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छठे राज्य वित्त आयोग के चेयमैन पी. राघवेन्द्र राव की अध्यक्षता में स्थानीय किंगफिशर पर्यटक स्थल में मंडल स्तरीय ब्रेनस्टोरमिंग सेशन का हुआ आयोजन

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Aug 25, 2021

छठे राज्य वित्त आयोग के चेयमैन पी. राघवेन्द्र राव की अध्यक्षता में स्थानीय किंगफिशर पर्यटक स्थल में मंडल स्तरीय ब्रेनस्टोरमिंग सेशन का हुआ आयोजन–मंडल स्तरीय इस सेशन में मंडल के तहत आने वाले जिला उपायुक्तों और आयुक्त निगमों तथा सीईओज जिला परिषद व अन्य सम्बन्धित अधिकारियों ने लिया भाग और दिये अपने-अपने सुझाव।
–प्रदेश में समान रूप से विकास कार्यों को अमलीजामा पहनाने के दृष्टिïगत मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने विकास निधि पोर्टल को किया था लॉंच–सरकार का मुख्य उद्देश्य है समूचे प्रदेश में समान रूप से विकास कार्यों को कार्यरूप में परिणत करना:- पी.राघवेन्द्र राव, चेयरमैन।
–बदलते परिवेश में अधिकारियों को नई अवधारणा के साथ काम करने की जरूरत–किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का आंकलन होता है उसकी जीडीपी से–हर दृष्टिïकोण से आर्थिक रूप से मजबूत होने के लिये और बेहतर तरीके से किया जाना चाहिए कार्य:-मंडल आयुक्त संजीव वर्मा।
अम्बाला, 25 अगस्त:- 
छठे राज्य वित्त आयोग के चेयरमैन पी.राघवेन्द्र राव की अध्यक्षता में आज स्थानीय किंगफिशर पर्यटक स्थल में मंडल स्तरीय बे्रनस्टोरमिंग सेशन का आयोजन किया गया। इसमें मंडलायुक्त संजीव वर्मा और अम्बाला मंडल के तहत आने वाले जिला उपायुक्तों, नगर निगम आयुक्तों, सीईओ जिला परिषद के साथ-साथ छठे राज्य वित्त आयोग से जुड़े अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों में आय के संसाधनों, टैक्सों को व्यवस्थित कर विकास के कार्यों को गति देना, खर्चों में कमी सम्बन्धी विषयों को लेकर बिन्दूवार  ओपन हाउस में खुलकर चर्चा हुई। वित्तीय संसाधनों का हस्तातंरण किस प्रकार हो, वित्तीय संसाधन प्रबन्धन का मापदंड क्या होना चाहिए, विभिन्न समूहों की प्रभावी साझेदारी, लेखा परीक्षा रख-रखाव व सम्बन्धित सिद्घांतो को कार्यरूप में परिणत करके और बेहतर कर सकते हैं। सबसे पहले ये देखा जाए कि लोकल बॉडी और पंचायती राज संस्थाओं की मजबूती के लिये किन-किन संसाधनो की जरूरत है। समानता के साथ काम को आगे बढ़ाया जाये और समय-समय पर सम्बन्धित अधिकारियों और बॉडीज द्वारा किये गये कार्यों की समीक्षा भी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि इस विषय को लेकर वित्त आयोग की करनाल और गुरूग्राम में बैठकें हो चुकी हैं और अब तीसरी बैठक में अम्बाला में हो रही है। इसके उपरांत क्रमानुसार अन्य डिवीजनों में  भी निर्धारित समय अनुसार मीटिंगों का आयोजन किया जायेगा, जिसमें सम्बन्धित मंडलायुक्त, आयुक्त नगर निगम और सीईओ जिला परिषद के साथ-साथ सम्बन्धित अधिकारी आमंत्रित किये जायेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पैसे की कमी नही है लेकिन उसके उपयोग किस प्रकार किया जाये, इस विषय को लेकर मंथन अति आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े-बड़े शहरों में फंड अधिक होते हैं, छोटे कस्बों और शहरों में भी अधिक से अधिक फंड दिये जाने चाहिए ताकि विकास के शिखर के पराकाष्ठïा उन्हें भी देखने को मिले। गली, नालियों की बात बहुत हो चुकी है, अब नया जमाना है, वर्तमान और भावी पीढ़ी के रूझान  और रूचि को देखते हुए स्थानीय निकायो और पंचायती राज संस्थाओं में नये तरीके से काम करने की जरूरत है।
