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खेती की नई तकनीकियों बारे किसान सभा का आयोजन

Byadmin

Aug 25, 2021

अम्बाला, 25 अगस्त:- जैव उर्वरकों व आधुनिक तकनीक से निर्मित नैनो उर्वरकों के बारे किसानों को जागरुक करने के उद्देश्य से गाँव पपलौथा में एक किसान सभा का आयोजन इफको अम्बाला द्वारा किया गया। कार्यक्रम में डा0 पुष्पेन्द्र वर्मा, राज्य विपणन प्रबन्धक इफको हरियाणा मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्तिथ थे व अध्यक्षता प्रगतिशील किसान निरंजन सिंह ने की। कार्यक्रम में गांव के 50 से अधिक किसानों ने भाग लिया।
  इस अवसर पर डा0 राजेन्द्र कुमार सिंह, वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केन्द्र तेपला ने कहा कि हमें जमीनों की उपजाऊ शक्ति कायम रखने के लिये फसल चक्र में दलहनी फसलों का समावेश करना चाहिये। दलहनी फसलों की जड़ों में लाभदायक जीवाणु होते हैं जो वायुमन्डल की नाईट्रोजन को फसल को उपलब्ध करवाते हैं। फलियों की तुडाई के बाद पत्ते व तने को खेत मिला देना चाहिये। इससे अगली फसल में यूरिया खाद की आवश्यकता कम हो जाती है।
ओमकार सिंह, इफको हरियाणा ने जैव उर्वरकों के बारे जानकारी देते हुये बताया कि ये लाभदायक जीवाणुओं की कल्चर होती है जिसमें एजोटोबैक्टर जीवाणु वायुमन्डल से नाईट्रोजन का स्थिरीकरण कर अनाज वर्गीय फसलों को उपलब्ध करवाता है। इसी तरह फॉस्फेट घोलक जीवाणु जमीन में निष्क्रिय पडे फास्फोरस को घोलकर फसलों को उपलब्ध करवाते हैं। इनके प्रयोग से खादों की 25-30 प्रतिशत मात्रा में कटौती की जा सकती है व पैदावार में 10.15 प्रतिशत की बढ़ौतरी होती है।
डा0 पुष्पेन्द्र वर्मा ने कहा कि इफको द्वारा नैनो यूरिया तरल विकसित किया गया है जिसके आधा लिटर के दो छिडकाव से फसल में यूरिया के प्रयोग को 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। इसकी 500 मिली लिटर की एक बोतल यूरिया के एक बोरे के बराबर कारगर है। नैनो यूरिया के कणों का पत्तियों की कौशिकाओं  में भण्डारण हो जाता है व पौधों की आवशयकता अनुसार धीरे-धीरे उपलब्ध होता रहता है। परम्परागत यूरिया के मुकाबले इसके परिवहन व भण्डारण की लागत किसान को कम पडेगी। खरीफ सीजन में नैनो डीएपी के ट्रायल भी किये जा रहे हैं।
प्रवीण कुमार, सहायक प्रबन्धक इफको अम्बाला ने बताया कि किसानों को खादों का उपयोग मिट्टी परीक्षण के आधार पर करना चाहिये। यूरिया का प्रयोग आवश्यकता से अधिक किये जाने के कारण मिट्टी के स्वास्थय पर प्रतिकूल असर पड रहा है। जमीनों में सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक, मैंगनीज, लोहा व बोरोन की कमी सामने आ रही है। अच्छी पैदावार के लिये सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग भी आवशयक है।
निरंजन सिंह ने सभी किसान भाईयों को नई तकनीकियों व जानकारी से खेती करने की सलाह दी ताकि फसल उत्पादन लागत को कम किया जा सके। इस अवसर पर प्रदयूमन सिंह के खेत पर लगाये गये नैनो यूरिया के ट्रायल का सभी ने अवलोकन किया व नैनो यूरिया का फसल के फूटाव व बढवार पर पडने वाले सकारत्मक परिणामों को भी देखा। 

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