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कृषि मंत्री पर ठोकेगें मानहानि का दावा- राजेन्द्र आर्य

Byadmin

Jul 25, 2020


गैर राजनैतिक किसान संगठन राजनीतिक लांछन बर्दाश्त नहीं करेंगे
चण्डीगढ़ : हरियाणा के कृषि मंत्री जे.पी. दलाल की ओर से साक्षात्कार के दौरान किसान यूनियन से जुड़े लोगों पर किसानों के नाम से अवैध तौर पर खर्चा लेने का जो संगीन आरोप लगाया गया है वह एकदम बेबुनियाद है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के हरियाणा प्रदेशाध्यक्ष राजेन्द्र आर्य दादूपुर ने कहा कि कृषि मंत्री के इस ब्यान से प्रदेश के किसान आहत हुए। उन्होंने कहा कि अगर जे.पी. दलाल के पास इस तरह की कोई जानकारी है तो उसे तुरन्त सबूतों के साथ सार्वजनिक करें नहीं तो किसानों से माफी मांगने के लिये तैयार रहे। अगर दलाल के आरोप सही पाये जाते हैं तो उनको सम्मानित भी किया जायेगा। राजेन्द्र आर्य ने कहा कि कृषि मंत्री ने किसान यूनियन का आवरण ओढऩे वाली जो बात कही है कृषि मंत्री को उस आवरण पर से पर्दा हटाना चाहिये। किसान नेता राजेन्द्र आर्य ने चेतावनी देते हुए कहा कि कृषि मंत्री ने इस मसले पर प्रैस कांफ्रेंस करके खुलासा नहीं किया तो मानवता के आधार पर त्यागपत्र देने के लिये तैयार रहें। राजेन्द्र आर्य ने कहा कि गैर राजनैतिक किसान संगठन राजनीतिक लांछन बर्दाश्त नहीं करेंगे व कृषि मंत्री पर अदालत में मानहानि का मुकद्दमा ठोकेंगे। राजेन्द्र आर्य ने कहा कि 30 जुलाई को कैथल के नीम साहिब गुरूद्वारा में सभी किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की सामूहिक बैठक बुलाई गई है। कृषि मंत्री कैथल मीटिंग में पहुँचकर साक्षात्कार में दिये गये ब्यान पर सबूतों के साथ स्पष्टीकरण दें अन्यथा माफी मांगे। अगर कोई किसान नेता सच में दोषी पाया जाता है तो उसे संगठनों से बाहर का रास्ता दिखाया जायेगा। दलाल को किसानों के मुद्दों की कम समझ है व काबलियत से बढ़ कर मंत्रालय मिला है। भाजपा यह भी स्पष्ट करे कि उन्होंने विपक्ष में रहते हुए कितने किसान नेताओं व आंदोलनों को फाईनैंस किया है। किसानों की भलाई करने की जिम्मेवारी सरकार की है। अगर किसान नेताओं की ये जिम्मेवारी होती तो किसानों का कब से भला हो जाता। चाहे सरकार किसी की भी हो विपक्ष की भूमिका में हमेशा किसान संगठन ही रहते हंै। भाजपा अपने शासनकाल में किये गये किसान हितैषी कार्यों पर श्वेत पत्र जारी करे। ऐसे ही ब्यानों से पिछली सरकार के सभी मंत्री अर्श से फर्श पर आ गये थे। हरियाणा के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ था कि खाद के लिये पुलिस थानों में लाईन लगी हो व मंडियों के गेटों पर पुलिस ने किसानों पर लाठियां भांजी हों पर बीजेपी शासनकाल में ये भी संभव हुआ है। कृषिमंत्री मुँह संभाल कर ब्यानबाजी करें व अपने किसान विरोधी एजेण्डे का त्याग करे। प्रदेश के किसान नेता कृषि मंत्री के साथ किसी भी खुले मंच पर बहस के लिये तैयार हैं।  सरकार में तवज्जो न मिलने के कारण कृषि मंत्री किसानों पर भड़ास निकाल रहे हैं। कृषि मंत्री कम काबलियत होने के बावजूद भी अपने आप को चौधरी छोटू राम से बड़ा किसान हितैषी न समझें। अगर अपने ब्यान को तथ्यों के साथ साबित नहीं कर पाये तो मंत्रीमंडल से त्यागपत्र देने के लिये तैयार रहें।

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