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अम्बाला लोकसभा सीट से भाजपा सांसद से 2 वर्ष में ही केंद्रीय मंत्रीपद छिना

Byadmin

Jul 7, 2021


मनमोहन सिंह की दो सरकारों में 10 वर्षों तक केंद्रीय  मंत्री  रही थीं  शैलजा –  हेमंत

अम्बाला – दो वर्ष पूर्व मई, 2019 में  17 वीं लोकसभा के आम चुनावो में अम्बाला लोक सभा (अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित)   सीट से भाजपा के  रतन लाल कटारिया, जो  लगातार दूसरी बार और कुल तीसरी बार सांसद निर्वाचित हुए थे,  एवं जिन्हे वर्तमान  मोदी सरकार में जल शक्ति मंत्रालय और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में बतौर  राज्यमंत्री बनाया गया था, उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया  अथवा अगर दूसरे शब्दों में कहा जाए, तो   मोदी सरकार द्वारा उनसे इस्तीफ़ा लेकर उन्हें केंद्रीय मंत्रिपरिषद से हटा दिया गया है.

शहर निवासी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि अम्बाला लोक सभा सीट में अम्बाला, पंचकूला और यमुनागर के कुल 9 विधानसभा हलके आते हैं. 2 वर्ष पूर्व   कटारिया ने  रिकॉर्ड 57 प्रतिशत वोट हासिल कर   कांग्रेस की  वरिष्ठ  नेत्री  कुमारी शैलजा, जो वर्तमान में  हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष भी  हैं,  को 3  लाख 42 हज़ार वोटों के विशाल अंतर से हराया था. इससे पहले कटारिया ने  वर्ष 2014 और वर्ष 1999 के लोक सभा चुनावों में भी  अम्बाला लोकसभा सीट से चुनाव जीता था हालांकि वर्ष 2004 और 2009 लोकसभा चुनाव में वह लगातार दो बार   शैलजा से चुनाव  हार गए थे. कटारिया  हरियाणा प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष  भी रहे चुके हैं.  

कटारिया की पत्नी बंतो देवी कटारिया  गेल (गैस अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड ) के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स में 2018 में बतौर गैर-सरकारी  स्वतंत्र  डायरेक्टर के रूप में मनोनीत किया गया था  जबकि उनके पुत्र चंद्रकांत कटारिया दिसंबर, 2019 में हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस ) में चयनित होकर   राज्य सरकार  में क्लास वन अधिकारी हैं.

 हेमंत  ने बताया कि जहाँ तक अम्बाला लोक सीट  से केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किये सांसदों का प्रश्न है, तो वैसे तो सबसे पहली बार आज से 25 वर्ष पूर्व मई, 1996 में अम्बाला से चौथी बार सांसद बने भाजपा के सूरज भान को केंद्र में तत्कालीन  अटल बिहारी वाजपेयी की पहली सरकार में केंद्रीय कृषि मंत्री अर्थात कैबिनेट रैंक का मंत्री बनाया गया था परन्तु यह सरकार 13 दिन में ही गिर गयी.

हालांकि भान इसके बाद लोक सभा के उपाध्यक्ष निर्वाचित हो गए. इसके बार फरवरी, 1998 में  हुए लोक सभा चुनावो में सूरज भान बसपा के अमन कुमार नागरा से हार गए और इस कारण यह वाजपेयी की अगली 13  महीने की सरकार में मंत्री नहीं बन पाए. फिर 1999 लोक सभा चुनावो में उन्होने चुनाव नहीं लड़ा और अम्बाला से रतन लाल कटारिया पहली बार चुनाव जीते.  हालांकि  वाजपेयी सरकार ने सूरज भान को पहले उत्तर प्रदेश और   फिर हिमाचल का राज्यपाल और बाद में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का चेयरमैन नियुक्त किया था एवं वह 2006 में अपने देहांत तक इसी पद पर रहे.

हेमंत ने आगे बताया कि दूसरी ओर  शैलजा  जो अम्बाला सीट से लगातार दो लोक सभा चुनाव- 2004 और 2009 में   जीतने से पहले  सिरसा लोकसभा सीट से भी दो बार- 1991 और 1996 में सांसद  रह चुकी है, उन्हें वर्ष 1992 -95  में तत्कालीन कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार में पहले  केंद्रीय उप मंत्री, फिर 1995 -96  में में केंद्रीय राज्य मंत्री रही थी. इसके बाद मनमोहन सिंह की पहली यू.पी.ए.-1   सरकार में उन्हें वर्ष 2004 -2009 तक केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया. इसके बाद  मई 2009  में यू.पी.ए. -2 सरकार के बनते ही उन्हें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कैबिनेट रैंक का मंत्री बना दिया था जहाँ वह मई, 2014 तक रहीं. इसी दौरान वह अप्रैल, 2014 में 6 वर्षों के लिए हरियाणा से राज्य सभा सांसद भी निर्वाचित हुई थीं.  इस प्रकार शैलजा  वर्ष 1991 से 2014 तक हर केंद्र में सत्तारूढ़ हर कांग्रेस  सरकार में केंद्रीय मंत्री के हर पद – उप मंत्री, राज्य मंत्री, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं कैबिनेट मंत्री रह चुकी है.  

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