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मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को ही अपना आरक्षित चुनाव चिन्ह लेने का अधिकार – हेमंत

Byadmin

Dec 7, 2020

क्या एचडीएफ उम्मीदवारों को  आबंटित हो सकता है कप-प्लेट का चुनाव चिन्ह  ?  

अम्बाला शहर (हेमंत कुमार ) – अम्बाला सहित पंचकूला और सोनीपत तीन नगर निगमों के आम चुनावों के लिए आगामी  27 दिसंबर को होने वाले मतदान के दृष्टिगत   बीते सप्ताह   हरियाणा निर्वाचन आयोग द्वारा जारी एक संशोधित नोटिफिकेशन में, जो  उक्त  चुनावो  में उम्मीदवारों को  आबंटित किये जाने वाले चुनाव-चिन्हों से सम्बंधित है, उसमें मेयर पद  और  पार्षद  दोनों के निर्वाचन हेतू निर्दलयी प्रत्याशियों  के लिए  48 -48 अलग अलग फ्री सिम्बल्स (चुनाव चिन्हों) की सूची  है. इस नोटिफिकेशन में  मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के नाम और उनके लिए आरक्षित चुनाव चिन्ह का उल्लेख भी  है.

इसी बीच शहर निवासी हाई कोर्ट के एडवोकेट एवं कानूनी विश्लेषक हेमंत कुमार ने बताया कि मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों  जैसे भाजपा, कांग्रेस, बसपा, एनसीपी, टीएमसी, सीपीआई और सीपीएम और हरियाणा प्रदेश के दो मान्यता प्राप्त दो  क्षेत्रीय राजनीतिक दलों इनेलो और जजपा, इन सभी पार्टियों के प्रत्याशी तो मेयर और पार्षद दोनों के  चुनाव अपनी अपनी पार्टी के लिए आरक्षित चुनाव चिन्हो पर लड़ सकते हैं. इसी प्रकार दूसरे राज्यों के मान्यता प्राप्त  क्षेत्रीय  दल  जैसे अकाली दल, आम आदमी  पार्टी आदि भी अपने आरक्षित चुनाव चिन्ह पर उक्त दोनों का चुनाव लड़ सकते है. यही नहीं अगर मेयर और किसी वार्ड/सभी वार्डों में उक्त पार्टियां चुनाव नहीं भी लड़ती है, तो भी उनका आरक्षित  चुनाव चिन्ह किसी अन्य को आबंटित नहीं किये जा सकता.

हालाकिं  जहाँ तक  निर्मल सिंह की  हरियाणा  डेमोक्रेटिक फ्रंट (एचडीएफ ) का विषय है, हेमंत ने बताया कि बीते माह  5 नवंबर 2020 से एचडीएफ को  भारतीय चुनाव आयोग द्वारा लोक प्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 29 ए में  राजनीतिक पार्टी  के रूप में रजिस्टर  किया गया है. आज तक  एचडीएफ के  नाम, चुनाव चिन्ह   और झंडे पर कोई चुनाव  नहीं लड़ा गया  है एवं आगामी नगर निगम चुनाव  एचडीएफ के पहले चुनाव होंगे.  गत वर्ष अक्टूबर, 2019 में निर्मल सिंह ने अम्बाला शहर और उनकी पुत्री चित्रा  सरवारा ने अम्बाला कैंट विधानसभा हलके से आज़ाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था और दोनों अपने-अपने हलके में 36 % से ऊपर वोट लेकर  दूसरे नंबर पर रहे. दोनों को अपने अपने हलके में कप-प्लेट का ही चुनाव चिन्ह आबंटित किया गया था परन्तु उन दोनों का दर्जा निर्दलयी उम्मीदवार का ही था. इस प्रकार कप-प्लेट चुनाव चिन्ह पर एचडीएफ का कोई अधिकार नहीं बनता. इसके अतिरिक्त  चूँकि न तो मेयर पद के लिए और न पार्षद के लिए राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किये गए 48 -48  फ्री सिम्बल्स की सूची में कप-प्लेट का चुनाव चिन्ह ही नहीं है, इसलिए यह देखने लायक है कि उक्त नोटिफिकेशन में संशोधन किये बिना क्या एचडीएफ के उम्मीदवारों को नगर निगम मेयर पद और पार्षद दोनों के चुनावों में   कप-प्लेट का चुनाव चिन्ह किस प्रकार  आबंटित किया जाता है ?

जहाँ तक  2014 में विनोद शर्मा द्वारा बनायीं गयी हरियाणा जनचेतना पार्टी (वी )- हजपा का प्रश्न है, हेमंत ने बताया कि  इसके लिए भी  कोई भी चुनाव चिन्ह आरक्षित नहीं है.  छः वर्ष पूर्व अक्टूबर, 2014 में हरियाणा विधानसभा चुनावों में प्रदेश की 90 में से 23 सीटों पर हजपा ने चुनाव लड़ा जिसमे से 22 पर इसके उम्मीदवारों की  ज़मानत जब्त हो गयी थी. केवल अम्बाला शहर हलके से स्वयं विनोद शर्मा दूसरे नंबर पर रहे थे एवं अपनी ज़मानत राशि बचा सके थे. उन चुनावो में हजपा को  हालांकि चुनाव आयोग द्वारा उसके द्वारा लड़ी सभी 23 सीटों पर  गैस सिलेंडर का चुनाव चिन्ह आबंटित किया गया था परन्तु चूँकि हजपा को उन चुनावो में पूरे राज्य में मात्र 0 .64 % वोट ही मिले सके थे और हजपा एक भी सीट नहीं मिल पायी थी जिस कारण उसे मान्यता नहीं मिल पायी थी, इसलिए हजपा का  भ्ही गैस सिलेंडर चुनाव चिन्ह पर कोई अधिकार नहीं है. वैसे भी चूँकि इस बार गैस सिलेंडर का चुनाव चिन्ह हरियाणा निर्वाचन आयोग द्वारा केवल पार्षद के चुनाव के लिए आज़ाद उम्मीदवारों की सूची में डाला गया है इसलिए हजपा पार्टी अगर सभी 20  वार्डो में अपने प्रयाशी उतारती है, तब तो वह रिटर्निंग अफसर को उन सभी को गैस सिलेंडर का चुनाव चिन्ह आबंटित करने की प्रार्थना  कर सकती है हालांकि चूँकि मेयर पद के चुनाव चिन्हो की सूची में गैस सिलेंडर का चुनाव चिन्ह ही नहीं है, इस प्रकार 1 दिसंबर की उपरोक्त नोटिफिकेशन अनुसार हजपा के मेयर पद के प्रयाशी को गैस सिलेंडर का चुनाव चिन्ह आबंटित नहीं हो सकता.  

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