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बच्चों का उज्जवल भविष्य वही होगा, जहां बाल श्रम नहीं होगा :- सहोता

Byadmin

Jun 13, 2020

बाल मज़दूरी के खिलाफ जागरूकता फैलाने और 14 साल से कम उम्र के बच्चों को इस काम से निकालकर उन्हें शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से इस दिवस की शुरुआत साल 2002 में ‘द इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन’ की ओर से की गई थी भाजपा कार्यकर्ता व भारतीय नमो संघ युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष अंकित सहोता ने प्रेस विज्ञापित के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा की बाल मज़दूरी को जड़ से खत्म करने के लिए बालश्रम निषेध दिवस हर साल 12 जून को मनाया जाता है जो दिन बच्चों के पढ़ने, खेलने और कूदने के होते हैं, उन्हें बाल मजदूर बनना पड़ता है। इससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है बाल मजदूरी वो प्रक्रिया है जिसमे बच्चो को बहुत कम वेतन पर काम करवाते है और बहुत बार तो बहुत से तो रात में भी काम करते है बच्चे देश का भविष्य होते हैं तो फिर लोग क्यों बाल श्रम को अपने थोड़े से फायदे के लिए प्रयोग कर रहे हैं देश के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह बाल मजदूरी का विरोध करे और इस दिशा में उचित कार्यवाही करें साथ ही साथ उनके अधिकार दिलाने के प्रयास करें जब तक बच्चों को उनके अधिकारों और शिक्षा से वंचित रखा जाएगा तब तक देश के उज्जवल भविष्य की कल्पना करना निरर्थक है देश के विकास पर बाल श्रम के सभी प्रतिकूल प्रभावों के बारे में उद्योगपतियों और व्यापारियों को अच्छी तरह से अवगत कराने की जरूरत है असल में कहा जाए तो बच्चे अपनी उम्र के अनुरूप कठिन काम गरीबी के कारण करते हैं शिक्षा का अधिकार भी सभी बच्चों के लिए अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए बालश्रम की समस्या का समाधान तभी होगा जब हर बच्चे के पास उसका अधिकार पहुंच जाएगा।

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