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हरियाणा नगर निगम कानून में पार्षद की बजाए नगर निगम सदस्य का प्रावधान – हेमंत

Byadmin

Mar 23, 2021

नगर निगम कमिश्नर और मेयर द्वारा  पार्षद शब्द का प्रयोग न करने की मांग
निर्वाचन सर्टिफिकेट और शपथग्रहण दौरान भी पार्षद शब्द का नहीं हुआ प्रयोग

अम्बाला शहर  –  हरियाणा विधानसभा के बीते सप्ताह समाप्त हुए  बजट सत्र में गत सोमवार 15 मार्च को प्रदेश की  भाजपा-जजपा सरकार द्वारा सदन में हरियाणा नगर निगम  (संशोधन) विधेयक, 2021 और हरियाणा नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2021  पारित करवाए  गए. इनके द्वारा  दोनों मूल कानूनों की कई धाराओं में संशोधन किया गया है जिसमे नगर निकायों द्वारा अपने क्षेत्राधिकार में वार्षिक तौर पर लगाए जाने वाले प्रॉपर्टी टैक्स (जो वर्षों पहले हाउस टैक्स होता  था ) के निर्धारण फार्मूला में बदलाव किया गया था एवं इस सम्बन्ध में नगर निकायों को राज्य सरकार द्वारा नोटिफाई किये जाने वाले फ्लोर रेट के हिसाब से  प्रॉपर्टी टैक्स लगाने एवं वसूल करने का प्रावधान किया गया है.

बहरहाल, शहर निवासी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार  ने बताया  हालांकि हरियाणा में हर  नगर निगम/नगर परिषद/नगर पालिका के  वार्डों से जीते प्रतिनिधियों को ने केवल आम लोगों / जनसाधारण द्वारा बल्कि सम्बंधित नगर निकाय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा सम्बंधित  नगर निकाय का  पार्षद / म्युनिसिपल कौंसिलर (एमसी  ) के नाम से जाना  जाता है परन्तु    वास्तव में और कानूनन न तो  मौजूदा हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 में,  जो हरियाणा में सभी नगर निगमों  पर लागू होता है और न ही हरियाणा म्युनिसिपल अधिनियम, 1973 , जो प्रदेश की नगर परिषदों और पालिकाओं पर लागू होता है,   में पार्षद/म्युनिसिपल कौंसिलर  जैसे  किसी   शब्द का उल्लेख ही नहीं है  बल्कि इसके स्थान पर 1994 नगर निगम कानून की धारा 2 (24 ) में  सदस्य, नगर निगम  जबकि 1973 नगरपालिका कानून की धारा 2 (14 ए) में   सदस्य, नगर पालिका/परिषद  का  ही उल्लेख  है.  इसी तरह हरियाणा नगर निगम निर्वाचन नियमावली, 1994 और हरियाणा नगर पालिका निर्वाचन नियमावली, 1978 जिसके अंतर्गत सभी नगर निकायों के चुनाव करवाए जाते हैं,  में भी पार्षद/म्युनिसिपल कौंसिलर शब्द का उल्लेख नहीं हैं. नगर निकाय चुनाव में वार्डों से  निर्वाचित प्रतिनिधियों को जो निर्वाचन प्रमाण-पत्र  चुनावो के रिटर्निंग अफसर (आर.ओ.) द्वारा  दिया जाता है, उस पर  भी नगर निगम/परिषद/पालिका सदस्य का ही उल्लेख होता है एवं इसी प्रकार उन्हें शपथ भी नगर निगम/परिषद/पालिका सदस्य के तौर पर ही दिलवाई जाती है.

 हेमंत ने  बताया कि भारत के संविधान के म्युनिसिपेलिटी से सम्बंधित अनुच्छेद 243 के  खंडो में भी कहीं भी पार्षद या मेयर शब्द का उल्लेख नहीं  है हालांकि हरियाणा नगर निगम कानून,1994  में मेयर शब्द का उल्लेख डाला गया  है  परन्तु नगर निगम पार्षद/म्युनिसिपल कौंसिलर आदि का नहीं है. अब इस सबके बावजूद  वार्डो से जीतने वाले  नगर निगम सदस्य भी अपने घर और अपने इलाके में अपना नाम और पद दर्शाने वाली  नेमप्लेट/साइनबोर्ड एवं अपने नाम से बनाये  जाने वाली रबड़ स्टाम्प /मुहर आदि में अपना पदनाम एमसी (पार्षद/कौंसलर ) और कई बार कॉर्पोरेटर  लिखवाते  हैं जो कि अत्यंत आश्चर्यजनक और दुर्भाग्यपूर्ण   है.    

उन्होंने बताया कि हालांकि  देश के कई राज्यों जैसे पंजाब, दिल्ली, हिमाचल  आदि में स्थापित नगर निगमों के निर्वाचित सदस्य अपने लिए  पार्षद/कौंसिलर  शब्द/पदनाम  का प्रयोग करते हैं जो कि कानूनन वैध है क्योंकि इन सभी प्रदेशो के नगर निगम कानून जैसे पंजाब नगर निगम कानून, 1976 में ये शब्द मौजूद है परन्तु हरियाणा  में इस शब्द का कानूनन उल्लेख नहीं गया है.  

हेमंत ने अम्बाला नगर निगम के आयुक्त पार्थ गुप्ता, आईएएस और मेयर शक्ति रानी शर्मा एवं नगर निगम एवं जिला प्रशासन के सभी अधिकारीगण से मांग की है कि चूँकि हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 में वार्डो से निर्वाचित नगर निगम प्रतिनिधियों का कानूनी एवं आधिकारिक पदनाम नगर निगम सदस्य है न कि पार्षद एवं  उनके निर्वाचन सर्टिफिकेट पर भी नगर निगम सदस्य का ही उल्लेख है और नगर निगम सदस्य के तौर पर ही  उन्होंने शपथ भी ग्रहण की है, इसलिए  हर आधिकारिक पत्र और दस्तावेज में उनके नाम के साथ नगर निगम सदस्य ही दर्शाया जाए एवं निगम  बैठकों में  उन्हें नगर निगम सदस्य के तौर पर ही सम्बोधित किया जाए.

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