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कोविड-19 के लिए नियुक्त नोडल अधिकारियों और जिला उपायुक्तों के साथ संकट समन्वय समिति की बैठक :

Byadmin

Jun 12, 2020

चंडीगढ़, 12 जून- हरियाणा की मुख्य सचिव श्रीमती केशनी आनन्द अरोड़ा ने कहा कि कोरोना वायरस संकट के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति से निपटने के लिए राज्य पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने कहा कि इस वैश्विक महामारी के प्रसार को रोकने और प्रभावी ढंग से इसका मुकाबला करने के लिए समय-समय पर सक्रिय रणनीतियां बनाई जा रही हैं।

         मुख्य सचिव ने आज यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोविड-19 के लिए नियुक्त नोडल अधिकारियों और जिला उपायुक्तों के साथ संकट समन्वय समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को कोविड-19 के प्रबंधन की तैयारियों में तेजी लाने, टेस्टिंग सुविधा बढ़ाने, कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग, क्लिनिकल मैनेजमेंट पर अधिक ध्यान केंद्रित करने, कंटेनमेंट जोन पर कड़ी निगरानी पर जोर देने के साथ-साथ जन-जागरूकता गतिविधियों को बढ़ाने के निर्देश दिए।

         उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग के मानदंडों का पालन करना अनिवार्य है और इन निर्देशों को सख्ती से लागू किया जाए।

         मुख्य सचिव ने नियंत्रण क्षेत्रों (कंटेनमेंट जोन) की निगरानी के बारे में संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि अब नियंत्रण क्षेत्र में एंट्री और एग्ज़िट पॉइंट का सीमा निर्धारण करने के साथ साथ कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग और क्लिनिकल प्रबंधन पर प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि कस्बों और गांवों में निगरानी पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जन जागरूकता समय की जरूरत है और इसके लिए पंचायतों, रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और स्वयंसेवकों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करें।

         उन्होंने कहा कि हर अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडरों की उपलब्धता को पांच गुना बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत हो तो कोविड केयर सेंटर में भी ऑक्सीजन सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा, अस्पताल में बेड की क्षमता, पीपीई किट की पर्याप्त उपलब्धता और मृत शरीर का प्रबंधन को भी प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी भयावह स्थिति से निपटने के लिए एमबीबीएस, पैरामेडिक और नर्सिंग के अंतिम वर्ष के छात्रों को प्रशिक्षित किया जाए।

         मुख्य सचिव ने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण (एसएआरआई) या इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारियों (आईएलआई) की निगरानी सावधानीपूर्वक की जाए ताकि प्रारंभिक चरण में ही किसी भी संभावित  संक्रमण का पता लगाया जा सके।

         उन्होंने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग करें, एक ऐसा तंत्र तैयार करें जिसमें कोविड लक्षण होने वाले किसी भी व्यक्ति को पता होना चाहिए कि उसे कहां जाना है। इसके अलावा, वायरस के फैलाव को रोकने के लिए और व्यापक कदम उठाए जाने चाहिए।

         होम आईसोलेशन के संबंध में मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हए कहा कि गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी रोगी, जिनमें कोविड-19 के हल्के या पूर्व-लक्षण पाए जाते हैं, उस स्थिति में संक्रमण की श्रंख्ला को तोडऩे के लिए ऐसे रोगियों को तुरंत होम आईसोलेशन में भेजा जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी मामलों में रोगियों के स्वास्थ्य की निगरानी नियमित रूप से इंसिडेंट कमांडरों द्वारा की जानी चाहिए और इस सूचना को निगरानी टीमों के साथ भी साझा किया जाना चाहिए।

         मुख्य सचिव ने कहा कि टीबी, किडनी संबंधी, आदि जैसे पूर्व बीमारियों से पीडि़त लोगों की मॉनिटरिंग पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ प्रत्येक घर की निगरानी के कार्य को जारी रखी जाए।

         स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री राजीव अरोड़ा ने कहा कि हरियाणा में वायरस को फैलने से रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं और लगातार कठोर रणनीतियां बनाई जा रही हैं।

         उन्होंने कहा कि सभी उपायुक्त प्रदेश में कोविड से निपटान के प्रबंधन की रणनीतियों में और तेजी लाना सुनिश्चित करें और मुख्य रूप से कोरोना मामलों की निगरानी से लेकर इसके उपचार पर अधिक जोर दिया जाए। जन जागरूकता गतिविधियों में तेजी लाने के साथ-साथ यूनिट टीमों के माध्यम से हाई रिस्क वाले मरीजों की पहचान करने के लिए फीडबैक तंत्र विकसित करने पर जोर दिया जाए।

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