• Sat. Aug 20th, 2022

विश्व पर्यावरण दिवस पर हरियाणा ग्रंथ अकादमी के तत्वावधान में विचार गोष्ठी आयोजित

Byadmin

Jun 6, 2022


अंबाला, 6 जून:-
हमारे पूर्वज वैदिक काल से ही पर्यावरण संरक्षण को लेकर सचेत और संजीदा थे। यजुर्वेद में पृथ्वी के साथ मनुष्य का नाता माता और पुत्र का माना गया है। हमारे देवी देवताओं के साथ वृक्षों का और तीर्थस्थलों के साथ सरोवरों का अटूट संबंध प्रकृति के साथ मानव अस्तित्व की गहरी भारतीय समझ का प्रमाण है। आज भी यदि हमें अपने पर्यावरण को अपने वर्तमान और भविष्य के लिए बचाना है तो अपने पूर्वजों के ज्ञान और अनुभव की नींव पर ही भविष्य की यह इमारत खड़ी हो सकती है। आज़ादी के अमृत वर्ष में आइए जड़ों से जुड़ें ताकि भविष्य हरा-भरा और सुनहरा हो। केंद्र सरकार की सभी नीतियां और कार्यक्रम पर्यावरण को बेहतर बनाने पर ही केंद्रित हैं। यह बात हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने स्थानीय डीएवी कॉलेज में एक विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए कही।

डॉ. चौहान ने विद्यार्थियों को माता भूमि: पुत्रऽहं पृथिव्या: विषय पर जागरूक करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और वाहन के प्रयोग को संयमित व नियंत्रित करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन से लेकर अम्रुत मिशन के तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण तक का लक्ष्य पर्यावरण को बेहतर बनाना है। हरियाणा ग्रंथ अकादमी व डीएवी कॉलेज,अंबाला शहर के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय में आयोजित इस विचार गोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान, उपाध्यक्ष व निदेशक हरियाणा ग्रंथ अकादमी थे। कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर सलिल दोसाज, डॉ. आर.एस.परमार (विभागाध्यक्ष, भूगोल विभाग) और डॉ. नरेंद्र कुमार ने मुख्य अतिथि का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।

कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर सलिल दोसांझ ने कहा कि भूसंपदा, प्रकृति और पर्यावरण का उपयोग से प्रारंभ हुआ सिलसिला अब इसके दोहन तक पहुंच चुका है। प्रकृति मां की तरह हमारे लालन-पालन के लिए संसाधन उपलब्ध कराती है। हमें भी पुत्र के समान उसकी देखभाल करनी होगी। ऐसा न किया तो अगली पीढ़ी को गंभीर समस्याओं का सामना करना होगा। उन्होंने कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों का धन्यवाद करते हुए छात्रों से आह्वान करते हुए कहा कि हमें ऐसी जीवन शैली अपनानी चाहिए जिससे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

कॉलेज के भूगोल विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर आर.एस. परमार ने कहा कि नियमित दिनचर्या में अनेक प्रकार के छोटे-छोटे बदलाव कर हम पृथ्वी और प्रकृति के निरंतर बिगड़ते स्वरूप को अपने व्यवहार से ठीक कर सकते हैं। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों शिक्षकों व अन्य गणमान्य लोगों से प्लास्टिक से बनी चीजों का कम से कम प्रयोग करने का आह्वान किया और कपड़े के थैलों का प्रयोग कर खरीददारी को पॉलीथीन मुक्त बनाने की प्रतिज्ञा ली। तत्पश्चात भौगोलिक एसोसिएशन द्वारा पर्यावरण विषय पर आयोजित मॉडल और चार्ट प्रतियोगिता में विजेता रहे प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में प्रो. नीलम बत्रा, डॉ. मंजू मल्होत्रा, प्रोफेसर शांत कौशिक, डॉ. सुभाष शर्मा, डॉ. सुखदेव सिंह, डॉ. पूनम तलवार, प्रोफेसर किरण पूनिया और डॉ. गरिमा सुमरान मौजूद रहे। इस दौरान विद्यार्थियों को वातावरण बदलाव पर जागरूक करने के लिए एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई और पौधारोपण कार्यक्रम भी किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published.