इससे पूर्व अम्बाला के मंडलायुक्त संजीव वर्मा ने अपनी स्वागतीय अभिव्यक्ति में कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य कम धनराशि खर्च करके लोगों को अधिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं, इस विषय पर काम करने की जरूरत है। पंचायती राज संस्थाओं व स्थानीय निकायों में किये जाने वाले और किये जा रहे कार्यों की समीक्षा, योजनाओं और परियोजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर पहले जो माईंडसैट अधिकारियों के जहन में होते रहे हैं, बदलते परिवेश में उन्हें बदलने की जरूरत है। अब धारणा बदल गई है, समय बदल गया है, हम सभी को भी अपनी काम करने की शैली में तेजी के साथ परिवर्तन लाने की जरूरत है ताकि वित्त आयोग द्वारा स्वीकृत किये गये बजट का सदुप्योग हो, लोकल बॉडी को कैसे मजबूत किया जाए। इसके साथ-साथ स्थानीय निकाय की आय के साधन और टैक्स व्यवस्था बेहतरीन तरीके से व्यवस्थित की जाए, पंचायती राज संस्थाओं को सुदृढ करते हुए इस विषय को प्रेरक और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है। अपने-अपने क्षेत्र में सेवा के कार्यों को बेहतर तरीके से करने के चलते हमें अलग पहचान बनाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी देश, प्रदेश की तरक्की का पैमाना वहां की अर्थव्यवस्था रूपी जीडीपी के आंकलन से ही किया जा सकता है। जब जीडीपी मजबूत होगी तो विकास कार्यों के बेहतर खाके तैयार होंगे और उन्हें सुचारू रूप से कार्यरूप में परिणत किया जा सकेगा। हमें अर्थव्यवस्था को और बेहतर करने की जरूरत है।
बैैठक में अम्बाला के उपायुक्त विक्रम सिंह ने सुझाव दिया कि बजट बनाते समय सभी पहलूओं पर विस्तार से ध्यान देने की जरूरत है। ऑडिट समय पर होने चाहिए। किये गये कार्यों की व्यवस्था ऑनलाईन होनी चाहिए। स्थानीय निकायों के साथ-साथ पंचायती राज संस्थाओं को भी अपेक्षाकृत अधिक मजबूती प्रदान करने की जरूरत है। जो संस्थाएं विकास कार्यों के लिये बजट खर्च नही कर पाती, उनके बजट में कट लगाने की व्यवस्था भी होनी चाहिए। टैक्स व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिये नई कालोनियों को नियमित करने के दृष्टिïगत टैक्स व्यवस्था के नये तौर तरीकों पर विचार करने की जरूरत है। टोल टैक्सों पर सेस व्यवस्था के साथ-साथ उपमंडलों में जीर्णोद्घार स्कीम के तहत अतिरिक्त व्यवस्था की जा सकती है। सीएनयू की फीस में बढ़ौतरी करके भी टैक्स व्यवस्था में इजाफा किया जा सकता है। पंचायती राज संस्थाओं के सुदृढीकरण के लिये नियमित रूप से ग्राम सभाओं का आयोजन करके कार्यों की समीक्षा भी अति आवश्यक है।
