भ्रम उत्पन्न करता है बल्कि वर्तमान   दस जिला मुख्यालयों पर स्थापित नगर निगमों के कानूनी अस्तित्व भी समाप्त कर देता है. उन्होंने  बताया कि हरियाणा नगरपालिका  (संशोधन) अधिनियम,2020  लागू होने के बाद  कानूनन 3 लाख से ऊपर जनसँख्या वाले प्रदेश के बड़े नगरों में तो नगर निगम स्थापित हो सकती है   परन्तु हर जिला मुख्यालय  पर कानूनन नगर परिषद ही होगी बेशक वहां जनसँख्या  3 लाख से ऊपर हो. निश्चित तौर पर इससे  बेहद विचित्र स्थिति उत्पन्न हो  जायेगी. वर्तमान में हरियाणा में 10  नगर निगम, 21 नगर परिषदें और 57 नगर पालिकाएं हैं. प्रदेश के 11 उक्त जिला मुख्यालयों  के अलावा दस अन्य शहरो – अम्बाला सदर, गोहाना, बहादुरगढ़, होडल, सोहना, हांसी, टोहाना, मंडी डबवाली, नरवाना और कालका में भी नगर परिषद है.

इस सम्बन्ध में हेमंत ने पहले  21 सितम्बर को हरियाणा  निर्वाचन आयोग को  प्रतिवेदन  भेजा  जिस पर  आयोग ने संज्ञान लेकर  29 सितम्बर को शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक  को  आवश्यक कार्यवाही करने के लिए पत्र लिखा. इसके बाद  7 नवंबर को दोबारा आयोग को याचिका भेजी जिसे  13 नवंबर को फिर  विभाग को कार्यवाही हेतू भेज दिया गया  परन्तु  आज  तक इस सम्बन्ध में कुछ नहीं किया गया है.  इसी बीच संशोधित उक्त धारा 2 ए में बीती  3  नवंबर  को विभाग द्वारा   गजट नोटिफिकेशन जारी कर नूहं जिला मुख्यालय पर वर्तमान स्थापित नगर पालिका को  नगर परिषद घोषित करने का प्रस्ताव किया गया. उन्होंने बताया कि राज्यपाल से तत्काल अध्यादेश जारी करवाकर हरियाणा नगरपालिका कानून की उक्त धारा  में पुन: संशोधन करवाकर नगर निगमों को बहाल किया जा सकता है.      

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