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अंबाला सहित 9 नगर निगमों के अस्तित्व पर कानूनी प्रश्न चिन्ह बरकरार:-हेमंत

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Mar 16, 2021

15 मार्च को पारित नगरपालिका संशोधन विधेयक द्वारा नहीं दूर हुई गड़बड़ी – हेमंत

19 सितम्बर 2020 से हर जिला मुख्यालय पर स्थित नगर निगम  है कानूनन नगर परिषद

चंडीगढ़ – हरियाणा विधानसभा के मौजूदा  बजट सत्र में सोमवार 15 मार्च को प्रदेश की  भाजपा-जजपा सरकार द्वारा सदन में
हरियाणा नगर निगम  (संशोधन) विधेयक, 2021 और हरियाणा नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2021 भी   पारित करवाए  गए हैं. इन दोनों विधेयकों  द्वारा प्रदेश के  नगर निगम कानून, 1994 और नगरपालिका कानून, 1973   की कई धाराओं में संशोधन किया गया है जिसमे नगर निकायों द्वारा अपने क्षेत्राधिकार में स्थित भवन एवं भूमि पर वार्षिक तौर पर लगाए जाने वाले प्रॉपर्टी टैक्स (जो कई वर्ष पहले हाउस टैक्स होता था ) के  निर्धारण  में बदलाव करने  एवं इस सम्बन्ध में  राज्य सरकार द्वारा नोटिफाई किये जाने वाले फ्लोर रेट (दर ) के आधार पर नगर निकायों द्वारा  प्रॉपर्टी टैक्स लगाने का प्रावधान किया गया है जिसमें समय समय पर सम्बंधित नगर निकाय निर्धारित  प्रक्रिया की अनुपालना कर वृद्धि भी कर सकती हैं.

बहरहाल, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि जहाँ तक सदन द्वारा पारित हरियाणा नगर पालिका (संशोधन) विधेयक, 2021 का विषय है, तो इसके द्वारा  मूल हरियाणा नगरपालिका कानून, 1973 की धारा 2 ए में हालांकि एक ही बिंदु पर  संशोधन किया गया है जबकि इसके अतिरिक्त एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु छूट गया है.  

 इस संबंध में उन्होंने बताया कि छः माह पूर्व अगस्त, 2019 में हरियाणा विधानसभा द्वारा हरियाणा नगरपालिका कानून  की धारा 2ए में संशोधन कर  यह प्रावधान किया गया था  कि जनसँख्या के बावजूद हरियाणा के हर ज़िला मुख्यालय पर विधमान/स्थापित म्युनिसिपेलिटी (नगर निकाय) का दर्जा नगर परिषद का होगा.

19 सितम्बर 2020  से  इस कानूनी संशोधन अर्थात  हरियाणा  नगरपालिका  (संशोधन) अधिनियम, 2020 के लागू होने के बाद प्रदेश   के  जिला मुख्यालयों  पर  बीते कई  वर्षो से स्थापित  नगर निगमों का कानूनी अस्तित्व ही समाप्त हो गया है क्योंकि  संशोधित प्रावधान अनुसार  हर  जिला मुख्यालय पर विद्धमान /स्थापित  म्युनिसिपेलिटी का दर्जा  नगर परिषद का है   बेशक वहां की जनसँख्या कितनी भी हो.

हेमंत ने बताया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 (क्यू)  में और   हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 एवं  हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 दोनों कानूनों  में  म्युनिसिपेलिटी शब्द  का कानूनी अर्थ होता   है- नगर पालिका, नगर परिषद या नगर निगम. इस कारण  हरियाणा के हर  जिला मुख्यालय की हर म्युनिसिपेलिटी वर्तमान में कानूनन नगर परिषद  है. हालांकि चूंकि फरीदाबाद नगर निगम का स्पष्ट उल्लेख हरियाणा नगर निगम  कानून, 1994 की धारा 3 में है इसलिए उसका  कानूनी अस्तित्व कायम है. वहीं दिसंबर, 2020 द्वारा अधिसूचित नई   मानेसर नगर निगम भी वैध है क्योंकि मानेसर जिला मुख्यालय नहीं है बल्कि गुरूग्राम जिले का ही अंश है.