इसके अलावा लग्जरी भवनों में अतिरिक्त रूप से टैक्स लगाये जा सकते हैं। सुझाव के अंतर्गत यह भी बात आई कि कम्यूनिटी सेंटर और बैंक्विट हाल में बुकिंग फीस की अतिरिक्त व्यवस्था करके आय के साधन बढ़ सकते हैं। पानी और सीवरेज के दृष्टिïगत भी टैक्स व्यवस्था मजबूत की जा सकती है। पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के लिये हर पेमेंट की व्यवस्था ऑनलाईन होनी चाहिए। सभी सेवाएं प्रॉपर्टी आईडी से लिंक हो सकती हैं। इसके साथ-साथ राज्य सरकार के सभी विभागों में प्रॉपर्टी टैक्स प्राथमिकता के आधार पर क्लीयर हों जैसे कि बिजली बिल इत्यादि। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जिला परिषद के मजबूतीकरण के दृष्टिïगत स्पेशल टैक्स सैल स्थापित किया जा सकता है।
बैठक में पंचकूला के उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने भी बिन्दूवार नगर निकायों को मजबूत करने के साथ-साथ पंचायती राज संस्थाओं में पारदर्शी और प्रेरक व्यवस्था करने सम्बन्धी विषयों पर सुझाव दिये। उन्होंने कहा कि जो पंचायती राज संस्थाएं बेहतर कार्य कर रही हैं, साथ ही वे स्थानीय निकाय, जिन्होंने अनुकरणीय कार्य किया है, उनको भी सम्मान मिलना चाहिए ताकि वे अन्य के लिये प्रेरणा बन सकें। नॉन टैक्स राजस्व बढ़ाने के लिये नये तौर तरीकों पर काम करने का सुझाव दिया। अर्बन डिवल्पमैंट के लिये सम्बन्धित की ट्रेनिंग नियमित रूप से होनी चाहिए। नगर निगम पंचकूला के आयुक्त धर्मवीर सिंह ने भी संदर्भित विषय को लेकर अपने सुझाव सांझा किये। यमुनानगर नगर निगम के आयुक्त डा0 अजय सिंह तोमर ने भी स्थानीय निकायों के सुदृढीकरण, पारदर्शिता के साथ-साथ पंचायती राज संस्थाओं को और बेहतर बनाने तथा आय के नये साधन खोजने सम्बन्धी विषय को लेकर सुझाव दिये। कुुरुक्षेत्र के उपायुक्त मुकुल कुमार तथा सीईओ जिला परिषद अश्वनी मलिक ने भी सम्बन्धित विषयों को लेकर अपने-अपने सुझाव दिये।
इस मौके पर आयोग में सलाहकार डा0 महीपाल ने प्रैजेंटेशन के माध्यम से सम्बन्धित विषय को लेकर अपनी अभिव्यक्ति दी। उन्होंने कहा कि सबसे पहले तो यह देखने की जरूरत है कि स्थानीय निकायों के साथ-साथ पंचायती राज संस्थाओं को और अधिक पारदर्शी बनाने के दृष्टिïगत कौनसी समस्या आड़े आ रही है, उसको प्राथमिकता के तौर पर हल करने की जरूरत है। संविधान के 73वें संसोधन के तहत पंचायती राज संस्थाएं और 74वें संसोधन के तहत स्थानीय निकाय क्रमश: 29 और 18 विकास बिन्दूओं पर बेहतरीन काम करवा सकती हैं और अपेक्षाकृत आमजन के लिये बेहतरीन सेवाएं और सुविधाएं उपलब्ध करवाने में मदद करवा सकती हैं।
इसी बीच चेयरमैन पी.राघवेन्द्र ने कहा कि स्टेट वित्त आयोग और सेंट्रल वित्त आयोग महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। फिल्ड में किस तरह से काम हो, इस व्यवस्था को कार्यरूप में परिणत करने की जरूरत है।  इस मौके पर आयोग के सलाहकार आर.के. मेहता, सलाहकार एम.पी. माथुर, एसडीएम हितेष मीणा, सीटीएम यमुनानगर निशा, सीईओ जिला परिषद, अनुराग ढालिया, प्रशासनिक अधिकारी कुलवंत कुमार खुल्लर, नीशू सिंघल, अजरा महावाश एसोसिएशट हिपा, मीनाक्षी सिन्हा सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित थे।

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