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सरकारी डंडे के दम पर कुचलने की कोशिश निहायत ही निंदनीय-निर्मल सिंह

Byadmin

Sep 3, 2021

शहीद किसान के परिवार के साथ दुख सांझा किया:-

हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट के संयोजक व पूर्व मंत्री निर्मल सिंह आज बसताड़ा टोल पर लाठी चार्ज के दौरान शहीद हुए किसान सुशील काजल के निवास पर पहुँचे।उन्होंने वहाँ शहीद किसान के परिवार को ढांढस भी बंधाया।उन्होंने हरियाणा सरकार पर आरोप लगाया है कि करनाल में हुए लाठीजार्ज में सुशील काजल की मौत हुई है। हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट के नेता ने हरियाणा सरकार से सुशील काजल शहीद किसान के परिजनों को 50 लाख रुपए सहायता राशि देने की भी मांग की है।वहीं परिवारिक सदस्य को एक सरकारी नौकरी भी दी जाए।निर्मल सिंह ने खट्टर सरकार की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि किसान बीजेपी के कार्यक्रम से लगभग 15 किलोमीटर दूर अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। बावजूद इसके पुलिस ने वहां जाकर उनपर लाठियां बरसाई। यह कार्रवाई सरकार के मंसूबों को जगजाहिर करती है। और ऐसा लग रहा है कि इस लाठीचार्ज की प्लानिंग सरकार द्वारा पहले से ही कि गयी थी ।ऐसा लगता है कि सरकार पहले ही किसानों को लहुलुहान करने का मन बना चुकी थी। इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सरकार में बैठे किस व्यक्ति ने अधिकारियों को लाठीचार्ज का आदेश दिया इसकी भी जांच होनी चाहियें और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
निर्मल सिंह ने कहा कि अन्नदाता का खून बहाना बीजेपी सरकार की आदत बन चुकी है। पहले सरकार जानबूझकर टकराव के हालात पैदा करती है और फिर अलोकतांत्रिक, अमानवीय,तानाशाही और क्रूर तरीके से किसानों पर कभी वॉटर कैनल, कभी आंसू गैस तो कभी लाठी-डंडों से हमला कर देती है। यह पहला मौका नहीं है जब सरकारी लाठियों से किसान लहुलुहान हुए हों। इससे पहले भी पीपली, कुंडली, पलवल, हिसार, रोहतक, पंचकूला और सिरसा समेत पूरे हरियाणा में सरकार ने अन्नदाता का खून बहाया है।
निर्मल सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में लाठी-डंडों के दम पर नहीं, सरकारें लोगों का दिल जीतकर चलाई जाती हैं। सरकार को जनता के साथ टकराव नहीं,संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए था। अगर भाजपा सरकार किसानों का कुछ भला करना और आंदोलन को खत्म करवाना चाहती है तो उसे केंद्र सरकार से बात करनी चाहिए। ताकि आंदोलनकारियों और किसानों के साथ फिर से बातचीत शुरू हो। सरकार को किसानों की मांगें मानते हुए आंदोलन का सकारात्मक समाधान निकालना चाहिए। लोकतांत्रिक आंदोलन को सरकारी डंडे के दम पर कुचलने की कोशिश निहायत ही निंदनीय है।

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