• Tue. Jan 18th, 2022

क्या डी.सी. अपने पद कारण अम्बाला क्लब के प्रेजिडेंट हो सकते हैं ?

Byadmin

Mar 27, 2021

1983 में क्लब की मूल रजिस्ट्रेशन नियमावली में किया गया था उल्लेख – हेमंत

अम्बाला शहर –  बीते कल 26 मार्च को  शहर के इकलौते  प्रतिष्ठित अम्बाला क्लब के नए  चेयरमैन और पदाधिकारियों  अर्थात क्लब की नई कार्यकारी परिषद  के चुनाव हेतु निर्धारित मतदान को  कुछ घंटे पूर्व ही मतदाता सूची में तकनीकी खामियों के कारण  स्थगित कर दिया  गया.

शहर निवासी और  हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने एक रोचक परन्तु महत्वपूर्ण बिंदु के बारे में  जानकारी देते हुए बताया कि वर्षो से न केवल क्लब से सदस्य और शहरवासी यहीं जानते हैं कि जिले के डीसी (उपायुक्त )  ही  पदेन (उनके पद कारण) अंबाला क्लब के प्रेजिडेंट (अध्यक्ष )  होते हैं हालांकि चेयरमैन का निर्वाचन किया जाता रहा है.

इसी बीच   सवाल यह उठता रहा कि क्या डी.सी. अपने जिले में स्थापित  ( गैर-सरकारी ) क्लब  के अपने पद के फलस्वरूप  प्रेसिडेंट  हो सकते हैं.  ऐसा माना जाता है कि चूंकि यह क्लब   तत्कालीन शहर की नगर पालिका की भूमि पर  ही  बनाया गया था, इसलिए इसमें अंबाला के डी.सी. और   एस.डी.एम. को उनके  ओहदे कारण वरिष्ठ  पदाधिकारी बनाया गया था.

हेमंत ने बतायाकि  कोई  भी  आई.ए.एस. या आई.पी.एस. अधिकारी अखिल भारतीय सेवाए (आचरण ) नियम, 1968  के  अनुसार किसी  क्लब की गतिविधियों में भाग तो ले सकता है  बशर्ते इस बारे में उस अधिकारी द्वारा राज्य सरकार को ऐसा करने के एक माह के भीतर सूचित किया जाए एवं  सरकार उसे ऐसी क्लब की   गतिविधियों में भाग लेने से मना न करे. इस आशय में  हेमंत ने कुछ समय पूर्व  हरियाणा के मुख्य सचिव के अधीन आने वाले  कार्मिक विभाग में  जब आरटीआई याचिका दायर कर डीसी अंबाला के अंबाला क्लब का प्रेसिडेंट होने के संबंध में संपूर्ण सूचना मांगी, तो उन्हें सम्बंधित  शाखा  से जवाब मिला कि  उनके पास ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है.

 हेमंत ने  हरियाणा के रजिस्ट्रार, फर्म एवं सोसाइटीज में एक आरटीआई याचिका दायर कर अंबाला क्लब के मूल रजिस्टरेशन के  सारे आधिकारिक रिकार्ड का  स्वयं निरीक्षण भी किया था और संबंधित दस्तावेजों की कापियाँ हासिल की
जिसके बाद उन्हें मालूम हुआ  कि अम्बाला क्लब के सम्बन्ध में मामला भिन्न है. यहाँ डी.सी. अम्बाला व्यक्तिगत तौर पर क्लब के सदस्य एवं  प्रेसिडेंट नहीं अपितु अम्बाला क्लब को जब वर्ष मई,1983 में हरियाणा में  तत्कालीन लागू सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन  कानून, 1860 में एक सोसाइटी के तौर पर रजिस्टर करवाया गया,  तो इसकी मूल नियमावली में
 सर्वप्रथम अंबाला डिवीजन के कमिशनर (मंडलायुक्त) को उसका पैटरन (संरक्षक) एवं डी.सी. अंबाला को उसका पदेन प्रेसिडेंट जबकि एसडीएम अंबाला को वरिष्ठ वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर उसमें स्पष्ट  उल्लेख है. इसका अर्थ है कि चाहे डी.सी. अम्बाला कोई भी हो, वो स्वत: अम्बाला क्लब का पदेन अध्यक्ष होगा.  हालाकि डी.सी. अम्बाला क्लब की किसी बैठक आदि में स्वयं न भाग लेकर अपना कोई प्रतिनिधि भी भेज सकते है.    

हेमंत ने आगे बताया कि   जब  नौ वर्ष पूर्व  तत्कालीन हुड्डा सरकार ने प्रदेश विधानसभा से हरियाणा सोसाइटीज रजिस्ट्रीकरण एवम रेगुलेशन कानून, 2012  बनवाया जो 29 मार्च, 2012 से लागू किया गया जिसके बाद  हरियाणा में इससे  पूर्ववत पंजीकृत सभी सोसाइटीज को नए  2012 कानून में रजिस्टर करवाने हेतु  कहा गया तो  दिसम्बर, 2016 में अम्बाला क्लब ने अपना आपको सोसाइटी के तौर पर जब फिर से रजिस्टर करवाया तो अपने मेमोरेंडम और उप-विधियों में डी.सी. अथवा अन्य किसी सरकारी   अधिकारी का इसमें कोई सन्दर्भ ही नहीं रखा अर्थात क्लब के नए आन्तरिक सञ्चालन नियमो / उप-विधियों के अनुसार डी.सी. अम्बाला इसका पदेन अध्यक्ष नहीं होगा. यहाँ तक कि अध्यक्ष अथवा चेयरमैन  के तत्कालीन दो पदों को एक भी बनाकर इसका  एक ही पद सृजित किया गया  जिसका चयन चुनाव द्वारा ही करवाने का उल्लेख है. बीते कल स्थगित चुनाव के   नोटिस में चेयरमैन, सेक्रेटरी, जॉइंट सेक्रेटरी, खजांची, चार कार्यकारिणी के सदस्य और एक महिला (कार्यकारिणी) सदस्य के पदों के निर्वाचन  का उल्लेख है हालांकि  अम्बाला क्लब की नई उप-विधियों के पैरा 14 में  क्लब की गवर्निंग बॉडी में अध्यक्ष (चेयरमैन), उपाध्यक्ष, दो सेक्रेटरी, पांच कार्यकारिणी सदस्य और एक खजांची होंगे.

इसके अलावा अंबाला क्लब की सोसाइटी तथा उसकी कार्यकारिणी (कार्यकारी परिषद) के लिए उक्त 2012 अधिनियम  के अनुसार रजिस्टर्ड सोसाइटियों के संचालन एवं चुनावो की सब शक्तिया डी.सी. के पास नहीं अपितु  उक्त 2012 कानून के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा पदांकित संबंधित  जिला रजिस्ट्रार के पास निहत है जो हरियाणा सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग का अधिकारी होता है. गत 10 मार्च  को जारी अंबाला क्लब के  चुनावी नोटिस में चेयरमैन एवं  अन्य पदों के लिए कार्यकाल दो वर्ष दर्शाया गया है हालांकि अम्बाला क्लब को जब उक्त 2012 कानून में पुनः पंजीकृत करवा  नई उप-विधियों बनाई गईं, तो उनमें यह समय-सीमा तीन वर्ष है. हालाकि क्लब की पुरानी नियमावली में यह सीमा दो वर्ष ही  थी. अंबाला क्लब की कार्यकारिणी का पिछला चुनाव  तीन वर्ष पूर्व 1 अप्रैल 2018 को हुआ था

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *