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सरकार किसानों को मुकदमों का डर दिखाकर दबाने के साथ कर रही बातचीत का ड्रामा : निर्मल सिंह

Byadmin

Sep 18, 2020

अम्बाला छावनी : हरियाणा डैमोक्रेटिक फ्रंट के संस्थापक पूर्व मंत्री निर्मल सिंह ने कहा कि आंदोलन कर रहे किसानों का मुद्दा केवल एमएसपी का नहीं है मंडीकरण का भी है। उन्होंने कहा कि जिन राज्यो में मंडीकरण हुआ है वहां पर एमएसपी और किसान विकसित नहीं हुए। इन लोगों को बहुत असुविधा हुई है। जहाँ एमएसपी पर तो केन्द्र सरकार ताक झांक कर रही है। वही जबरन इस अध्यादेश को पूरे देश में लागू कर रही है। जहां पर मंडीकरण अच्छे से विकसित हुआ है। मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश में फेल हुआ है क्योंकि यहां पर मंडीकरण नहीं हुआ।

केंद्र के 3 अध्यादेश के तहत मंडियों के अंदर जो काम होगा वहां टैक्स लगेगा और बाहर जो काम होगा वहां टैक्स नहीं लगेगा। यह दबे पैर मंडीकरण का धीमा धीमा जहर है जो धीरे-धीरे फैल रहा है। 1 साल 2 साल चलते चलते यह प्रथा धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। जब तक मंडिया होगी तब तक प्राइवेट लोग आप की कीमत देंगे। एक बार मंडिया बीच में से हट गई तो वही हाल होगा जो मध्य प्रदेश में हो रहा है। किसान आज वहा पर आत्महत्या करने पर मजबूर है और निजी कंपनियों के हाथ नीलाम होने को मजबूर हो जाएगा। सरकार जब तक नया अध्यादेश नहीं लाती तब तक सब बातें कच्ची है।

सरकार को तुरंत पुराना अध्यादेश वापिस लेकर किसानों से बातचीत करके नया अध्यादेश किसानों के हित का लाना चाहिए जिसमे किसानों की मांगों को रखा जाए। निर्मल सिंह ने बीजेपी द्वारा आंदोलनरत किसानों से बातचीत के लिए बनाई गई 3 सांसदों वाली कमेटी पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि 3 अध्यादेश पर चर्चा के लिए बनाई गई कमेटी का मकसद सिर्फ किसानों को गुमराह करना है। इस कमेटी के पास ना कोई संवैधानिक शक्ति है और ना ही कोई राजनीतिक इच्छा शक्ति। अगर इसके पास कोई शक्ति है तो उसे सबसे पहले किसानों पर लाठी चलाने और चलवाने वालों पर कार्रवाई करनी चाहिए। कमेटी को फौरन किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने चाहिए। एक तरफ सरकार किसानों को मुक़दमों का डर दिखाकर दबाने में लगी है तो वहीं दूसरी तरफ बातचीत का ड्रामा कर रही है।

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