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हरियाणा के गृह सचिव राजीव अरोड़ा ने अंबाला सैंट्रल जेल परिसर में किया जेल रेडियो का शुभारंभ-

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Feb 26, 2021

-डीजीपी जेल के0 सेल्वराज भी रहे मौके पर उपस्थित–जिला प्रशासन की ओर से डीसी और एसपी भी हुए शामिल।
-जेल रेडियो के शुरू होने से बंदियों के जीवन में आयेगा नया बदलाव–इस नई शुरूआत से बंदी ले सकेंगे नई सीख और अन्य को भी दे सकेंगे सार्थक प्रेरणा–जेलों में सुविधाओं और सुधार के लिए नहीं है धन की कोई कमी–जेलों में नये कार्यक्रमों की शुरूआत में एनजीओ की बेहतरीन भूमिका–हरियाणा की सभी जेलों में जेल रेडियो शुरू करने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है विभाग:- एसीएस एवं गृह सचिव राजीव अरोड़ा।
अंबाला, 26 फरवरी:-
 केंद्रीय जेल अंबाला में गृह सचिव राजीव अरोड़ा ने जेल रेडियो का शुभारंभ किया। इस मौके पर डीजीपी जेल के. सेल्वराज भी उपस्थित रहे। एससीएस एवं गृह सचिव राजीव अरोड़ा ने कहा कि सेंट्रल जेल, अंबाला में आज बंदियों के कल्याणार्थ और उनमें सकरात्मक ऊर्जा के संचार के लिए आज जेल रेडियो शुरू किया गया है। अंबाला की सेंट्रल जेल हरियाणा की तीन केंद्रीय जेलों में से एक है जहां पर जेल रेडियो की शुरूआत और यह जेल भारत की एक ऐतिहासिक जेल भी है। जेल रेडियो का उद्देश्य जेल में कला, रचनात्मकता और सद्भाव को बढ़ावा देना है।
एससीएस अरोड़ा ने कहा कि  राज्य के पहले जेल रेडियो का उदघाटन 16 जनवरी, 2021  को पानीपत में हरियाणा के जेल मंत्री चौधरी रंजीत सिंह  के करकमलों द्वारा किया गया था। वीसी के माध्यम से हम भी शामिल हुए थे। इसके बाद जिला जेल फरीदाबाद में जेल रेडियो की शुरूआत की गई और अब अम्बाला सैंट्रल जेल ऐसी तीसरी जेल हैजिसमें जेल रेडियो की शुरूआत हुई है। वैसे तो जेल की अपनी दूनिया है लेकिन रेडियो शुरू होने से बाहरी दूनिया के साथ जेल बंदी जुडे रहेंगे। प्रतिदिन निर्धारित कार्यक्रम और समय सारिणी के तहत रेडियो से विषय सामग्री प्रसारित होती रहेगी। इस विषय मे  21 बंदियों को हरियाणा की विभिन्न जेलों से रेडियो जॉकी के रूप में चुना गया था, जिनमें से 6 अंबाला जेल से हैं। इन सबको तिनका तिनका फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. वर्तिका नंदा ने दिसंबर 2020 में एक रेडियो वर्कशाप के जरिए प्रशिक्षित किया था। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये सामाजिक और नैतिक मूल्यों के साथ-साथ अपनी रूचि अनुसार कार्यक्रम प्रसारित करने में मदद कर सकेंगे। हरियाणा में कुल 19 जेलें हैं और बंदियों की रिफॉर्म प्रक्रिया में मदद के लिए लगभग सभी जेलों में जेल रेडियो शुरू करने की विभाग की योजना है। एसपी जेल अम्बाला लखबीर सिंह जेल में सुधार के क्षेत्र में बेहतरीन और अच्छा कार्य कर रहे हैं।
जेल परिसर के सभागार में आयोजित एक अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में अरोड़ा ने जेल बंदियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जेल परिसर में बुनियादी और पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध करवाना हम सबकी सांझी जिम्मेदारी है। सुधारों के लिए धन की कोई कमी नहीं है, सुधार संबधी विषय को लेकर जो भी सुझाव आयेंगे उन पर सहानूभूतिपूर्व विचार अवश्य किया जायेगा। जेलो में सुधार संबधी विषय को लेकर समय-समय पर एनजीओ बात भी होती रहती है और एनजीओ बंदियों के जीवन में नई प्रेरक किरण लाने के लिए समय-समय पर जेलों का दौरा करके उनको जीवन जीने की नई दिशा देते रहते हैं यह एक बहुत बडी बात है। उन्होंने यह भी कहा कि जेलों में और अधिक सुधार कैसे किए जायें, इस विषय को लेकर आज विभिन्न एनजीओ के संस्थापकों और पदाधिकारियों से संवाद भी हुआ है ताकि और बेहतर प्रयास सार्थक रूप से कार्यरूप में परिणित हो सकें। सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बंदियों द्वारा दिये गये सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना भी की। राजीव अरोड़ा ने इस अवसर पर यह भी कहा कि यह जेल रेडियो निश्चित रूप से बंदियों के प्रति बाहरी लोगों की धारणा को बदलने वाला है और इस प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें सुधारने में भी मदद करेगा।
