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नगर निगम मेयर और 20 पार्षदों को निर्वाचित घोषित हुए 6 महीने पूरे

Byadmin

Jun 30, 2021



सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर का चुनाव 4 माह से लंबित – हेमंत  

अम्बाला शहर –   1 जुलाई 2021 को  अंबाला नगर निगम के दूसरे आम चुनावो में प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित  मेयर और सभी 20 वार्डो से निर्वाचित  नगर निगम सदस्यों (जिन्हे आम तौर पर पार्षद कहा जाता है हालांकि यह शब्द हरियाणा नगर निगम कानून में नहीं है ) के नाम  नोटिफाई हुए  पूरे 6 महीने हो गए है. 27 दिसंबर 2020 को उपरोक्त   चुनाव करवाए गए थे जबकि 30 दिसंबर को वोटों  की गिनती हुई थी जिसमें   हरियाणा जनचेतना पार्टी-हजपा  (वी )  की शक्ति रानी शर्मा नगर निगम की   पहली  सीधी निर्वाचित और महिला मेयर के रूप में  निर्वाचित हुई थी एवं उन्होंने  प्रदेश में  सत्तारूढ़ भाजपा-जजपा  की सांझा  उम्मीदवार डॉ. वंदना शर्मा को 8 हज़ार  के अधिक वोटों के अंतर से पराजित किया. इसके अलावा नगर निगम के 20 वार्डो   में से 8 पर भाजपा,  7 पर हजपा (वी), 3 पर कांग्रेस और 2 पर निर्मल-चित्रा की एचडीएफ के उम्मीदवार विजयी हुए. इन सब के नाम 1 जनवरी 2021 को राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नोटिफाई किये गए थे. ज्ञात रहे  कि चुनावो के 2 हफ्ते बाद ही कांग्रेस के वार्ड 5 से विजयी राजेश मेहता पाला बदलकर मेयर की पार्टी- हजपा(वी ) में शामिल हो गए.  

बहरहाल, शहर निवासी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत  कुमार ने बताया कि आज चुनाव संपन्न   होने के छः माह बाद ही   नगर निगम के सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव नहीं करवाया गया है जोकि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है.  उन्होंने बताया कि हरियाणा नगर निगम निर्वाचन नियमावली, 1994 के नियम  71(2) में यह स्पष्ट उल्लेख है कि नगर निगम के आम चुनावों के बाद  निर्वाचित नगर निगम मेयर/सदस्यों के नाम नोटिफाई होने के  60 दिनों के भीतर नगर निगम कमिश्नर द्वारा 48 घंटे के नोटिस पर सदन की  बैठक बुलाई जाएगी  जिसके एजेंडा में  सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का निर्वाचन करवाना होगा. चूँकि निर्वाचित मेयर और नगर निगम सदस्यों के नाम 1 जनवरी 2021 को नोटिफाई हो गए इसलिए 2 मार्च तक सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर का निर्वाचन हो जाना चाहिए था.

हालांकि   नगर निगम  के तत्कालीन  कमिश्नर  पार्थ गुप्ता द्वारा ऐसा नहीं किया गया था  जो उनका उक्त नियमानुसार कानूनन दायित्व/जिम्मेदारी थी. अब इसके पीछे क्या कोई प्रशासनिक कारण हैं या किसी प्रकार का राजनैतिक दबाव अथवा  कुछ और, यह सार्वजनिक होना चाहिए. बहरहाल, नगर निगम के नए कमिश्नर धीरेन्द्र खड़गटा द्वारा कार्यभार संभालने के इतने दिनों बाद भी उक्त चुनाव करवाने बारे कोई बयान नहीं दिया गया है.  

लिखने योग्य है कि जून, 2013 में  अंबाला नगर निगम के पहले  आम चुनावों के बाद 7 जून, 2013 को नव निर्वाचित नगर निगम सदस्यों की नोटिफिकेशन जारी हुई   एवं इसके 30 दिनों के भीतर ही पहले  2 जुलाई, 2013 को  निर्दलयी रमेश मल को  नगर निगम अम्बाला का  पहला  मेयर चुना गया था. फिर 1 अगस्त 2013 को दुर्गा सिंह अत्री सीनियर डिप्टी मेयर और सुधीर जैसवाल डिप्टी मेयर निर्वाचित हुए  अर्थात दोनों पदों का चुनाव भी 60 दिनों से पहले ही करवा लिया गया था.  

हेमंत ने अत्यंत खेद  जताते हुए बताया कि बीते  6 माह में  मौजूदा अम्बाला नगर निगम की मात्र एक बैठक गत  25 फरवरी को  शहर के पंचायत भवन में संपन्न हुई परन्तु न तो मेयर और उनकी पार्टी हजपा के  और न ही विपक्षी भाजपा, कांग्रेस और एचडीएफ के नगर निगम सदस्यों (पार्षदों ) द्वारा  सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का  निर्वाचन करवाने  का मामला  उसमें उठाया गया जिससे यही प्रतीत होता है कि न मेयर की पार्टी हजपा और न हो विपक्षी भाजपा, जिन दोनों के मौजूदा  सदन 8-8 नगर निगम सदस्य हैं, तब  उक्त दोनों पदों के लिए चुनाव नहीं करवाना चाहते थे   संभवतः ताकि अपने अपने  विरोधी खेमों में सेंधमारी कर  अपनी संख्या बढ़ाकर उक्त पदों पर अपनी जीत  सुनिश्चित कर सकें.      

हेमंत ने एक और रोचक जानकारी देते हुए बताया कि चूँकि मौजूदा हरियाणा नगर निगम कानून में दल-बदल विरोधी सम्बन्धी कोई प्रावधान नहीं है इसलिए कोई भी पार्षद  किसी भी पार्टी या खेमे में बे रोक-टोक आ-जा सकता है और ऐसा करने से उसकी  नगर निगम सदस्यता नहीं जायेगी. दल-बदल विरोधी कानून आम तौर पर सांसदों और विधायकों  पर  लागू होता है हालांकि अगर राज्य सरकार चाहे तो विधानसभा से कानूनी संशोधन करवाकर उसे नगर निगमों पर भी लागू कर सकती है जैसा कुछ माह पूर्व हिमाचल की भाजपा सरकार द्वारा किया गया है.  

One thought on “नगर निगम मेयर और 20 पार्षदों को निर्वाचित घोषित हुए 6 महीने पूरे”
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