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नगर निगम की आम बैठक हेतू तारिख और एजेंडा कौन तय करेगा, कानूनन स्पष्ट ही नहीं – हेमंत

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Feb 21, 2021

धारा 52(2) में  मेयर, सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर द्वारा विशेष बैठक बुलाने का ही उल्लेख

नवनिर्वाचित निगम से 60 दिनों में  सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर के निर्वाचन हेतू कमिश्नर बुला सकता है बैठक

अम्बाला शहर – हरियाणा में नगर निगम की आम (सामान्य ) बैठक बुलाने और उसका  एजेंडा निर्धारित करने  के लिए कानूनन कौन सक्षम एवं अधिकृत हैं-  मेयर (महापौर ) , जो वर्ष  2018 से  निगम क्षेत्र के मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से  निर्वाचित होता है अथवा राज्य सरकार द्वारा नगर निगम के दैनिक प्रशासन हेतू  तैनात किया गया कमिश्नर (आयुक्त) जो सामान्यत: आईएएस अधिकारी होता है, इस सम्बन्ध में हरियाणा नगर निगम एक्ट ( अधिनियम), 1994  में स्पष्ट उल्लेख ही नहीं है.  

शहर निवासी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि मेयर और उनकी पार्टी के एवं  विपक्षी भाजपा के नेता चाहे कुछ भी दावा करें, परन्तु   1994 अधिनियम  में इस बारे में स्पष्ट  प्रावधान  नहीं हैं हालांकि कानूनन ऐसा  उल्लेख होना  अत्यंत आवश्यक है क्योंकि उक्त कानून की धारा 52 (1 ) के अनुसार  निगम निगम की  सामान्यत: हर महीने  कम से कम एक बैठक होनी  चाहिए. अगस्त, 2019 में इस धारा में यह भी  कानूनी प्रावधान किया गया कि उक्त मासिक बैठक के अतिरिक्त हर नगर निगम को प्रत्येक छः माह में कम से कम तीन दिनों की बैठक (एक प्रकार का मिनी -सत्र)  भी   बुलाना होगा.

उन्होंने बताया कि अगर  प्रदेश  में सत्ताधारी सरकार की पार्टी के ही चुने हुए मेयर और बहुमत में नगर निगम सदस्य ( जिन्हें पार्षद/काउंसलर/कॉर्पोरेटर  भी कहा जाता है हालांकि ये शब्द हरियाणा नगर निगम कानून में नहीं हैं)  निर्वाचित हों जाएँ , फिर तो कोई विवाद नहीं होता एवं ऐसी स्थिति में  मेयर  एवं निगम कमिश्नर के मध्य सब कुछ आपसी सहमति से सुचारु ढंग से  चलता रहता है. हालांकि जब ऐसा न हो अर्थात जब राज्य में  सत्ताधारी दल की विपक्षी पार्टी का मेयर चुना जाता है, तो  कमिश्नर और मेयर के मध्य अपनी अपनी कानूनी शक्तियों के  प्रयोग करने को लेकर  आपसी रस्साकशी  होती ही रहती  है.

दिसंबर, 2020 में   अम्बाला नगर निगम के संपन्न हुए दूसरे आम चुनावो के डेढ़ माह बाद एवं मेयर/नगर निगम सदस्यों   की शपथ ग्रहण के  एक माह बाद बीती  18 फरवरी को मेयर शक्ति रानी शर्मा द्वारा  नगर निगम की बुलाई  बैठक में उनके  अतिरिक्त   हरियाणा जनचेतना पार्टी (हजपा-वी) से निर्वाचित 7 और एक कांग्रेस छोड़ हजपा में आये वार्ड 5 के राजेश मेहता अर्थात कुल  8 नगर निगम सदस्य  ही  मौजूद रहे.  इससे पहले इसी   बैठक को बुलाने  और उसके   एजेंडा को  लेकर    मेयर  और  कमिश्नर पार्थ गुप्ता  के बीच   गतिरोध देखने को  मिला  था. हालांकि  15 नगर  निगम सदस्यों द्वारा एक  ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर  बैठक बुलाने को दावा किया गया  परन्तु बाद में उनमें से  कईयों द्वारा  यू-टर्न ले लिया  गया.

बहरहाल, इसी बीच मेयर द्वारा अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए 18 फरवरी को नगर निगम की जो बैठक बुलायी गई  उसमें   हालांकि  नगर निगम का कोई अधिकारी उपस्थित नहीं रहा. भाजपा के 8 एवं कांग्रेस एवं हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट (एचडीएफ) के दो -दो सदस्यों अर्थात कुल 12 ने भी उक्त बैठक का बहिष्कार किया. यही नहीं भाजपा  सदस्यों ने उस  बैठक पर सवाल उठाते हुए डीसी अम्बाला को लिखित ज्ञापन भी सौंपा. इस प्रकार उस बैठक में पारित प्रस्तावों की कानूनी वैधता पर फिलहाल  संशय कायम है. बहरहाल, इसी बीच  कमिश्नर द्वारा निगम सचिव के माध्यम से 18 फरवरी को ही कानूनन आवश्यक  पांच दिन के पूर्व नोटिस पर   23 फरवरी को नगर निगम की बैठक बुलाई गयी जिसे  पहले तो मेयर द्वारा मान लिया गया परन्तु  बाद में उस दिन  उपस्थित न पाने  का हवाला देकर मेयर ने बैठक की तारिख बदलवाकर 24 फरवरी करवा दी  अर्थात मेयर द्वारा यह दर्शाया गया कि बैठक की वास्तविक तारिख पर उनकी ही मर्जी चलेगी.  

 हेमंत ने 1994 कानून की धारा 52  (2 )  का हवाला देते हुए बताया कि उसमें  स्पष्ट उल्लेख है कि मेयर या उसकी अनुपस्थिति में सीनियर डिप्टी और उन दोनों की अनुपस्थिति में डिप्टी मेयर, जब भी उसे उपयुक्त लगे, वह नगर निगम के न्यूनतम एक-चौथाई सदस्यों (जो संख्या अंबाला नगर निगम में 5.25  या 6  बनती है) के लिखित अनुरोध पर नगर निगम की विशेष बैठक बुला सकता है परंतु  इस  धारा में मेयर द्वारा नगर निगम की आम  बैठक  बुलाने का उल्लेख नहीं है. इसलिए इस धारा में उपयुक्त कानूनी संशोधन कर मेयर या कमिश्नर को अथवा दोनों को आपसी सहमति  के साथ, नगर निगम की मासिक आम बैठक और हर छः माह में तीन दिनों की बैठक बुलाने सम्बन्धी  उल्लेख किया जाना चाहिए.  

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