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जज्बे, जुनून, हिम्मत, अनुशासन और नियमों की पालना के दम पर शिक्षक दम्पति ने दी कोरोना को मात।

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May 5, 2021

–गांव पंजलासा के शिक्षक दम्पति अध्यापक राजेश बख्शी और उनकी धर्मपत्नी कविता पराशर ने हौंसले और हिम्मत के साथ कोरोना पर विजय प्राप्त कर दिया संदेश- कोरोना पर विजय प्राप्त करने के लिए सबसे बड़ा हथियार आपका हौंसला और हिम्मत।
 अनुशासन में रह कर यानि मास्क, सेनिटाइजर व सोशल डिस्टेंसिंग रख कर आप इस पर आसानी से विजय प्राप्त कर सकते है।
अम्बाला/नारायणगढ़, 5 मई। 
         सेना के अनुशासन और हौंसले से दी कोरोना को मात। हम यहां बात कर रहे है गांव पंजलासा के शिक्षक दम्पति की। गत नवम्बर मास के दौरान शिक्षक राजेश बख्शी और उनकी धर्मपत्नी कविता पराशर कोरोना पॉजिटिव आ गये। दोनों ने ही हौंसले और हिम्मत के साथ कोरोना पर विजय प्राप्त कर यह संदेश दिया कि कोरोना पर विजय प्राप्त करने के लिए सबसे बड़ा हथियार आपका हौंसला और हिम्मत है। अनुशासन में रह कर यानि मास्क, सेनिटाइजर व सोशल डिस्टेंसिंग रख कर आप इस पर आसानी से विजय प्राप्त कर सकते है।
        अध्यापक राजेश बख्शी (54) नेवी से ऑफिसर रेंक से सेवानिवृत है और आज कल वे नारायणगढ के राजकीय प्राथमिक स्कूल में कार्यकारी मुख्यअध्यापक के पद पर कार्यरत है जबकि उनकी धर्मपत्नी कविता पराशर (46) राजकीय मिडल स्कूल बुढाखेड़ा में अध्यापिका है। राजेश बख्शी बताते है कि गत वर्ष नवम्बर मास के दौरान उन्हें बुखार, खांशी, छाती में संक्रमण की दिक्कत हुई। नारायणगढ़ में डॉक्टरों की सलाह के उपरांत उन्होंने कोरोना टेस्ट 21 नवम्बर को कराया तो उनकी रिर्पोट पॉजिटिव आई और उन्हें नागरिक अस्पताल अम्बाला शहर में दाखिल करवा दिया गया। उनकी पत्नी में कोरोना के सिमटम नहीं थे लेकिन रिर्पोट उनकी भी पॉजिटिव आई। उन्हें भी अम्बाला के अस्पताल में दाखिल करना पड़ा लेकिन उन्होंने मुझे भी हिम्मत बंधाई और स्वयं भी हौंसला रखा। कविता पराशर की रिर्पोट 5-6 दिन बाद नेगेटिव आ गई और वे ठीक हो गई।
              राजेश बख्शी ने बताया कि अस्पताल में उनका ऑक्सीजन लेवल 48 प्रतिशत रह गया था। उसके बाद उन्हें 27 नवम्बर को परिजनों ने हिलींग टच में दाखिल करवा दिया। वे बताते है कि 27 नवम्बर से 30 नवम्बर तक वे वैंटीलेटर पर रहे और डॉक्टरों ने उनके ठीक होने की उम्मीद 20 से 30 प्रतिशत बताई। उनका वजन भी 92 से 76 किलो हो गया था। लेकिन उन्होंने अपनी हिम्मत नहीं हारी और अपनी विल पॉवर से कोरोना को शिकस्त दी। वे कहते है कि ईश्वर की कृपा और डॉक्टरों के प्रयासों से उनके पैरामीटर स्टेबल हो गये और उनकी रिकवरी शुरू हुई। वे 16 दिसम्बर को अस्पताल से डिस्चार्ज हुए और 30 दिसम्बर तक होम आईसोलेशन में रहे और 2 जनवरी को फिर चैक करवाया तथा डॉक्टर ने उन्हें फिटनेस सर्टीफिकेट दिया। आज वे पूरी तरह से स्वस्थ है और योग, प्राणायाम, अनुलोम-विलोम तथा सूर्य नमस्कार प्रतिदिन 30 से 45 मीनट तक करते है।
