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अपनी सम्पत्ति की रजिस्ट्री ही बनी जनता के लिए नया जंजाल :- चित्रा सरवारा

Byadmin

Sep 8, 2020


                             अम्बाला छावनी-आज हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट की नेत्री चित्रा सरवारा ने जारी एक प्रेस व्यगपति में कहा कि हरियाणा सरकार को और से सम्पत्ति की रजिस्ट्री के लिए बनाए गए नए सॉफ्टवेयर और प्रॉपर्टी व्यवसाय मैं आ रही दिक्कतों पर विचार करने की जरुरत हैं। रजिस्ट्री घोटाले की जांच में और रजिस्ट्री सम्बन्धित सॉफ्टवेयर को अपडेट करने के नाम पर पूरे प्रदेश में सब प्रकार की रजिस्ट्रियों पर पूर्णतयः प्रतिबंध जनता के नजरिये से गैरकानूनी व असवैधानिक हैं। नोटबन्दी, जीएसटी, लॉकडाउन जैसी गलत नीतियों से पीड़ित जनता पहले ही मंदी व बदहाली की मार झेल रही है, इसपर जनता के सम्पत्ति बेचने पर पूर्णतयः रोक लगा देना सरकार का अमानवीय चेहरा प्रदर्शित करता है। हर प्रोपर्टी डीलर काला धंधा नही कर रहा है बल्कि इनके माध्यम से सेकड़ो परिवारों के घर चल रहे हैं और जनता अपनी सम्पत्ति का विधिपूर्वक ईस्तेमाल कर फायदा उठा पा रही है । राजमिस्त्री, प्लम्बर, कारपेंटर, पेंटर, इलेक्ट्रीशियन, मार्बल फिटर, पीओपी कारीगर सहित अनेक व्यक्तियो को रोजगार देने के साथ-साथ ईंट, रेत,रोड़ी, बजरी,सीमेंट,पेंट,लकड़ी जैसे अनगिनत व्यवसाय प्रत्यक्ष रूप से प्रोपर्टी से जुड़े है। पिछले कई वर्षो से रजिस्ट्रियां बन्द होने के कारण ये व्यवसाय भी बन्द होने के कगार पर है। चित्रा ने कहा कि जनता जिसे अपना घर बनाने के लिए बैंक से लोन लेना था प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री न होने के कारण  उनका अपने आशियाने का सपना अधर में रूक गया है।
सरकार को इस क्षेत्र की कोई चिंता नही है जबकि इस क्षेत्र से राजस्व की प्राप्ति सरकार की आमदन का मुख्य स्रोत है। सॉफ्टवेयर अपडेट के नाम पर 22 जुलाई से रजिस्ट्री पूर्णतयः बन्द है और जो सॉफ्टवेयर अपलोड किया गया है उसमें जटिलताओं के साथ-साथ कमियां भी बेशुमार है। सॉफ्टवेयर में हाउसिंग बोर्ड की सम्पत्तियां नजर नही आ रही, ट्रांसफरडीड के लिए भी विकास शुल्क की मांग आ रही है, पहले ऑनलाइन प्रार्थना करने के पश्चात सम्बन्धित विभाग 14 दिन के अंदर एनओसी जारी करेगा या अस्वीकार करेगा, मतलब किसी ने आपातस्तिथि में अपनी सम्पत्ति बेचनी हो तो वो सम्भव नही होगा, इसके साथ ही सबसे बड़ी खामी सॉफ्टवेयर की यह है कि सम्पत्ति नियमित कॉलोनी में हो या अवैध कॉलोनी में, सॉफ्टवेयर के अनुसार पहले विकासशुल्क जमा कराने होंगे, बाद में सम्बन्धित विभाग एनओसी की कार्यवाही करेगा। यदि कोई व्यक्ति अवैध कॉलोनी का विकासशुल्क जमा करवा देता है और विभागीय अनुमति नही मिलती तो रिफंड लेने के लिए भी कई महीने सरकारी विभागों के चक्कर काटने पड़ेंगे साथ ही जमा शुल्क का 10% सरकार कटौती करने के पश्चात ही रिफंड देगी। आम व्यक्ति तो क्या, तहसील कर्मचारी व विशेषज्ञ भी सॉफ्टवेयर की कमियां निकाल रहे है। जबतक उपयुक्त सॉफ्टवेयर उपलब्ध न हो तब तक वैकल्पिक व्यवस्था से कार्य तो चलता रहना चा

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