• Mon. Jul 4th, 2022

आज तक अंबाला शहर से केवल एक विधायक ही डेढ़ वर्ष के लिए रहे मंत्री – हेमंत

Byadmin

Apr 1, 2021

लेखवती जैन, सुमेर चंद और फकीर चंद हालांकि बने विधानसभा डिप्टी स्पीकर
अम्बाला शहर – हरियाणा विधानसभा स्पीकर (अध्यक्ष) ज्ञान चंद गुप्ता द्वारा  वित्त-वर्ष 2021-22 के लिए गठित विधानसभा की  विभिन्न कमेटियों (समितियों ) में अम्बाला शहर विधानसभा हलके से लगातार दूसरी बार भाजपा से   विधायक बने असीम गोयल नन्यौला को  मौजूदा विधानसभा में लगातार तीसरी बार सदन  की स्थायी एवं एक वित्तीय  समिति – सार्वजनिक उपक्रम समिति  (कमेटी ऑन  पब्लिक अंडरटेकिंग्स ) का चेयरमैन लगाया गया है.
बहरहाल, इसी बीच स्थानीय निवासी हाईकोर्ट के एडवोकेट  हेमंत कुमार  ने बताया कि इसे अम्बाला शहर  हलके का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि हरियाणा के अलग राज्य बनने के  बीते 54 वर्षों में केवल एक बार ही स्थानीय विधायक और वह भी  मात्र डेढ़ वर्ष के लिए ही प्रदेश सरकार में मंत्री बन सका है.  

उन्होंने  बताया कि आज से 16 वर्ष पूर्व मार्च, 2005 में जब कांग्रेस के  भूपिंदर सिंह हुड्डा पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने अपने तत्कालीन विश्वासपात्र एवं करीबी रहे और अंबाला  शहर से तब पहली बार  विधायक बने विनोद शर्मा को अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर उन्हें  आबकारी एवं कराधान  विभाग और वन विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया हालांकि जनवरी, 2006 में शर्मा को बिजली, लोक निर्माण और पर्यावरण विभाग दे दिया गया परन्तु शर्मा को अपने बड़े पुत्र सिद्धार्थ वशिष्ठ उर्फ़ मनु शर्मा को बहुचर्चित जेसिका लाल हत्याकांड  मामले  में दिल्ली की एक सैशंस कोर्ट द्वारा फरवरी, 2006 में बरी करने  के बाद जब मीडिया के दबाव के चलते दिल्ली हाई कोर्ट में इसके विरूद्ध दिल्ली सरकार द्वारा अपील दायर की गई, तब हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई दौरान एवं फैसला आने से दो माह पूर्व ही  शर्मा को अक्टूबर , 2006 में हरियाणा के मंत्री पद से त्यागपत्र देना पड़ा था. दिसंबर, 2006 में दिल्ली हाईकोर्ट ने मनु शर्मा को दोषी करार कर उम्रकैद की सजा दे दी. 

इसके बाद हालांकि अक्टूबर, 2009 में विनोद शर्मा शहर से लगातार दूसरी बार कांग्रेस के  विधायक बने परन्तु उन्हें  हुड्डा सरकार में मंत्री नहीं बनाया गया. अप्रैल, 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने मनु शर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा दोषी करार करने  और  उम्रकैद की सजा देने के फैसले को बरक़रार रखा. जून, 2014 में विनोद शर्मा ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और शहर विधायक पद से त्यागपत्र  भी दे दिया और अपनी हरियाणा जनचेतना पार्टी (वी) बनाई और अक्तूबर, 2014 में अपनी ही पार्टी से शहर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा परंतु वह भाजपा के असीम गोयल से हार गए. इस प्रकार विनोद शर्मा की शहर से जीत की हैट्रिक रह गई थी. बीते वर्ष जून, 2020 में मनु शर्मा 14 वर्षों की कैद पूरी कर जेल से रिहा हो गए एवं दिसम्बर, 2020 में अंबाला शहर नगर निगम चुनावों में विनोद शर्मा की धर्मपत्नी शक्ति रानी शर्मा हजपा पार्टी पर चुनाव लड़ शहर की सीधी मेयर  भी निर्वाचित हुई हैं.
बहरहाल,  हेमंत ने बताया कि वर्ष 1968 और वर्ष 1972 के विधानसभा आम चुनावो में शहर से बनी कांग्रेस विधायक लेखवती जैन, वर्ष 1991 में चुनाव जीते कांग्रेस के सुमेर चंद भट्ट और वर्ष 1996 में बने भाजपा विधायक फकीर चंद अग्रवाल तीनो हालांकि विधानसभा के डिप्टी स्पीकर के पद पर पहुंच पाए थे.

उन्होंने आगे बताया कि शहर विधानसभा हलके से  लगातार दूसरी बार भाजपा के  विधायक बने असीम गोयल नन्यौला पिछली भाजपा  सरकार में भी  हालांकि मंत्री  या किसी अन्य सरकारी पद पर  आसीन नहीं हो सके थे हालांकि तत्कालीन विधानसभा स्पीकर कँवर पाल गुर्जर (वर्तमान में प्रदेश के शिक्षा मंत्री) द्वारा उन्हें सदन की  शहरी स्थानीय और पंचायती राज  संस्थाओं  के विषय पर बनी कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया था.
मौजूदा भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार के मंत्रीमंडल  में हालांकि दो मंत्री पद खाली पड़े है जो आगामी कुछ दिनों में भरे जा सकते हैं  जिनमें से एक भाजपा और दूसरा उसकी सहयोगी  जजपा के कोटे में जाएगा. इस मंत्रीमंडल विस्तार में असीम गोयल का नंबर लगने की संभावना नगण्य है क्योंकि अंबाला कैंट से छठी बार विधायक अनिल विज 7 विभागों के साथ प्रदेश मंत्रीमंडल में मूख्यमंत्री के बाद नंबर दो पर पहले से  हैं. अंबाला जिले की बाकी 2 विधानसभा सीटों – नारायणगढ़ और मुलाना (आरक्षित) पर वर्तमान में  कांग्रेस के विधायक हैं. 
हेमंत ने बताया कि चूंकि वर्ष 2016 में हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार द्वारा  नियुक्त होने वाले  मुख्य संसदीय सचिव (चीफ पार्लियामेंट्री सैकेट्ररी) के पदों को असंवैधानिक करार कर दिया था जिनपर पहले सत्ताधारी पार्टी के उन विधायकों को लगाया जाता था जो मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए जा सकते थे, इसलिए अब असीम को मुख्य संसदीय सचिव भी नहीं नियुक्त किया जा सकता है. 
हेमंत का मानना है कि सार्वजनिक उपक्रम समिति का चेयरमैन नियुक्त होने के कारण  असीम को  किसी बोर्ड और निगम का चेयरमैन भी नहीं लगाया जा सकेगा कयोंकि एक ही समय पर कोई विधायक हरियाणा के लोक उपक्रमों अर्थात बोर्ड-निगमों पर  निगरानी रखने वाली विधानसभा की समिति का चेयरमैन  और साथ साथ ही वह  स्वयं ही किसी बोर्ड निगम का चेयरमैन नहीं हो  सकता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published.