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हरियाणा के महामहिम राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने अम्बाला छावनी में निसा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि की शिरकत।

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Nov 27, 2021

हरियाणा के महामहिम राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने अम्बाला छावनी में निसा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि की शिरकत।
-नई शिक्षा नीति में यह प्रावधान किया गया है कि बच्चों को प्राईमरी व उच्च शिक्षा से ही उनकी रूचि अनुसार कौशल शिक्षा दी जाए ताकि ये बच्चे बडे होकर नौकरी ढुंढने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनें:- राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय।  
-स्वास्थ्य और शिक्षा पैसे कमाने के लिए नहीं हैं। ये मानव संसाधन विकास के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जिनसे न तो समझौता किया जा सकता है और न ही व्यापार किया जा सकता है।
अम्बाला, 27 नवम्बर:-
 हरियाणा के महामहिम राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि आज के समय में शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा बच्चों के लिए बेहद जरूरी है। शिक्षा से व्यक्ति में अच्छे संस्कार आते हैं और वह जीवन में नई उंचाईयों को छूता है। राज्यपाल महोदय आज बीपीएस प्लेनेटोरियम अम्बाला छावनी में आयोजित मंथन स्कूल लीडरशिप समिट-2021 में उपस्थित निसा (नेशनल इंडिपेंडट स्कूल अलायंस) से जुड़े स्कूलों के प्रतिनिधियों को तथा शिक्षाविदों को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने दीपशिखा प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। उन्होंने निसा को यह महत्वपूर्ण समिट आयोजित करने पर हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं भी दी। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि यह समिट शिक्षा के सुधार में एक मील का पत्थर साबित होगी । इस अवसर पर उन्होंने निसा द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट का भी विमोचन किया। इस रिपोर्ट में कोविड-19 के संकट काल के दौरान ऑनलाईन शिक्षा, लर्निंग लॉस आदि बच्चों की शिक्षा से सम्बन्धित विषयों पर तैयार की गई है। इससे पूर्व कार्यक्रम में पहुंचने पर निसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने महामहिम राज्यपाल महोदय को फूलों का गुलदस्ता देकर तथा शॉल भेंट कर स्वागत किया और निसा की शिक्षा के क्षेत्र में चल रही विभिन्न गतिविधियों एवं भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
महामहिम राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने शिक्षा के क्षेत्र में निसा द्वारा किए जा रहे कार्यों तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए दी जा रही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सराहना करते हुए कहा कि कोविड-19 के संकटकाल के दौरान सभी वर्ग किसी न किसी रूप में प्रभावित हुए हैं और सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों की शिक्षा का हुआ है। उन्होंने कहा कि उन्हें नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस (निसा) द्वारा आयोजित मंथन-स्कूल लीडरशिप समिट के कार्यक्रम में शामिल होकर बहुत खुशी का अनुभव हुई है।  उन्होंने कहा कि उनके खुश होने का एक बडा कारण यह है कि निसा द्वारा समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की प्रदान करने तथा सामर्थय और गुणवत्ता में सुधार के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है । आज पूरी दूनिया कोविड महामारी से जूझ रही है। हालांकि कोविड -19 प्रेरित महामारी ने हमें शिक्षा में प्रौद्योगिकी के महत्व का एहसास कराया। लेकिन गरीब व दूर-दराज क्षेत्र के बच्चें कोविड महामारी के दौरान शिक्षा ग्रहण करने से वंचित रहें है।
