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हरियाणा के शहरी इलाको में अचल संपत्ति का ट्रान्सफर हुआ महंगा

Byadmin

Mar 6, 2021



हर नगर निगम/परिषद/पालिका में 2 % अतिरिक्त लगेगी स्टाम्प ड्यूटी – हेमंत 
अम्बाला शहर  – हरियाणा  के हर शहरी क्षेत्र अर्थात प्रदेश की प्रत्येक  नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका में स्थित अचल संपत्ति (भूमि/मकान/दुकान आदि ) के किसी भी प्रकार द्वारा   एक से दूसरे को  अंतरण (ट्रांसफर) किये जाने यानि उनकी बिक्री, आदान-प्रदान, उपहार (गिफ्ट ) में देने , अचल संपत्ति को  बंधक/गिरवी रख प्राप्त धनराशि, अचल संपत्ति की अनंतकाल लीज (पट्टे) पर देना अब और महंगा हो गया है.

बीते कल 5 मार्च को हरियाणा सरकार के शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एस.एन. रॉय के हस्ताक्षर से  जारी दो गजट नोटिफिकेशनों द्वारा प्रदेश के हर  नगर निगम/परिषद/ पालिका में स्थित अचल संपत्ति  के ट्रांसफर पर दो प्रतिशत (2 %) की दर से अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी लगायी दी गयी है. प्रदेश के नगर निकायों की वित्तीय स्थिति को  सुधारने के लिए ऐसा निर्णय लिया गया है.
शहर निवासी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार
ने इस सम्बन्ध में अध्ययन कर बताया कि जहाँ तक नगर निगमों का विषय है, तो उक्त नोटिफिकेशन हरियाणा नगर निगम अधिनियम (कानून ), 1994 की धारा 87 के अंतर्गत जारी की गयी है जबकि प्रदेश की नगर परिषदों और नगर पालिकाओं के सम्बन्ध में यह हरियाणा नगरपालिका (म्युनिसिपल ) कानून, 1973 की धारा 69 में जारी हुई है.  उन्होंने बताया कि हालांकि उक्त दोनों कानूनी धाराओं में टैक्स एवं ड्यूटी (शुल्क ) लगाने के लिए सम्बंधित नगर निकायों  सक्षम है परन्तु यह भी प्रावधान है कि राज्य सरकार  इस सम्बन्ध में नोटिफिकेशन और आदेश जारी कर  सकती है जैसा अब किया गया है.

हेमंत ने आगे  बताया कि ताज़ा नोटिफिकेशनों के अनुसार उपरोक्त  अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी अचल संपत्ति की ट्रांसफर से सम्बंधित दस्तावेजों की रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण ) के समय भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के अधीन पदांकित रजिस्ट्रार या सब-रजिस्ट्रार द्वारा वसूल किया  जाएगा एवं बाद में ऐसी धराशि को  अनुक  नगर निगम के कमिश्नर या सम्बंधित पालिका (म्युनिसिपेलिटी ) को उसका भुगतान किया जाएगा, जिसके अधिकार-क्षेत्र में  सम्बंधित  अचल संपत्ति स्थित है. इसके अतिरिक्त दोनों नोटिफिकेशनो में यह भी उल्लेख है उक्त अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी का सम्बंधित नगर निगम के कमिश्नर या प्रासंगिक  पालिका के सक्षम अधिकारी (जैसे परिषद/पालिका  के ईओ/ सचिव ) के अकाउंट में और निदेशक, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अकाउंट में समान रूप से भुगतान किया जाएगा. इस समय प्रदेश में कुल 90 नगर निकाय हैं. 

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