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हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण की नवगठित टेक्निकल कमेटी की आज पहली बैठक हुई।

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Sep 28, 2020

चंडीगढ़, 28 सितंबर- हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण की नवगठित टेक्निकल कमेटी की आज पहली बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता प्राधिकरण के कार्यकारी उपाध्यक्ष श्री प्रभाकर कुमार वर्मा ने की। इसमें प्राधिकरण की उपलब्धियों व कार्यशैली के बारे में विस्तार से चर्चा की गई।

        श्री प्रभाकर कुमार वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल, जो इस प्राधिकरण के अध्यक्ष भी हैं, के मार्गदर्शन व उनकी दूरदर्शिता के कारण हरियाणा तालाब प्राधिकरण के गठन के पश्चात प्राधिकरण को तकनीकी सलाह हेतु टेक्निकल कमेटी का गठन किया गया है।

        बैठक में कोविड-19 के मद्देनजर मास्क पहनने, सैनिटाइजेशन व सोशल डिस्टेंसिंग जैसे सभी मानदंडों का पूरी तरह से पालन किया गया। बैठक में प्राधिकरण द्वारा पीडीएमएस पर तैयार किए गए प्रदेश के सभी आधा एकड़ एवं इससे बड़े कुल 10731 (शहरी व ग्रामीण) तालाबों को उनके पूरे विवरण और अलग आईडी तथा उनके विभिन्न वर्गीकरण को कमेटी के सामने रखा गया।

        श्री वर्मा ने बताया कि वर्तमान में निर्माणाधीन 18 मॉडल तालाबों में घरों से जो गंदा पानी आ रहा है, उसे कंस्ट्रक्टेड वेटलैंड टेक्नॉलॉजी द्वारा उपचारित करने के बाद ही इन तालाबों में डाला जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2020-21 में प्रस्तावित 200 तालाबों की डिजिटल ड्राईंग्स बनाई जा रही हैं, जिनके आधार पर जीर्णोद्धार का कार्य जल्द ही आरंभ किया जाएगा।

        उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा हाल ही में दिए गए आदेशों के अनुसार आधा एकड़ से नीचे के सभी तालाबों का डाटा पीडीएमएस द्वारा संग्रह करना शुरू कर दिया गया है। साथ ही, एनजीटी के निर्देशानुसार तालाबों की सीमा में डाले जा रहे कूड़ा-करकट एवं पशुओं के गोबर का डाटा भी पीडीएमएस द्वारा एकत्र करना शुरू कर दिया गया है।

        बैठक में समिति के समक्ष कुछ बिन्दु तथा अपशिष्ट जल उपचार हेतु पाँच अलग-अलग एजेंसियों के प्रस्तुतिकरण दिए गए, जिन पर समिति के सभी सदस्यों ने महत्वपूर्ण निर्णय लिए।

        बैठक में सभी सदस्यों विशेषकर सी. आर. बाबू, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सदस्य भी हैं, ने तालाब प्राधिकरण द्वारा अपनाई जा रही तकनीक एवं अब तक किए गए कार्यों की सराहना की व महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। उन्होंने बताया कि कंस्ट्रक्टेड वेटलैंड टेक्नॉलॉजी द्वारा दिल्ली के नीला होज़ झील में गंदे नाले के पानी को उपचारित किया जा रहा है। उसके परिणाम बहुत अच्छे हैं। यह टेक्नॉलॉजी बहुत ही किफायती है तथा इस पर बिजली या अन्य कोई खास खर्च नहीं होता है।

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