इस महामारी में बच्चों की शिक्षा में विपरित प्रभाव पड़ा है। एक सर्वे में पाया गया है कि 40 प्रतिशत बच्चें ही आनलाईन शिक्षा ग्रहण कर पाए हैं। ऐसे में बच्चों की शिक्षा क्षतिपूर्ति के लिए हमें सिलेबस को दोहराने की आवश्यकता है । इसके लिए टयूटोरियल कक्षाएं शुरू करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात से भी खुशी हो रही है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मूल्य आधारित शिक्षा, कौशल व व्यवसायिक शिक्षा तथा बच्चों के समग्र विकास पर काफी जोर दिया गया है। नई शिक्षा नीति में यह भी प्रावधान किया गया है कि बच्चों को प्राईमरी व उच्च शिक्षा से ही उनकी रूचि अनुसार कौशल शिक्षा दी जाए ताकि ये बच्चे बडे होकर नौकरी ढुंढने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनें।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा पैसे कमाने के लिए नहीं हैं। ये मानव संसाधन विकास के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जिनसे न तो समझौता किया जा सकता है और न ही व्यापार किया जा सकता है। आज कम्पीटीशन का युग है। ऐसे में अंग्रेजी के मंहगे स्कूलों में पढे हुए बच्चे आगे निकल जाते है। और ग्रामीण बच्चे अंग्रेजी न आने से हीन भावना का शिकार हो जाते है। ऐेसे में उन बच्चों की ओर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी के साथ-साथ अपनी मातृभाषा का भी ज्ञान बच्चे दिल से प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि जो शिक्षा दिल से प्राप्त की जाती है उससे अच्छे संस्कार आते हैं और व्यक्ति समाज में एक अच्छा नागरिक बनकर देश के विकास में अपना योगदान देता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के द्वारा ही बेरोजगारी को दूर किया जा सकता है। बेरोजगारी को दूर करने की यदि कोई दवा है तो वह शिक्षा है। शिक्षा से व्यक्ति का जीवन स्तर उंचा उठता है, व्यक्ति में नैतिकता बढती है। उन्होंने यह भी कहा कि पैसे से बेरोजगारी दूर नहीं की जा सकती, मात्र शिक्षा से ही इसे दूर किया जा सकता है।
    70 साल में पहली बार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में तैयार की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा को बढावा दिया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे सभी प्रकार की शिक्षा अपनी मातृभाषा में ग्रहण कर कम्पीटिशन में आगे निकल पाएगें।
  उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा सरकार ने गुणवता की शिक्षा के साथ बच्चों की खेल गतिविधियों पर फोकस किया है। हरियाणा राज्य में ग्यारह सौ से अधिक सरकारी प्ले स्कूल कार्यरत हैं। बच्चों को गुणवत्ता की शिक्षा देने के लिए सरकार द्वारा एक सौ सैंतीस संस्कृति मॉडल स्कूल खोले गये हैं। सुपर-100 कार्यक्रम के तहत गरीब मेधावी छात्रों को जेईई-नीट परीक्षा के लिए नि:शुल्क कोचिंग दी जा रही है। इस साल सुपर-100 के 26 छात्रों को आईआईटी में दाखिले के लिए चुना गया है। यह हम सब के लिए गर्व की बात है।
उन्होंने कहा कि कल ही हमने अपना संविधान दिवस मनाया है और उन्हें उम्मीद है कि निसा ने अपने बच्चों को संविधान की प्रस्तावना पढने के लिए सुनिश्चित किया होगा। सभी स्कूलों में एक पीरियड कक्षा ऐसी होनी चाहिए जिसमें सवैधानिक, मूल्यों, देशभक्ति, समानता, न्याय, बंधुत्व और स्वतंत्रता के बारे छात्रों को शिक्षा दी जाए ताकि हमारे स्कूल आदर्श नागरिक बना सकें ।
