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अंबाला नगर निगम का दर्जा बचाने हेतु मानसून सत्र में कानूनी संशोधन हो – हेमंत

Byadmin

Aug 19, 2021

बीते 11 माह से अम्बाला सहित 9  नगर निगम  है कानूनन नगर परिषद  
19 सितम्बर 2020 से लागू  कानून अनुसार हर जिला मुख्यालय पर जनसंख्या के बावजूद नगर-परिषद  

नगर निगम कमिश्नर, मेयर और किसी पार्षद ने  आज तक नहीं उठाया मामला  अम्बाला शहर –  आज से 11 महीने पूर्व  19 सितम्बर 2020  से   हरियाणा  म्युनिसिपल   (संशोधन) कानून, 2020 लागू हुआ जिसके  फलस्वरूप अंबाला सहित  प्रदेश   के  9 जिला मुख्यालयों  पर  बीते कई  वर्षो से स्थापित  नगर निगमों का कानूनी अस्तित्व ही समाप्त हो गया है  क्योंकि उक्त कानून द्वारा हरियाणा म्युनिसिपल कानून, 1973 में डाले गये एक प्रावधान  अनुसार  हर  जिला मुख्यालय पर विद्धमान /स्थापित  म्युनिसिपेलिटी (नगर निकाय ) का  दर्जा  नगर परिषद का होगा   बेशक वहां की जनसँख्या कितनी ही  हो.
अंबाला शहर निवासी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार  ने  बताया कि न केवल  भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 (क्यू)  अनुसार बल्कि   हरियाणा म्युनिसिपल  अधिनियम, 1973 एवं  हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 अर्थात हरियाणा विधानसभा द्वारा प्रदेश की शहरी नगर-निकायों के लिए बनाये दोनों  कानूनों  में  म्युनिसिपेलिटी शब्द  का कानूनी अर्थ होता   है- नगर पालिका, नगर परिषद या नगर निगम.
इस कारण उपरोक्त संशोधन कानून लागू होने के बाद   हरियाणा के हर जिला मुख्यालय की हर म्युनिसिपेलिटी वर्तमान में कानूनन नगर परिषद  है. हालांकि चूँकि  फरीदाबाद  नगर निगम का स्पष्ट उल्लेख हरियाणा नगर निगम  कानून, 1994 की धारा 3 में किया गया है इसलिए उसका  कानूनी अस्तित्व कायम  है. वहीं  दिसंबर, 2020 में  अधिसूचित   मानेसर नगर निगम भी का कानूनन वैध है क्योंकि मानेसर जिला मुख्यालय नहीं है चूंकि वह गुरुग्राम ज़िले के भीतर ही पड़ता है.
हेमंत ने आगे बताया कि हरियाणा म्युनिसिपल  कानून, 1973  की धारा 2 ए में हरियाणा की सभी मुनिसिपलिटीस  का वर्गीकरण है जिसके अनुसार 50 हज़ार तक की जनसँख्या वाले छोटे शहरों  में नगरपालिका (म्युनिसिपल कमेटी),  50 हज़ार से  तीन लाख तक  आबादी वाले   मध्यम  शहरो में नगर परिषद (म्युनिसिपल कौंसिल )  जबकि तीन लाख से ऊपर की जनसँख्या वाले बड़े शहरों /महानगरों में नगर निगम (म्युनिसिपल कारपोरेशन) का प्रावधान है. 
उन्होंने बताया कि वर्तमान में मानेसर के अलावा प्रदेश के  10 जिला मुख्यालयों- अम्बाला, पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, हिसार, रोहतक, सोनीपत, फरीदाबाद और गुरुग्राम में नगर निगम है जबकि  12 जिला मुख्यालयों – कैथल, थानेसर (कुरुक्षेत्र), सिरसा, जींद, फतेहाबाद, भिवानी, चरखी दादरी, पलवल, रेवाड़ी, नारनौल, नूहं  में  नगर परिषद है हालाकि इसके अतिरिक्त ही 10 अन्य शहरो ( अम्बाला सदर, बहादुरगढ़, गोहाना, हांसी, होडल, कालका, मंडी डबवाली, नरवाना, सोहना और टोहाना ) में भी  नगर परिषद है.
12 फरवरी 2021 से पूर्व  नूहं  जिला मुख्यालय पर भी  नगरपालिका थी. वहां   की जनसँख्या  50 हज़ार से कम होने के कारण  कानूनी रूप से नूहं नगर पालिका को  नगर परिषद नहीं घोषित किया जा सकता था इसलिए वहां  नगर परिषद बनाने  के लिए उपरोक्त  1973 कानून  की  धारा 2 ए में अगस्त, 2020 में मौजूदा सरकार द्वारा विधानसभा से  संशोधन करवा  यह उल्लेख  कर दिया गया कि “परन्तु किसी जिला मुख्यालय पर विद्धमान /स्थापित  म्युनिसिपेलिटी ( नगर निकाय) इसकी जनसँख्या पर विचार किये बिना नगर परिषद होगी”.
हेमंत ने बताया कि उपरोक्त संशोधन से नूंह जिला मुख्यालय पर तो नगर परिषद कायम हो गयी परन्तु गत 11 महीनों से जिला मुख्यालय पर विद्धमान/स्थापित मुनिसिपलिटी का दर्जा नगर परिषद का होने का उल्लेख से अंबाला सहित कुल 9  जिला मुख्यालयों पर स्थापित नगर निगमों का  कानूनी अस्तित्व भी समाप्त हो गया है.
उन्होंने  बताया कि उपरोक्त संशोधन कानून   लागू होने के बाद  हरियाणा में कानूनन 3 लाख से ऊपर जनसँख्या वाले  बड़े शहरों में तो नगर निगम  हो सकती है जैसे दिसंबर, 2020 में  मानेसर में  भी किया गया   परन्तु हर जिला मुख्यालय  पर कानूनन नगर परिषद ही होगी बेशक वहां जनसँख्या  3 लाख से ऊपर हो. यह निश्चित तौर पर बेहद ही   विचित्र स्थिति है.  
हेमंत  ने   बीते वर्ष सितम्बर माह से आज तक  प्रदेश सरकार विशेषकर  शहरी स्थानीय विभाग के मंत्री अनिल विज, विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एस.एन. रॉय और विभाग के  निदेशक आदि को इस सम्बन्ध में  कई बार लिखा और  प्रतिवेदन भेजे परन्तु दुर्भाग्यवश आज तक उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई.  विधानसभा द्वारा  हरियाणा म्यूनिसिपल  कानून, 1973 की धारा 2ए में पुनः उपयुक्त संशोधन करने से ही उपरोक्त गड़बड़ी सही की जा सकती है

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