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हरियाणा के राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय बुधवार को राजभवन में स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर उनकी मूर्ति पर पुष्प अर्पित कर नमन करते हुए।

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Jan 12, 2022

चंडीगढ़, 12 जनवरी-  स्वामी विवेकानंद सच्चे राष्ट्रवादी, महान हिंदू संत, आध्यात्मिकता तथा भारतीय संस्कृति के प्रतीक थे, जिन्होंने हिंदू दर्शन, योग, वेदान्त व आध्यात्म को विश्व में परिचित करवाया। यह बात हरियाणा के राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय ने बुधवार को राजभवन में स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर उनकी मूर्ति पर पुष्प अर्पित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने भारतीय आध्यात्म व वेदांत के प्रचार-प्रसार के लिए विदेशों की यात्राएं की और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। इस मिशन की सफलता के लिए उन्होंने जीवन पर्यन्त कार्य किया। उनकी आभा और तेज प्रभाव से अमेरिका सहित यूरोपीय देशों के लोग बड़ी संख्या में उनके शिष्य बन गए। स्वामी विवेकानंद जब भाषण करते थे तो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते थे। इस प्रकार से अपनी इस प्रभावी शैली से उन्होंने विदेशी युवाओं को अपना बना लिया था। स्वामी जी ने 1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद को सम्बोधित करते हुए सनातन परम्परा और सहिष्णुता से अवगत कराया था।
राज्यपाल श्री दत्तात्रेय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने सदैव युवाओं को सकारात्मक ऊर्जा के लिए प्रेरित किया और देश धर्म की रक्षा के लिए एकजुट होने का शंखनाद किया था। इससे युवा पीढ़ी स्वामी विवेकानंद जी को अपना आदर्श मानने लगी। इसी कारण स्वामी विवेकानंद जी का जन्मदिन देश में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द भारत की पहचान हैं। हम उन्हें भुला नहीं सकते।
राज्यपाल श्री दत्तात्रेय ने कहा कि भारत को 21वीं सदी में विश्व गुरु बनने के लिए स्वामी विवेकानंद के दिखाए मार्ग पर चलने की जरूरत है। आज देश आजादी की 75वीं वर्षगांठ को ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के रूप में मना रहा है। इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद जी को याद करना देशवासियों के लिए गौरवान्वित करने वाला पल है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि स्वामी विवेकानंद जी के जीवन परिचय से प्रेरणा लेकर भारत की मजबूती और आत्मनिर्भर भारत के लिए कार्य करें, यही स्वामी जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी

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