हमें बच्चो का पूरी तरह पोषण करना चाहिए ताकि ये बड़े होकर जिम्मेवार और सशक्त नागरिक बने। बच्चों में शुरू से ही मूल्यों, अनुशासन, व्यवहारिक शिष्टाचार और देश के प्रति प्रेम का झुकाव होना चाहिए। हमें बच्चों का नेशन फर्स्ट की भावना के साथ सर्वागींण विकास करना है। प्रत्येक बच्चे को स्काउट्स एनसीसी, एनएसएस, खेल और कई अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें, जिसके लिए हमारे स्कूल परिसर में एक आधारभूत तंत्र की आवश्यकता है।
उन्होंने निसा से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि सभी सदस्य स्कूलों को एनईपी-2020 को लागू करने के लिए तिमाही, अर्धवार्षिक और वार्षिक शेड्यूल तैयार करना चाहिए। विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में, मैंने उन्हें एनईपी-2020 के कार्यान्वयन के लिए त्रैमासिक, अर्धवार्षिक व वार्षिक  कार्यक्रम बनाने के लिए कहा है।
इस मौके पर मंडलायुक्त रेणू एस फूलिया, उपायुक्त विक्रम सिंह, पुलिस अधीक्षक जशनदीप सिंह रंधावा, अतिरिक्त उपायुक्त सचिन गुप्ता, एसडीएम अम्बाला छावनी नीशू सिंघल, निसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ0 कुलभूषण, फाउंडर, सुपर-30 से आनंद,  सीईओ, सिटी मोंटेसरी स्कूल, लखनऊ से प्रो0 गीता, महासचिव, फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन बलदेव सैनी, वाइस चीफ, एफ0पी0एस0डब्ल्यू0 अमित मेहता, मुख्य संरक्षक, एफ0पी0एस0डब्ल्यू0 विजय टिटोली, संरक्षक,, एफ0पी0एस0डब्ल्यू0 तरसेम जिंदल, उपाध्यक्ष, एडवोकेसी, ;निसा मधुसूदन,  प्रखंड अध्यक्ष, एफ0पी0एस0डब्ल्यू0 हरपाल सिंह, प्रखंड अध्यक्ष, नारायणगढ विक्रांत के साथ-साथ एफ0पी0एस0डब्ल्यू0 अधिकारीगण, गणमान्य व्यक्ति व प्रशासनिक अधिकारीगण मौजूद रहे।
बॉक्स:- इस मौके पर महामहिम राज्यपाल ने निसा से आहवान किया कि वे आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में शहीदों एवं स्वतंत्रता सैनानियों की जीवनी से सम्बन्धित कार्यक्रम आयोजित करें जिससे कि हमारे बच्चों एवं युवा पीढ़ी को शहीदों एवं स्वतंत्रता सैनानियों के जीवन से प्रेरणा मिल पाए और उनमें देश सेवा व राष्ट्रभक्ति का और अधिक जज्बा पैदा हो।
बॉक्स:- कार्यक्रम में निसा द्वारा राज्यपाल के हाथों उन स्कूलों के प्रतिनिधियों को भी सम्मानित करवाया गया जिन्होंने कि कोविड-19 के दौरान तथा शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किया है जिनमें दीपक मोंगिया, अश्वनी सरीन, शिवानी सरीन, सुशील धनखड़, विशाल, आशुतोष, अनिरूद्ध गुप्ता, निलिन्द्रजीत कौर संधु, विक्रांत अग्रवाल, किरण बैनर्जी, डा0 कुलदीप आनंद, प्रीतपाल सिंह, विशाल शर्मा, आज्ञापाल, उमा शर्मा, अनिता मेहता, सुनीता दोसाज, बीडी गाबा, कर्ण सिंह बैंस, मनीषा मनोचा, विकास कोहली, रामा प्रसाद, तुलसी प्रसाद, साहिल अग्रवाल, अशोक ठाकुर, अनिल रघुनाथ, अनिल अहलावत, रवि शामिल हैं।
बॉक्स:- महामहिम राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने इस मौके पर बीपीएस प्लेनेटोरियम के प्रांगण में ई-लर्निंग से सम्बन्धित लगाए गये स्टालों का अवलोकन भी किया और स्टाल पर शिक्षा से सम्बन्धित दी जा रही जानकारी के बारे में भी उपस्थित स्टाल संचालकों से बातचीत की।
बॉक्स:- निसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ0 कुलभूषण शर्मा ने बताया कि प्राईवेट स्कूलों को लेकर महामहिम बंडारू दत्तात्रेय का दृष्टिकोण बड़ा सकारात्मक रहा हैं। वर्ष 2017 में जब वो श्रम एवं रोजगार मंत्रालय देख रहे थे, तो ईएसआईसी के 2012 से स्कूलों पर लागू होने के कारण स्कूल भारी आर्थिक संकट में आ गए थे। परन्तु जब  प्राईवेट स्कूलों ने अपनी समस्या से उन्हें अवगत करवाया तो उन्होनें स्कूलों की समस्या को समझ लिया और उन्होनें दिसम्बर 2012 से जून 2017 तक ईएसआईसी अंशदान में स्कूलों को बड़ी राहत दी। प्राईवेट स्कूल उनके इस दयालु दृष्टिकोण के चलते सदा उनके आभारी रहेंगें। 

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