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भाजपा सरकार के लिए किसानों का खून- खून नही पानी है : चित्रा सरवारा

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Sep 12, 2020

 
किसानों की एमएलआर नहीं हुई पर उन पर एफआईआर जरूर करवा दी इस हिटलरशाही सरकार ने : चित्रा सरवारा 
लाठीचार्ज करके मुकरी भाजपा सरकार ने किसानों के मुद्दों और संघर्ष का उड़ाया है दुखद मज़ाक़
अम्बाला छावनी : हरियाणा डैमोक्रेटिक फ्रंट की नेत्री चित्रा सरवारा ने प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज के इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है कि 11 सितंबर को पिपली में आयोजित किसान आंदाेलन में पुलिस ने लाठी हुआ ही नहीं । चित्रा सरवारा ने कहा कि तमाम अखबारों और न्यूज चैनलों के साथ सोशल मीडिया पर जिस बहते खून और हिंसा को देश प्रदेश में सभी ने प्रत्यक्ष देखा है उसे कैसे झुठला सकती है सरकार?चित्रा सरवारा ने कहा कि गृह मंत्री अनिल विज के इस बयान के विपरित भाजपा और सहयोगी दल के नेता ही कह रहे हैं ये लाठीचार्ज नहीं होना चाहिए था और किसानों पर किए गए लाठीचार्ज की जांच होनी चाहिए। मुख्यमंत्री और गृह मंत्री पुलिस की इस कार्यवाही से अपने हाथ कैसे धो सकते हैं? क्या पुलिस उनके काबु में नहीं या अपना काम नहीं जानती
प्रदेशाध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ कह रहे हैं कि किसानों को प्रदर्शन करने की क्या जरूरत थी, सरकार से बैठकर बात करनी चाहिए थी। चित्रा सरवारा ने कहा कि 11 सितंबर के विशाल प्रदर्शन से पूर्व कई दिनों से किसान सरकार को पूर्व सूचना दे रहे थे कि यदि लाए गए अध्यादेश वापिस नहीं लिए गए तो किसान आंदोलन करेंगे। किसान कब से सड़कों पर उतरे हुए हैं, सरकार ने उन्हें एक सशक्त मंच पर बुला मध्य का रास्ता क्यों नहीं निकला?
भाजपा सदा से ही किसान विरोधी है – उन्होंने कहा कि 2014 के चुनाव से पूर्व भाजपा ने अपने पक्ष में मतदान करवाने के लिए किसानों को स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने का वायदा किया था जो कि 7 साल बाद भी पूरा नहीं किया गया है। किसानों के आमदनी दोगुना करने की बाते भी हवाहवाई हो गई। एमएसपी बढ़ने की जगह घट रही है। बीमा योजना के नाम पर प्राइवेट कंपनियों को बीच में लाकर किसानों के साथ अब तक का सबसे बड़ा घोटाला किया गया। भाजपा ने मिनीमम गर्वमेंट और मैक्सीमम गर्वनेंस का नारा देकर हर क्षेत्र में निजीकरण कर दिया। कोरोना की आड़ में भाजपा ने तीन अध्यादेश लागू करने की कोशिश की है जो हर तरह से किसान विरोधी है, उनके हितों का हनन करते है, उनके अधिकारों का हनन करते है, उनके भविष्य को खत्म करते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार अब कहती है कि खेतीबाड़ी लाभ का धंधा नहीं है जबकि आज देश के 60 फीसदी लोग खेतीबाड़ी के माध्यम से अपना घर चलाते हैं I देश की अर्थव्यवस्था में भले ही आज खेती का योगदान 115-17% हो लेकिन हमारी थाली में, हमारे बच्चों का पेट भरने में किसानों को योगदान 100 %  है I 
कोरोना काल में जब सभी प्रकार के उत्पादन बंद हैं तो भी किसान अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों के लिए अन्न,सब्जियां और दूध आदि का उत्पादन कर रहा है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों की भाति भाजपा भी फूट डालो और राज करो की नीति पर चलकर समाज के वर्गाें को अलग अलग बांट रही है। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर किसानों का समर्थन करके लड़ाई लड़नी चाहिए क्योंकि यदि किसान नहीं बचेगा तो देश की करोड़ो की आबादी के लिए भोजन की व्यवस्था कैसे हो पाएगी ? चित्रा सरवारा ने कहा कि वर्तमान हालात में सत्तारूढ़ भाजपा को अपना चेहरा और रवैया बदलना होगा। राष्ट्रहित में झूककर किसानों से बात करनी होगी और तानाशाही रवैया छोड़ना होगा क्योंकि किसानों की एमएलआर न काटकर उनके खिलाफ एफआईआर काटना सरकार का हिटलरशाही रवैया है।

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