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क्या गज़ेटेड अफसर को उसके गृह ज़िले में तैनात किया जा सकता है ?

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May 12, 2021

हिदायतों अनुसार सामान्य प्रशासन विभाग की पूर्व स्वीकृति आवश्यक  – हेमंत

चंडीगढ़ – क्या हरियाणा सरकार की सेवा में कार्यरत  किसी गज़ेटेड अफसर (राजपत्रित अधिकारी ) को उसके  सम्बंधित विभाग  द्वारा सीधे तौर पर उसके  गृह ज़िले में तैनात किया जा सकता है ?  गज़ेटेड अधिकारी  से अभिप्राय  है  हरियाणा सरकार की ग्रुप ए या ग्रुप बी  (दूसरे शब्दों में क्लास वन या  क्लास टू) सेवा/कैडर  का सदस्य.

इस सम्बन्ध में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा वर्ष 1989 और 1991 में इस सम्बन्ध में हिदायतें जारी की गयी थीं जो आज तक लागू हैं एवं  राज्य सरकार द्वारा समय समय पर   सभी विभागों के प्रशासनिक सचिवों एवं विभागध्यक्षों आदि को पत्र जारी कर इन्हे दोहराया भी जाता है एवं इनकी सख्ती से अनुपालना सुनिश्चित करने बारे निर्देश दिया जाता है.

उन्होंने  बताया कि उपरोक्त  सरकारी हिदायतों के अनुसार सामान्यत: गज़ेटेड अधिकारियों के   विभाग द्वारा उनका तबादला कर सीधे उनके   गृह ज़िले में  तैनात नहीं किया जा सकता एवं सम्बंधित विभाग द्वारा प्रदेश के सामान्य प्रशासन (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ) विभाग की पूर्व सहमति के पश्चात ही ऐसा हो सकता है हालांकि प्रदेश के सचिवालय में तैनात गज़ेटेड  अधिकारी, प्रदेश के  विभागाध्यक्ष , मंडलायुक्त, एक से अधिक ज़िलों के अधिकार-क्षेत्र में पड़ने वाले विभागों के कार्यालयों में कार्यरत अधीक्षक अभियंता (सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर-  एस.ई ) एवं उक्त कार्यालयों में तैनात अन्य अधिकारी,  शिक्षा विभाग में कार्यरत प्रोफेसर और सीनियर लेक्चरर एवं  प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत डॉक्टर इसका  अपवाद हैं अर्थात इन सभी  पर उक्त नीति लागू नहीं होती.

 छः माह पूर्व नवंबर, 2020 में प्रदेश सरकार द्वारा जारी एक  पत्र में पुन: उल्लेख  कर  निर्देश दिया  गया  कि विशेष तौर पर उल्लेखित उक्त  वर्गों के अतिरिक्त  शेष गज़ेटेड अधिकारियों को उनके गृह ज़िले में तबादला कर तैनात करने से पहले  सामान्य प्रशासन विभाग से पूर्व स्वीकृति प्राप्त करनी आवश्यक  है जबकि  वास्तव में होता यह है कि  ऐसे गज़ेटेड  अधिकारियों को उनके सम्बंधित विभाग द्वारा उनके गृह ज़िले में तबादला करने के बाद  स्वीकृति प्रदान करने के लिए मामला सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा जाता है जिसका सरकार द्वारा गंभीर संज्ञान लिया गया है.

बहरहाल, जहाँ तक एचसीएस (हरियाणा सिविल सेवा -कार्यकारी शाखा ) अधिकारियों का विषय है, तो उनकी फील्ड पोस्टिंग (ज़िलों/उपमंडलों  आदि में तैनाती) पर भी उक्त नीति लागू होती है. हेमंत ने बताया कि बीते दिनों  जब वो प्रदेश के सभी एचसीएस  अधिकारियों  की मौजूदा तौर पर  तैनाती का मुख्य सचिव कार्यालय की वेबसाइट पर अवलोकन कर रहे थे, तो उन्होंने पाया  कि 2011 बैच के एक एचसीएस अधिकारी-डॉ. सुशील कुमार  जिनका गृह जिला पानीपत दर्शाया जा रहा  है, उन्हें इसी वर्ष  26 फरवरी को प्रदेश के कार्मिक विभाग द्वारा जारी एक आदेश अनुसार  जिला पालिका आयुक्त, जींद के पद से  बदलकर   पानीपत में ही जिला परिवहन अधिकारी (डीटीओ ) कम सचिव, आर.टी.ए. पद पर तैनात किया गया. इस प्रकार वह  एचसीएस वर्तमान में अपने ही गृह ज़िले में तैनात है.

हेमतं ने बताया  कि  प्रदेश के   कार्मिक  और सामान्य प्रशासन दोनों विभागों के प्रशासनिक सचिव  मुख्य सचिव  होते हैं जबकि राजनीतिक तौर पर यह दोनों विभाग मुख्यमंत्री के अधीन आते हैं. उन्होंने बताया कि प्रदेश में आईएएस और एचसीएस अधिकारियों की तैनाती और तबादले के आदेश मुख्यमंत्री द्वारा कार्मिक विभाग के मंत्री  के तौर पर दिए निर्देशों की अनुपालना में मुख्य सचिव के हस्ताक्षर से  जारी किये जाते हैं. अब  जब किसी एचसीएस/आईएएस  अधिकारी को कार्मिक विभाग  द्वारा ही उसके  गृह ज़िले में तैनात कर किया जाता है, तो क्या इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग की स्वीकृति की आवश्यकता होगी अथवा नहीं, यह देखने लायक है ?   

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