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महिला काव्य मंच की अम्बाला इकाई की मासिक गोष्ठी ऑनलाइन सम्पन्न हुई।

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Nov 29, 2020

महिला काव्य मंच की अम्बाला इकाई की मासिक गोष्ठी दिनांक 28 नवम्बर को ऑनलाइन सम्पन्न हुई। अध्यक्षता एवं संचालन महासचिव अंजलि सिफ़र का रहा । इसमें अम्बाला शहर और छावनी की कवयित्रियों ने भाग लिया। 
दिव्या भसीन कोचर ने कहा,’लोग रोते न मुस्कुराते हैं मुर्दा जिस्मों में जान रक्खी है।रंग अब आसमा के बदलेंगे होंसले भर उड़ान रक्खी है’
नीरजा रजनीश जयसवाल ने कहा,’जान कर भी क्यों बन रहा अनजान भीड़ में छिपे कोरोना को पहचान पालन कर नियमों का  रह सावधान  ए समझदार इन्सान  न बन नादान’
डॉ रेखा शर्मा ने कहा,’ब्रांड ब्रांड को जपने वालों ब्रांड पे क्यों इतराते होदो पैसे की चीज कोई आखिर सौ में तुम ले आते हो’
अरुणा अनेजा मधुर ने कहा,’वो भी पढ़ा लिखा,मैं भी पढ़ी लिखी। ज़माना हम दोनों को समान लिखता। मैं सपने लिखती ,वो उड़ान लिखता।साथ मे खुला आसमान लिखता।
निधि जैन की पंक्तियाँ यूँ थी,’नासमझ थे हम तो बहुत अच्छे थे,कम स कम अपने आप से तो सच्चे थेअब तो आईना भी देख हमें हँसता है, देख अपने आप को ये ताने कसता है’
किरण जैन जी के शब्द थे,’सर पर मेरे धूप कड़ीमाँ रहती सजदे में खड़ी ।कभी वक्त भी फेरेगा।अपनी वो जादू की छड़ी ‘
मनजीत तुर्का जी ने कहा,’क़ानूनों मे उलझ कर रह गए किसान भोले-भाले खुद भुखे सो जाते हैं क्षुधा हमारी मिटाने वाले आसमां के निचे जो बिछा देता है हरियाली का बिछोनाउसे चैन से क्यों नहीं पल भर भी सोना
सवीना वर्मा सवी जी ने कहा,’आज महफ़ूज़ नहीं बेटी की असमत क्यूँ कर इसकी तक़लीफ का एहसास ख़ुदारा होता राज़ की बात को अब और छुपाये कैसे सामना ही न सवी तुमसे दुबारा होता’
संगीता भसीन ने कहा,’आप का इंतजार हम बार बार करेंगे ऐ जा़ने वफा आप जो आए,हम पुष्प वर्षा करेंगे
अंजलि सिफ़र के शब्द थे,’हाल ए दिल अपना छुपाने में उलझ जाती हूँजो नहीं हूँ वो जताने में उलझ जाती हूँ’

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