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कृषि अध्यादेश पर हस्ताक्षर करने की बजाय राष्ट्रपति उसे संशोधन के लिए वापिस भेजें: चित्रा सरवारा

Byadmin

Sep 22, 2020


अम्बाला छावनी : सारे संवैधानिक नियमों और कायदे कानून को ताक पर रखकर राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित किए गए कृषि अध्यादेश पर दस्तखत करने की बजाय महामहिम राष्ट्रपति इसे किसानों के हित में संशोधन के लिए वापिस सरकार के पास ले जाएं। 
हरियाणा डैमोक्रेटिक फ्रंट की नेत्री चित्रा सरवारा ने आज पत्रकारवार्ता में कहा कि देश के लाखों किसान कृषि विधेयक के खिलाफ सड़कों पर धरने प्रदर्शन करके अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। इन किसानों का ध्वनि-मत तो सरकार ने सुना नहीं। किसानों के हितों का कुठारघात करने के लिए राज्यसभा में अपने सहयोगियों की बहुमत न होने के भय से कृषि विधेयक को ध्वनि मत की आड़ में पारित करवा लिया। उन्होंने कहा कि सरकार ढिंढौरा पीट रही है कि इन 3 कृषि विधेयकों के लागू होने के बाद किसानों को बहुत लाभ होगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार का यह वादा भी हर खाते में 15 लाख डालने और कृषि बीमा योजना से किसानों को लाभ होने का सपना दिखाने जैसा ही होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को बरगलाने के लिए उनके खाते में 4 महीने बाद 2000 रुपए डालकर सरकार किसान हितैषी होने का नाटक करती है। लेकिन कृषि बीमा करवाने के नाम पर प्राईवेट कंपनियां किसानों से प्रीमियम के नाम पर जो लाखों का घोटाला कर रही है उस पर सरकार मौन है। 
चित्रा सरवारा ने कहा कि हरियाणा डैमोक्रेटिक फ्रंट के संस्थापक चौधरी निर्मल सिंह अतीत से लेकर भविष्य तक किसानों के साथ रहे हैं और रहेंगे। कोरोना संक्रमण के चलते अब पूर्णत स्वस्थ्य होने के बाद भी वे डॉक्टरों की सलाह पर अभी कुछ और दिन तक जनसंपर्क नहीं कर पाएंगे। लेकिन उनकी गैर मौजूदगी में वे किसानों के साथ हर मोर्चे पर कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करने को दल बल के साथ तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा डैमोक्रेटिक फ्रंट किसान यूनियनों को सहयोग देने के साथ साथ पार्टी स्तर पर भी प्रदेश के सभी मुख्यालयों पर जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन देकर किसानों के हक में निर्णय करने की गुहार करेंगे। उन्होंने विभिन्न किसान यूनियनों से भी आह्वान करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में आपसी मतभेद मिटाकर सभी एकजुट होकर किसानों के हितों की लड़ाई को लड़ें।  
चित्रा सरवारा ने केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार की नीतियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह सरकार निजीकरण की आड़ में चहेते पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए उम्मादा है। देश इस समय अभूतपूर्व संकट में है। इसलिए समाज के सभी वर्गों को आपसी मतभेद भूलाकर किसानों का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसान और खेतीबाड़ी बर्बाद होंगे तो खेतीबाड़ी पर आश्रित देश की 60 फीसदी आबादी का भविष्य भी अंधकार में हो जाएगा। 
 *HDF ज्ञापन से माध्यम से अदरणीय प्रधानमंत्री के आगे बिल पर हस्ताक्षर ना करने की गुहार के साथ ये मांग और सुझाव रखता है -* 
 *1. सरकार बिल में संशोधन कर लिखे की MSP से नीचे किसान की फसल दण्डनीय अपराध होगा – चाहे खरीद मंडी में हो या नए नियम के तहत contract पर हो I* *2. किसान की फसल की गुणवत्ता का सर्टिफिकेट कोई तीसरी संस्था करे ( सरकारी हो तो बहतर है) और उसी सर्टिफिकेट पर खरीद हो I*  *3. किसान की पूरी की पूरी फैसल खरीदी जाय, खरीद पर कोई सीमा ना हो I किसान को अच्छा बीज़, खाद और दाम दे कर उसे अधिक से अधिक पैदावार के लिए प्रोत्साहित करें I सच में भारतीय खेती और किसान को सशक्त करें , विश्व में उसका उत्पादन भेजें ना कि हमारे किसान की फसल सड़कों पर बिखरे और सरकार विदेश से खरीद करे I*  *4. किसानों की शिकायत के निवारण के लिए सशक्त माध्यम दें, केवल स्थानीय अधिकारी उनके अधिकार और मुआवजे सुनिश्चित नहीं करवा पाएंगे I* *5. निजी कंपनियों को किसी एक इलाके में एक-छत्र  हक़ ना मिले खरीद करने के लिए I खरीद की स्पर्धा का फायदा किसान को पहुंचे ना कि उल्टा बेचने की स्पर्धा में किसानों अपने माल को घाटे में बेचने को मजबूर ना हो I* 

उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार किसानों की इतनी ही शुभचिंतक है तो उसे यह प्रस्ताव भी पास करना चाहिए कि एमएसपी से कम कीमत पर किसानों की फसल को खरीदना गैर कानूनी और दंडनीय होगा। चित्रा सरवारा ने कहा कि यदि सरकार कृषि विधेयक को जबरन किसानों पर थोपेगी तो हरियाणा डैमोक्रेटिक फ्रंट रोष प्रदर्शन, ज्ञापन के साथ साथ कानूनी प्रावधानों का भी इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। इस अवसर पर मुख्य रूप से ब्रह्मपाल राणा, वीरेन्द्र गांधी, विश्वनाथ यादव, अविनाश, विजय गुम्बर, जरनैल सिंह माजरा, सुरेंद्र बोह, रामपाल मंडान, विजय शर्मा, जगतार सिंह शाहपुर, गुलजार सिंह, गुर्जतन सिंह बिल्लू, पाला प्रधान, जसबीर सिंह गरनाला, राजेश शर्मा, सुरिंदर राजू शर्मा, सुलतान घसिटपुर, बिट्टू मछोण्डा, सुभाष भाषी, पवन बंगा, धर्म सिंह, राम सिंह, अमित हांडा, करतार टक्कर, अवतार बरनाला, साहब सिंह, सुरिंदर सरपंच सरसेहड़ी, नवीन टुटेजा, गौरव मंडान, रिंकू चौधरी, नरमैल शाहपुर, बिल्ला करधान, राजपाल तेपला, गुलाब पुनिया, गुरदेव गरनाला, सुखचैन पंजोखरा, गुरकिरपाल सिंह जस्सल इत्यादि उपस्थित रहे।

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