• Wed. Jun 29th, 2022

टिकाऊ खेती व पर्यावरण संरक्षण में कारगर होगा नैनो यूरिया  का उपयोग

Byadmin

Jun 16, 2022


अम्बाला, 16 जून:-
इफको अम्बाला द्वारा गांव दुखेड़ी में एक किसान सभा का आयोजन कर खेती की नई तकनीकियों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर डा0 पुष्पेन्द्र वर्मा , राज्य विपणन प्रबन्धक, इफको हरियाणा मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि सघन खेती पद्धति से मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी के साथ-साथ जैविक कार्बन स्तर में गिरावाट आई है। यूरिया खाद का अत्यधिक प्रयोग मिट्टी के स्वास्थय को बिगाड़ रहा है। फसलें यूरिया खाद का मात्रा 30 प्रतिशत हिस्सा ही ग्रहण कर पाती हैं बाकि 70 प्रतिशत यूरिया हवा व भूमिगत जल को दुषित कर रहा है। यूरिया नाईट्रस ऑक्साईड में बदल कर वायु प्रदुषण व नाईट्रेट के रूप में जल प्रदुषण को बढ़ा रहा है। दानेदार यूरिया के विकल्प के तौर पर इफको द्वारा नैनो तकनीक पर आधारित नैनो यूरिया तरल विकसित किया है जिसका फसलों पर स्प्रे किया जाता है। इसके दो छिडक़ाव करने से फसल में प्रयोग होने वाले दानेदार यूरिया की मात्रा में 50 प्रतिशत की कमी लाई जा सकती है। इसकी 500 एमएल मात्रा का 125 लिटर पानी में मिलाकर पहला स्प्रे फसल की फूटाव की अवस्था पर व दूसरा स्प्रे निसारे से एक सप्ताह पहले करने से फसल की नाइट्रोजन की आवश्यकता की पुर्ति हो जाती है। उन्होने खेती में ड्रोन तकनीक के बारे भी किसानों को विस्तार से जानकारी दी।
ओमकार सिंह ने जैव उर्वरकों के प्रयोग बारे तकनीकि जानकारी दी। कुलदीप बाना ने विभिन्न खादों पर दी जाने वाली सबसीडी की मात्रा से अवगत कराया। डा0 राजेन्द्र सिंह, कृषि वैज्ञानिक ने फसल चक्र में दलहनी फसलों के समावेश पर बल देते हुये बताया कि दलहनी फसल मिट्टी के स्वास्थय में सुधार करती हैं।
प्रवीण कुमार, सहायक प्रबन्धक अम्बाला ने बताया कि इफको लगातार 21 वर्षों से अपनी सदस्य समितियों को 20 प्रतिशत लाभांश वितरित कर रही है। इस वर्ष भी जिला अम्बाला की 54 सहकारी समितियों को रुपये 25 लाख का लाभांश प्राप्त हुआ है। कार्यक्रम में प्रगतिशील किसान संजू, राजकरण, सुखविन्द्र, कप्तान सिंह व रोबिन समेत 100 से अधिक किसानों ने भाग लिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published.