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चार महीने से चल रहा किसान आंदोलन दिन प्रतिदिन जोर पकड़ रहा है : चित्रा सरवारा

Byadmin

Mar 28, 2021

अम्बाला : 28 मार्च
हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट की नेत्री चित्रा सरवारा ने कहा है कि दुनिया में कोई भी चीज ज्यादा चलती है तो मीडिया की हैडलाइन बदल जाती है। लेकिन भारत के किसान इस बात के लिए बधाई के पात्र हैं कि करीब 4 महीने से चल रहा किसान आंदोलन दिन प्रतिदिन जोर पकड़ रहा है। वे आज दिल्ली में टिकरी बॉर्डर पर किसानों के बीच पहुंची थी। मंच से संबोधित करने का अवसर प्रदान करने के लिए किसान नेताओं का आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि वे पूर्व मंत्री निर्मल सिंह की बेटी है और किसान परिवार में जन्म लेने के कारण यह बात दावे से कह सकती है कि वर्तमान किसान आंदोलन अब उस स्थिति पर पहुंच गया है कि अभी नहीं तो कभी नहीं। उन्हांने कहा कि अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए केंद्र की भाजपा सरकार ने जिन तीन काले कृषि कानूनों को जबरन किसानों पर थोपा है। उनसे किसानों की फसलें और नस्लें बर्बाद हो जाएंगी। किसानों के साथ साथ व्यापारी, कर्मचारी, युवा वर्ग और महिलाओं को भी इस कारण अनेकों दिक्कते झेलनी पड़ेंगी। 
उन्होंने कहा कि 118 दिन से लाखों किसान दिल्ली बॉर्डर पर बैठे हैं। 300 से ज्यादा किसान अपनी शहादत दे चुके हैं। लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा और उनकी सहयोगी पार्टियों के नेताओं को कुछ किलाेमीटर चलकर किसानों के पास आने की फुर्सत नहीं है जबकि ये नेता हजारों किलोमीटर की यात्राएं करके रोजाना चुनावी सभाओं को संबाेधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को अपना अड़ियल रुख छोड़कर किसानों से बातचीत करनी चाहिए और संवेदनशील तरीके से उनकी मांगों पर विचार करना चाहिए। लोकतंत्र में जनता की आवाज सर्वोपरि होती है। सत्ता में बैठे लोगों को उसका सम्मान करना चाहिए। सरकार आंदोलन को जितना लंबा खींचेगी, ये उतना विस्तार लेता जाएगा। आज सड़क से लेकर संसद, विधानसभा,  गली, मोहल्ले, चौक, चौराहे और हर घर में किसान आंदोलन की चर्चा है। हर वर्ग किसानों के इस संघर्ष में उनके साथ खड़ा है। लेकिन इन सबके बीच किसानों के प्रति सरकार का रवैया बेहद निंदनीय है। सरकार का अड़ियल और संवेदनहीन रवैया किसानों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।
चित्रा सरवारा ने कहा कि आज सत्तारूढ़ सरकार यह दावा करती है कि देश में अमेरिका से ज्यादा विकास कार्य करवाएं जाएंगे जबकि हकीकत यह है कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की नीति अपना कर अमेरिका स्वयं अपने देश के किसानों को बर्बादी के कगार पर ला चुका है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के किसानों की स्थिति का जायजा लेने के लिए बीते दिनों नासा के वैज्ञानिक और आईआईटी के शोधकर्ता ने वहां 10 हजार किलोमीटर की यात्रा करके अपनी आंखों से देखा कि अमेरिका के किसानों की वर्तमान हालात क्या है और इसका क्या कारण है। उन्होंने कहा कि 80 के दशक में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति ने वहां के किसानों के लिए उदारनीति अपनाई और सरकार की ओर से भरपूर सहयोग को सहायता उपलब्ध करवाई। लेकिन 40 साल बाद अमेरिका के राष्ट्रपति ने वहां कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग शुरू करवाई परिणाम स्वरूप बड़ी बड़ी कंपनियाें ने किसानों से एग्रीमेंट करके खाद, बीज और कीटनाशक दवाईयां स्वयं उपलब्ध करवाई और पैदा की गई उपज को भी स्वयं बेचने का अनुबंध किया। बड़े बड़े शोरूम और मॉल में किसानों की उपज बिकने लगी। इस कारण कंपनियां तो संपन्न हुई जबकि किसानों की हालत यह हो गई कि उन्हें परिवार चलाने के लिए 12-12 घंटे की नौकरी करनी पड़ी। उन्हाेंने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग का प्रयोग अमेरिका जैसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली साधन संपन्न देश में भी फेल हो चुका है तो फिर यह भारत में कैसे कामयाब हो सकता है ? उन्होंने कहा कि किसानों की भलाई करने का नाम लेकर अपने चहेते चंद पूंजीपतियों के गोदामों में कृषि उपजों को पहुंचाने के मकसद से ही सरकार यह सब हथकंडे अपना रही है जिन्हें देश के किसान किसी भी हालत में कामयाब नहीं होने देंगे।

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