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सूचना आयोग के आदेश बावजूद आरटीआई के साथ मांगी जा रही आईडी – हेमंत

Byadmin

Aug 18, 2021

 
प्रशासनिक सुधार विभाग की अंडर सैक्रेटरी ने  एडवोकेट का आवेदन  लौटाया

चंडीगढ़ –  हरियाणा सूचना  आयोग के तत्कालीन  सूचना आयुक्त के.जे. सिंह द्वारा हाल ही में एक केस  के फैसले में स्पष्ट किया गया  कि कोई भी पब्लिक अथॉरिटी (लोक प्राधिकारी )  द्वारा   आरटीआई आवेदनकर्ता  से  ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि वह  संबंधित आरटीआई नियमोें में डाले  गए निर्धारित प्रोफोर्मा में ही याचिका /आवेदन दायर करे.  इसी तरह आवेदनकर्ता से  सूचना मांगने का कारण स्पष्ट करने को भी नहीं कहा जा सकता है और  उससे उतना ही ब्यौरा मांगा जा सकता है जितना उसकी आरटीआई की सूचना/जवाब देने के लिए पर्याप्त हो अर्थात आवेदनकर्ता  को  आवेदन के साथ उसकी आईडी ( पहचान पत्र ) संलंग्न करने को नहीं  कहा जा सकता है परन्तु इसके बावजूद प्रदेश में  आरटीआई आवेदन के साथ आवेदनकर्ता की आईडी मांगी जा रही है.
गत सप्ताह 10 अगस्त को जब हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने हरियाणा के मुख्य सचिव कार्यालय के आरटीआई सैल में एक  याचिका निर्धारित फीस के साथ दायर की, तो उन्हें वह बिना जवाब के ही ज्यों की त्यों  वापिस भेज दी गई. उसके साथ  हालांकि 12 अगस्त का जारी एक पत्र संलग्न है  जिस पर  प्रशासनिक सुधार विभाग की अंडर सैक्रेटरी संतोष, जो विभाग की राज्य जन सूचना अधिकारी (एसपीआईओ) भी हैं, के हस्ताक्षर  हैं एवं  उसमें उल्लेख है  कि चूंकि विभाग द्वारा 6 मई 2021 को जारी एक पत्र अनुसार  आरटीआई आवेदन के साथ पहचान पत्र की प्रति संलग्न करना अनिवार्य है इसलिए  उनका आवेदन उन्हें वापिस भेजा जा रहा है एवं पहचान पत्र की प्रति के साथ उक्त आवेदन को दोबारा भेजा जाए.

हेमंत ने बताया कि जहाँ तक आरटीआई कानून, 2005 का विषय है, तो इसकी धारा 6 (2 ) में यह स्पष्ट उल्लेख है कि सूचना के लिए अनुरोध करने वाले आवेदक से सूचना का अनुरोध करने के लिए किसी कारण को या किसी अन्य व्यक्तिगत ब्यौरे को , सिवाए उसके जो उससे संपर्क करने के लिए आवश्यक हो, देने की मांग नहीं की जायेगी. 

हालांकि हेमंत ने बताया कि नवंबर, 2012 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के तत्कालीन जज राजेश बिंदल द्वारा दिए एक आदेश के अनुसार जन सूचना अधिकारी के समक्ष दायर शिकायतों, प्रथम अपीलीय अथॉरिटी के समक्ष दायर अपील और सूचना आयोग में जारी कार्यवाही में आवेदनकर्ता को अपना पहचान पत्र (आईडी) दायर करना आवश्यक किया गया था. अब चूँकि सूचना प्राप्त करने के लिए राज्य जन सूचना अधिकारी (एसपीआईओ ) के समक्ष केवल आरटीआई आवेदन ही दायर किया जाता है जबकि शिकायत केवल धारा 18 में राज्य /केंद्रीय सूचना आयोग में ही दायर की जा सकती है, अत:  हाई कोर्ट के उपरोक्त निर्णय की अनुपालना में एसपीआईओ के समक्ष आवेदन के साथ पहचान पत्र संलग्न करने की कोई आवश्यकता नहीं हो सकती है.
 हेमंत ने बताया कि वैसे भी पंजाब एवं हरियाणा  हाई कोर्ट के सिंगल जज के उपरोक्त आदेश के  एक वर्ष बाद नवबर, 2013 में कलकत्ता हाईकोर्ट के डिवीजन (दो जज) बैंच  का भी एक फैसला आया जिसमें  हालांकि  स्पष्ट किया गया कि  आरटीआई  के साथ आवेदनकर्ता की संपूर्ण और  निजी जानकारी मांगने और संलग्न करने   की कानूनन कोई आवश्यकता नहीं  है.
 केन्द्र सरकार ने  जनवरी, 2014 में कलकत्ता हाईकोर्ट के उपरोक्त फैसले की कापी सभी राज्य सरकारों के संज्ञान में लाने  और उचित कार्यवाही हेतु  भेजी भी  थी. 
अब इसके बावजूद हरियाणा सरकार ने आरटीआई आवेदन के साथ आईडी संलग्न करना, हालांकि राज्य के आरटीआई नियमोें, 2009 में उल्लेख न कर केवल आरटीआई याचिका के प्रोफोर्मा में डालकर, क्यों अनिवार्य किया गया, यह  निश्चित तौर पर जांच करने योग्य है.

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