इस मौके पर डीजीपी जेल के. सेल्वराज ने अपनी अभिव्यक्ति और सम्बोधन में कहा कि आज जेल रेडियो का शुभारम्भ हो गया है। इससे बंदी बाहर के कार्यक्रमों से जुड़ सकेंगे। जेल रेडियो के कारण बंदियों के जीवन में बदलाव आसानी से देखा जा सकेगा। अंबाला जेल में रेडियो की शुरुआत के साथ ही हरियाणा की जेलो में जेल रेडियो को स्थापित करने के पहले चरण को पूर्ण कर लिया गया है और अब  द्वितीय चरण के तहत राज्य की चार अन्य जेलों में भी जेल रेडियो की शुरुआत करेंगे। सेल्वराज ने जेलों में बंदियों द्वारा  की गई प्रगति पर अपनी  संतुष्टि व्यक्त की है। जेल के अधीक्षक श्री लखबीर सिंह ने कहा, जेल रेडियो के प्रारंभिक चरणों को निष्पादित करने के लिए बंदियों के दैनिक दिनचर्या में उत्साह को  देखकर बेहद खुश हैं। इससे  जेल में बंदियो के अंदर पैदा हुई निराशा, कुंठा को सकरात्मक सोच, बंदियो जीवन में आशा की उम्मीद की एक किरण और रचनात्मकता प्रदान की है। जेल का कमरा खुशियों और रचनात्मकता का स्थान बन गया और यह आगे भी बना रहेगा। बंदी आये दिन जेल रेडियो से नई सीख लेकर अन्य को भी प्रेरित कर सकेंगे।
कैदियों को प्रशिक्षण देने वालीं तिनका तिनका की संस्थापक वर्तिका नंदा ने कहा, मैंने 2019 में जिला जेल, आगरा में पहला जेल रेडियो लॉन्च किया था और रेडियो के कारण बंदियो की जीवन में आए बदलाव को देखा था। हरियाणा की जेलों के अब तक 21 बंदियों ने रेडियो जॉकी होने की पहचान अर्जित की है। और हम आशान्वित हैं कि यह कौशल समाज में उनके सुधार और सुदृढीकरण में मदद करेगा। मैं पहले से ही राज्य में जेल रेडियो के अगले चरण के लिए मॉड्यूल को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हूं।
इस कार्यकम से बंदियों को समाज में अच्छे नागरिक के तौर पर पुनर्स्थापित होने में सहयोग मिलेगा जोकि जेल रिफॉर्म्स का एक आवश्यक अंग है। इस अवसर पर इंडिया विजन फाउंडेशन की डायरेक्टर श्रीमति मोनिका धवन, श्री रवि दुबे, चैरिटी ऑन व्हील्स संस्था से विंकी सिंह व उनकी साथी सदस्य श्रीमती कविता व डॉक्टर विनीत भार्गव, डायरेक्टर, मेंटल हेल्थ प्रोजेक्ट विशेष रूप से उपस्थित रहे। सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सामाजिक विषयों पर अपनी प्रस्तुति देने वाले बंदियों, ऋषिपाल, किशन पाल, देवेन्द्र, सतीश को मुख्य अतिथि ने प्रशंसा पत्र देकर प्रोत्साहित किया। इस मौके पर जेल प्रशासन की ओर से मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मानित किया गया। एसीएस राजीव अरोड़ा ने भी डीजीपी जेल को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। मुख्य अतिथि ने तिनका तिनका की संस्थापक वर्तिका नंदा द्वारा लिखी दो पुस्तकों का विमोचन भी किया। बंदियों द्वारा मुख्य अतिथि सहित सभी का फूलमालाओं से स्वागत किया गया।
इससे पहले एसीएस एवं गृह सचिव राजीव अरोड़ा और के.सेल्वराज ने एसपी जेल लखबीर सिंह कार्यालय में सभी एनजीओ के साथ एक बैठक की तथा जेल सुधार संबधी विषयों को लेकर उनसे संवाद किया तथा उनके सुझाव भी जानें। इस मौके पर डीसी अशोक कुमार शर्मा, एसएसपी हमीद अख्तर, एसपी जेल भी उपस्थित थे।
बॉक्स:- सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान कईं बार ऐसे लम्हे आये जिसमें पश्चाताप के साथ-साथ घर की यादें भी समाई हुई थी। बंदियों ने परिस्थितियों के दौरान जहां घर की यादों का खुलासा किया वहीं सुधार के विषयों को भी कंठवद्घता दी। शुरूआत सरस्तवी वंदना और सुर सरगम से की गई। भजन हे राम भी इस मौके पर प्रस्तुत किया गया। परिवार की याद में चि_ïी की महिमा भी दर्शाई गई। चि_िïए नी चि_िïए जेल विच लिखिए, दसिये परिवार नू दसिये सौणे यार नू।
बॉक्स:- बंदियों द्वारा मां की याद में दी गई प्रस्तुति में उपस्थित श्रोताओं की आंखे नम कर दी। मां तो मां होंदी है दूनिया वालयो, बच्चों दा ना दुख सहंदी, गिली थां ते खुद पैंदी। इस प्रस्तुति ने खूब तालियां बटौरी। बंदियों ने आज के दिन को प्रेरक दिन बताया और जेल में जेल रेडियो शुरू करने के लिए जेल प्रशासन का आभार भी व्यक्त किया।

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