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महिला काव्य मंच, में कवयित्रियों ने विभिन्न विषयों पर प्रस्तुत की अपनी रचनाएं।

Byadmin

Nov 2, 2020

महिला काव्य मंच, अम्बाला इकाई की मासिक गोष्ठी में कवयित्रियों ने विभिन्न विषयों पर प्रस्तुत की अपनी रचनाएं। गत कई महीनों से कोरोना संकट के चलते महिला काव्य मंच की मासिक गोष्ठी का आयोजन ऑनलाइन ही होता रहा, लेकिन इस बार सभी नियमों का पालन करते हुए इस माह की गोष्ठी ऑनलाइन ना रखकर अम्बाला शहर के सेक्टर -1 में दिनांक 31 अक्टूबर को आयोजित की गई।

हरियाणा की महासचिव अंजलि सिफ़र की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई इस गोष्ठी में अम्बाला। शहर और छावनी से कवयित्रियों द्वारा रचनाएं प्रस्तुत की गईंहूँ औरत सब्र यूं मुझमें बहुत है, मगर कुछ टीस भी गम में बहुत है-

ममता शर्मा राम तेरे इस जगत मे मन बेगाना हो गया।जब भी चाहा मन ने मेरे तेरे चरणों में लगूं, इस जगत के ताने बाने मे उलझ के रह गया-

डॉ रेखा शर्मा2 वर्षों की कड़ी साधना मां शारदा की निरंतर आराधना। आज रंग लाई है,

इसीलिए आप सबको बधाई है -गौरी वंदना”यूं ही नहीं मिल जाता कोई,जरूर पिछले जन्म का बंधन होगा” -एकता डांगगुरू आदि है,अनादि है,युगादि है युग-युग से गुरू ज्ञान का भण्डार है  –

मनजीत तुर्का ज़रूर तेरे दिल में कोई न कोई मलाल आया है यूँ ही तो नहीं सिक्का पानी में उछाल आया है – दीया शर्मादोस्ती प्यार रिश्ते खतम हो रहेआदमी आदमी से ही अनजान है-

मनीषा नारायण”सारी नादानियाँ खो गयीं, मैं बड़ी क्यों हुईगोदियाँ ,लोरियाँ खो गयीं, मैं बड़ी क्यों हुई” – अंजलि सिफ़र”अब न आये किसी पर मुसीबत कभी ऐसे वरदान की हम को दरकार है

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