हेमंत ने बताया कि हरियाणा नगरपालिका कानून, 1973  की धारा 2 ए में हरियाणा की सभी मुनिसिपलिटीस  का वर्गीकरण है जिसके अनुसार 50 हज़ार तक की जनसँख्या वाले छोटे शहरों  में नगरपालिका, 50 हज़ार से  तीन लाख तक  आबादी वाले   माध्यम शहरो में नगर परिषद  जबकि तीन लाख से ऊपर की जनसँख्या वाले बड़े शहरों /महानगरों में नगर निगम होगी.  

 वर्तमान में मानेसर के अलावा प्रदेश के  10 जिला मुख्यालयों- अम्बाला, पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, हिसार, रोहतक, सोनीपत, फरीदाबाद और गुरुग्राम नगर निगम है जबकि  12 जिला मुख्यालयों – कैथल, थानेसर (कुरुक्षेत्र), सिरसा, जींद, फतेहाबाद, भिवानी, चरखी दादरी, पलवल, रेवाड़ी, नारनौल, झज्जर और नूहं में  नगर परिषद है. कुछ समय पूर्व तक नूहं  जिला मुख्यालय  पर  भी  नगरपालिका थी चूँकि  यहाँ  की जनसँख्या  50 हज़ार से कम होने के कारण  कानूनी रूप से नूहं नगर पालिका को  नगर परिषद नहीं घोषित किया जा सकता  इसलिए यहाँ नगर परिषद बनाने  के लिए 1973 कानून  की  धारा 2 ए में उपरोक्त कानूनी   संशोधन कर यह उल्लेख  किया गया कि “परन्तु किसी जिला मुख्यालय पर विद्धमान /स्थापित  म्युनिसिपेलिटी  इसकी जनसँख्या पर विचार किये बिना नगर परिषद होगी”.

हेमंत का कहना है कि हर जिला मुख्यालय में विद्धमान/स्थापित नगर  निकाय के लिए  नगर परिषद होने का उल्लेख न केवल निश्चित रूप से भ्रम उत्पन्न करता है बल्कि प्रदेश की वर्तमान 9  जिला मुख्यालयों पर स्थापित नगर निगमों का  कानूनी अस्तित्व भी समाप्त करता है. उन्होंने  बताया कि हरियाणा नगरपालिका  (संशोधन) अधिनियम,2020  लागू होने के बाद  कानूनन 3 लाख से ऊपर जनसँख्या वाले  बड़े शहरों में तो नगर निगम स्थापित हो सकती है जैसे मानेसर में किया गया है   परन्तु हर जिला मुख्यालय  पर कानूनन नगर परिषद ही होगी बेशक वहां जनसँख्या  3 लाख से ऊपर हो. यह निश्चित तौर पर  विचित्र स्थिति है.

 हेमंत ने सर्वप्रथम बीती  21 सितम्बर को उक्त कानूनी विसंगति को सुधारने के लिए   राज्य सरकार और हरियाणा   निर्वाचन आयोग को प्रतिवेदन भेजा था   जिस पर  आयोग ने  संज्ञान लेकर  29 सितम्बर को शहरी निकाय विभाग के निदेशक  को  आवश्यक कार्यवाही करने हेतू लिखा. इसके बाद  भी वो लगातार प्रदेश सरकार और विभाग को निरंतर लिखते रहे हैं. इसी बीच दिसंबर, 2020 में अम्बाला, पंचकूला और सोनीपत  तीन नगर निगमों के आम चुनाव भी करवा लिए गए परंतु आवश्यक संशोधन नहीं हुआ. बहरहाल, उक्त गड़बड़ी दूर करने  के लिए हरियाणा नगरपालिका कानून की धारा 2 ए में फिर उपयुक्त संशोधन करना पड़ेगा एवं हर जिला मुख्यालय पर जनसँख्या के बावजूद नगर परिषद होने के  उल्लेख में उपयुक्त परिवर्तन करना होगा

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