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इफको नैनो यूरिया तरल की खेप हरियाणा के लिये रवाना

Byadmin

Jun 16, 2021

अम्बाला 16 जून:- इफको के सहायक क्षेत्रीय प्रबन्धक प्रवीण कुमार ने बताया कि नैनो तकनीक से निर्मित उत्पाद इफको नैनो यूरिया तरल जल्द ही जिला अम्बाला के किसानों को उपलब्ध होना शुरु हो जायेगा। हरियाणा के लिये इसकी पहली खेप को गुजरात में कलोल संयंत्र से इफको के अध्यक्ष बलविन्द्र सिंह नकई ने वर्चुअल माध्यम से हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। इस अवसर पर इफको के प्रबन्ध निदेशक उदय शंकर अवस्थी व अन्य बोर्ड सदस्य उपस्तिथ रहे।
किसानों द्वारा फसलों की नाइट्रोजन तत्व की पूर्ति के लिये यूरिया खाद का प्रयोग किया जाता है। फसलें जमीन से यूरिया का केवल 30.40 प्रतिशत हिस्सा ही ग्रहण कर पाती हैं। बाकी 60.70 प्रतिशत भाग जमीनए, हवा व पानी में व्यर्थ चला जाता है जोकि इनके प्रदुषण का कारण बनता है। यूरिया से बनने वाला नाईट्रेट भूजल को प्रदूषित करता है। यूरिया से जमीनों की अम्लियता बढती है जो लाभकारी सूक्ष्म जीवों के विकास को प्रभावित करती है। यूरिया के प्रयोग से अमोनिया व नाईट्रस ऑक्साईड गैस बनती है जो हवा को प्रदुषित करती है। यूरिया के विकल्प के तौर पर इफको नैनो बायो रिसर्च सेन्टर, कलोल द्वारा नैनो यूरिया तरल का विकास किया गया है। नैनो यूरिया के एक कण का आकार 32 नैनो मीटर होता है जबकि परम्परागत यूरिया के कण का आकार 1 मिलिमीटर से 3 मिलीमीटर तक होता है। नैनो यूरिया का विशिष्ट सतही क्षेत्रफल सामान्य यूरिया के मुकाबले 10 हजार गुणा अधिक होता है जिस कारण पौधों में इसकी सक्रियता अधिक होती है व फसल इसका 80.85 प्रतिशत उपयोग कर पाती है। नैनो यूरिया की आधा लिटर की एक बोतल यूरिया के एक बोरे के बराबर कारगर होगी। इसके दो छिडकाव से फसलों में  प्रयोग होने वाले यूरिया की 50 प्रतिशत मात्रा में कमी लाई जा सकती है। इसके प्रयोग से विभिन्न फसलों की पैदावार में औसतन 8 प्रतिशत की बढ़ौतरी पाई गई है। इसका पहला छिडकाव फसल के फुटाव के समय व दूसरा छिडकाव फूल आने से पहले की अवस्था में किया जाता है। किसानों के लिये यह उत्पाद इफको बाजार केन्द्र व सहकारी समितियों पर रुपये 240 प्रति बोतल की दर से उपलब्ध रहेगा।
जिला अम्बाला में प्रतिवर्ष लगभग 81000 मिट्रीक टन यूरिया की खपत होती है। पीक सीजन के दौरान कई बार यूरिया की रेक समय पर न मिलने के कारण किसानों को किल्लतों का सामना करना पडता है। यूरिया का 3-4 महीने से ज्यादा समय के लिये भन्डारण करने पर इसकी भौतिक दशा भी खराब हो जाती है व किसानों द्वारा पसंद नहीं किया जाता है। नैनो यूरिया तरल किसानों को यूरिया का एक विकल्प उलब्ध करायेगा जो कि कम खर्च में फसल की नाईट्रोजन की आवशयकता की पूर्ति करेगा।

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