          उनका कहना है कि ठीक होने के बाद उन्होंने योग एवं प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया है। इम्यूनिटी बढाने के लिए आयुर्वेदिक जड़ी बुटियों जैसे काली मिर्च, दाल चीनी, मैथी दाना, निम्बू पानी, प्रोटिन आदि का सेवन नियमित रूप से करते है।
          अध्यापक राजेश बख्शी कहते है कि कोरोना पर विजय प्राप्त करने के लिए सबसे सरल माध्यम मास्क लगाना, सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन, हाथों को सेनिटाइज करते रहना और अपने आस पास साफ सफाई रखना है। अगर सभी लोग सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा बताई गई सावधानियों/हिदायतों का पालन अनुशासित हो कर करें तो एक सप्ताह में ही नारायणगढ से कोरोना वायरस खत्म हो सकता है और लॉकडाउन की जरूरत ही नहीं पडेगी। उन्होंने कहा कि जब आप स्वयं मास्क पहनेगें, एक-दूसरे से सोशल डिस्टेंसिंग रखेगें तो कोरोना वहीं हार मान लेगा।
         वे कहते है कि उनकी माता जी की आयु लगभग 82 वर्ष है और बेटा 21 वर्षीय तथा बेटी 18 वर्ष की है उस समय इनके भी टेस्ट करवाये गये और इन सबकी रिर्पोट नेगेटिव आई। उन्होंने बताया कि अस्पताल में जब वे दाखिल थे तब परिजनों, रिश्तेदारों, मित्र तथा स्कूल स्टाफ उन्हें हौंसला देता रहा और बाद मेें विडियों कॉल से भी उनका कुलक्षम पूछते रहे जिससे उन्हें काफी हिम्मत मिली। राजेश बख्शी बताते है कि उनका परिवार सैन्यपृष्ठ भूमि से है। उनके पिता स्व. सोमदत सेना में सुबेदार रहे और बाद में कस्टम ऑफिसर रिटायर्ड हुए। उनका भतीजा सेना में कैप्टन है। सैन्य पृष्ठ भूमि से होने के कारण उनके परिवार का हौंसला और मनोबल वैसे भी ऊंचा और अनुशासन में रहते है। जब वे ठीक होकर गांव में आये तो गांववालों और रिश्तेदारों ने उनका स्वागत किया तथा प्रशंता व्यक्त की। लेकिन वे स्वयं एक सप्ताह तक घर में कोरोन्टीन रहे। आज उनका वजन लगभग 80 किलो है और वे पूरी तरह से स्वस्थ है तथा अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे है।
बॉक्स-शिक्षक दम्पति अध्यापक राजेश बख्शी और अध्यापिका कविता पराशर ने बताया कि कोरोना से जंग जीतने के बाद उन्होंने अपने आस पास के लोगों, बच्चों के अभिभावकों को ऑन लाइन पैरेंटस टीचर मीटिंग/ पीटीएम में जागरूक करने काम किया और उन्हें बताया कि अगर आप साफ सफाई रखेगें तो कोरोना को 50 प्रतिशत मार देगें और शेष 50 प्रतिशत आप मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग रखकर, हाथों को नियमित रूप से साबुन/पानी से धो कर, भीड भाड से दूर रह कर मार देगें तथा आप सौ प्रतिशत उस पर विजय प्राप्त कर लेगें।
बॉक्स- अध्यापक राजेश बख्शी ने लोगों से अनुरोध किया है कि वे अधिक से अधिक पौधा रोपण करे और वातावरण को स्वच्छ बनाने में अपना योगदान दें। जिससे कि हमें प्राकृतिक रूप से स्वच्छ वातावरण एवं ऑक्सीजन मिल पाए।
बॉक्स- अध्यापिका कविता पराशर ने कहा कि कोरोना वायरस को हलके में न ले। हिदायतों एवं नियमों का पालन करके कोरोना को हराना मुश्किल नहीं है। अपना मनोबल उंचा रखें, घबराये नहीं। विल पावर के कारण ही उनके पति राजेश बख्शी कोरोना को मात देने में कामयाब हुए है। उन्होंने कहा कि सभी लोग अपनी बारी आने पर कोविड-19 रोधी वैक्सीन लगवाये। उन्होंने व उनके परिवार ने वैक्सीन की डोज ले ली है।

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